क्वीन्स यंग लीडर

-उत्तर भारत के बिहार के सोन अंचल के मूलवासी शरद सागर जुटे हुए हैं सामाजिक उद्यमिता के वैश्विक अभियान में

-पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय प्रतिष्ठित वार्षिक अंटार्कटिका अभियान के लिए चुनी गई है  पुणे के सह्याद्रि स्कूल की  8वीं क्लास की किशोर उम्र छात्रा  13 वर्षीय आन्या सोनी 

पटना (बिहार) – विशेष संवाददाता । 2016 में 30 साल से कम उम्र के 30 ग्लोबल टैलेंट की फोब्र्स सूची में शामिल 26 साल के शरद सागर को इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ के सम्मान में स्थापित क्वीन्स यंग लीडर्स में शामिल किया गया है, जिसके तहत राष्ट्रमंडल के 52 देशों में प्रभावपूर्ण कार्य कर रहे चुुनिंदा युवाओं को सम्मानित किया जाता है। जून में क्वीन्स यंग लीडर्स अवार्ड पाने वाले शरद सागर बिहार के प्रथम युवा होंगे। एशिया के चुने गए 24 युवाओं में तो वे एकमात्र भारतीय हैं।

सोशल इंटरप्राइज के संस्थापक हैं शरद सागर
शिक्षा व सेवा के क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक उद्यमी शरद सागर को 2015 में अमेरिका के राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने व्हाइट हाउस में बतौर युवा अतिथि आमंत्रित किया था। वे पिछले साल ओस्लो (नॉर्वे) में आयोजित नोबले शांति पुरस्कार समारोह में भी विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए थे। राष्ट्रमंडल देशों में चुनौतीपूर्ण परेशानियों का समाधान निकालने की दिशा में कार्यरत फोब्र्स सूची के नवयुवाओं में नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त मलाला यूसेफाई और फेसबुक के सह संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भी शामिल हैं। शरद सागर एंटरप्रेन्योर वल्र्ड को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जो सोशल इंटरप्राइज संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल के संस्थापक सीईओ हैं। 2013 में इन्हें रॉकेफेलर फाउंडेशन ने सदी के 100 सर्वश्रेष्ठ सामाजिक उद्यमियों की सूची में रखा था।
पिता ने ली थी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति
शरद सागर स्टेट बैंक आफ इंडिया से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले बिमलकांत प्रसाद के बेटे हैं, जो पटना (बिहार) में रहते हैं। बिमलकात प्रसाद के मुताबिक, शरद सागर ने 12 साल की उम्र में पटना के हाईस्कूल में दाखिला लिया था। शरद को चार करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति मिली और शरद ने अमेरिका के वोस्टन स्थित मेसाच्यूस्ट विश्वविद्यालय से स्नातक (अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय) किया। विश्वविद्यालय के समारोह को संबोधित करने वाले इस विश्वविद्यालय के 160 साल के इतिहास में शरद सागर प्रथम भारतीय थे।
पर्यावरण जागरुकता यात्रा के लिए अंटार्कटिका जाएगी किशोरी
जहां उत्तर भारत के बिहार के सोन अंचल के मूलवासी शरद सागर सामाजिक उद्यमिता के वैश्विक अभियान में जुटे हुए हैं, वहीं पुणे के सह्याद्रि स्कूल की 8वीं क्लास की किशोर उम्र छात्रा 13 वर्षीय आन्या सोनी पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय प्रतिष्ठित वार्षिक अंटार्कटिका अभियान के लिए चुनी गई हैं। क्लाइमेट फोर्स : अंटाकर्टिका 2018 एक्सपीडिशन के लिए दुनिया भर से 80 लोग चुने गए हैं, जिनमें आन्या भी हैं। 27 फरवरी से लेकर 12 मार्च 2018 तक चलने वाले इस अभियान की अगुवाई सर रॉबर्ट स्वान करेंगे, जो पृथ्वी के दोनों ध्रुवों (दक्षिण व उत्तर) पर जाने वाले पहले व्यक्ति हैं।

आन्या के घर-परिवार में पर्यावरण संरक्षण का माहौल
ध्रुव यात्रा का अभियान जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए है। इस तरह के अभियान से भविष्य में कॉर्पोरेट और कम्युनिटी लेवल पर सामाजिक बदलाव में सहायता मिलेगी। आन्या का परिवार घर में भी सस्टेनेबल एनर्जी का प्रयोग करता है और घर-परिवार में पर्यावरण के प्रति जागरूकता का माहौल है। आन्या के पिता जिस एनर्जी ऐनालिटिक्स कंपनी में काम करते हैं, वह उद्योगों की ऊर्जा संरक्षण के लिए काम करती है।
यात्रा खर्च के लिए क्राउड फंडिंग
आन्या की मां प्रतिभा के अनुसार, आन्या के रुझान को देखते हुए हमने क्लाइमेट फोर्स का फॉर्म भर दिया। आन्या अभी नाबालिग हैं, जिस वजह से वह भी इस अभियान में शामिल होंगी। हमने इस अभियान के लिए फ्यूल ड्रीम संगठन के जरिए क्राउड फंडिंग से पैसा जुटाना शुरू कर दिया है। अब तक करीब डेढ़ सौ लोगों-संस्थाओं से 10 लाख रुपये से जुटाया भी जा चुका है।

-सोनमाटी समाचार

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