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उपचुनाव : बदलते सामाजिक ध्रुवीकरण के बीच कौन बनेगा करोड़पति जैसा सवाल ?

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-विशेष प्रतिनिधि। लोकसभा चुनाव के साथ बिहार में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी हो रहा है और दिलचस्प यह कि दोनों के जनप्रतिनिधियों को किए अपराध की सजा मिलने पर सदन की सदस्यता समाप्त हो जाने के कारण यह उपचुनाव हो रहा है। डिहरी विधानसभा क्षेत्र बदलते सामाजिक ध्रुवीकरण वाला क्षेत्र रहा है, जहां इस बार उपचुनाव में जनप्रतिनिधि चुना जाना कौन बनेगा करोड़पति जैसे सवाल की तरह खड़ा है?
सामाजिक समीकरण जटिल, पूर्वानुमान लगाना कठिन
सभी मान रहे हैं कि मुकबला तीन रथियों के बीच है, जिनमें से एक ही अपने श्रेष्ठ मत-प्रदर्शन से महारथी बनेगा। भले ही  उम्मीदवारों के राजनीतिक दल और राजनीतिक कार्यकर्ता कहते रहे हों कि चुनाव नेता लड़ता है, मगर डिहरी विधानसभा इस बात का उदाहरण है कि यहां जनता लड़ती है। नेता वोट के लिए अपने-अपने गणित का गुणा-भाग करते रहें, जुगत भिड़ाते रहें और अपनी-अपनी वकालत करते रहें, मगर आखिरी फैसला तो मतदाता ही सुनाते हैं। डिहरी विधानसभा का सामाजिक समीकरण इतना जटिल है कि पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं, सिर्फ अपने-अपने तरीके से राय भर रखी जा सकती है। यादवों-मुसलमानों की निर्णयकारी मतसंख्या के बावजूद यहां मंडलवाद का माई समीकरण 2005 में ध्वस्त हुआ और बतौर विकल्प निर्दलीय प्रत्याशी प्रदीप जोशी की जीत हुई। इस विधानसभा क्षेत्र में प्रबल राष्ट्रवाद के पोषक दल भाजपा के मौजूद होने के बावजूद 2010 में भी यहां निर्दलीय उम्मीदवार ज्योति रश्मि जोशी मैदान मार लेने में सफल रही। जाहिर है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आकार ग्रहण करने वाला सघन प्रबल राष्ट्रवाद शहर में प्रवेश करते ही विरल हो जाता है, जहां वैश्य समाज बहुल मतदाताओं के साथ अन्य जाति समुदाय की बड़ी मिश्रित संख्या है।

महिला मतदाता भी निर्णायक भूमिका में
इस क्षेत्र में अब महिला मतदाता भी निर्णायक भूमिका में आ गई हैं, जिसे 2010 में रेखांकित किया गया। मतदान केेंद्रों पर पहुंचने में पिछड़े और मुस्लिम समुदाय की महिलाएं आगे रहती हैं, जबकि अगड़े समुदाय की महिलाएं आम तौर काफी कम संख्या में मतदान करने निकलती हैं। हालांकि तरुण और नए महिला मतदाताओं ने मतदान केेंद्रों तक पहुंचने का उत्साह दिखाया है। डेहरी-आन-सोन के अग्रणी ग्लोबल न्यूज-व्यूज वेबपोर्टल सोनमाटीडाटकाम की डिहरी विधानसभा उपचुनाव की आरंभिक स्थिति पर शहर के विभिन्न वर्ग और सामाजिक शक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों से बातचीत हुई, जिसमें यह जानकारी सामने आई कि अभी तो सभी प्रत्याशी जीत का दावा कर रहे हैं और झूठ-सच प्रचार का शोर सघन है। मतदाता अपनी-अपनी पसंद के स्वर की समीक्षा करेगा और मतदान करने के निर्णय की स्थिति तक पहुंचेगा। मतदाताओं का रूझान पहले की तरह भेड़चाल जैसी नहीं है, वह सोच-विचार करता है। तभी तो यहां निर्दलीय को मजबूती देने वाली की तीसरी सशक्त धारा का निर्माण हुआ। बहस का वह अलग विषय है कि निर्दलीय राजनीतिक धारा की ताकत क्षेत्र के लिए कितनी कारगर रही है या कारगर होगी? अब प्रत्याशी पसंद नहीं आने पर, उसे लादा गया बोझ महसूस होने पर ईवीएम में नोटा बटन दबाने का भी विकल्प है। इसलिए दावे चाहे जिस-जिस के जीतने हों, जैसे हों, कांटे के त्रिकोणीय टक्कर में चुनाव का परिणाम दिलचस्प और अप्रत्याशित भी हो सकता है।

ईवीएम में दबेगा पंसद का बटन
सेवानिवृत अध्यापिका डा. सरिता सिंह कहती हैं कि आज की महिला मतदाता नेता विशेष की पिछलग्गू नहीं है और वह अपने परिवार के पुरुष मुखिया का पहले की तरह आदेशपालक बंधुआ भी नहीं है। उसे अपने विवेक से जो पसंद आएगा, उसके पक्ष में ईवीएम का बटन दबाएगी।
शहर के अग्रणी व्यवसायी समाजवादी धारा के आखिरी जमात के चंद लोगों में से एक विश्वनाथ प्रसाद सरावगी (जयहिंद सिनेमा), कारपोरेट कारोबारी अरुण कुमार गुप्ता (पाली रोड), उदय शंकर (मोहिनी इंटरप्राइजेज) का मानना है कि यह उपचुनाव प्रत्याशियों को परखने-चुनने का है। बेशक दलों के स्तर पर दोनों प्रत्याशी सत्यनारायण प्रसाद सिंह और फिरोज हुसैन पढ़े-लिखे हैं, मगर सत्यनारायण प्रसाद सिंह का सालों से शहर और इलाके से जुड़ाव है। ओबरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके सत्यनारायण सिंह यादव के लिए डिहरी विधानसभा क्षेत्र का समीकरण भिन्न है, मगर उनका यहां घर है और वह यहां लगातार रहते हैं, यह उनका प्लस प्वाइंट है। इनका मानना है कि विधानसभा क्षेत्र की जनता ने बतौर अपना जनप्रतिनिधि उन्हें परखा नहीं है। फिरोज हुसैन का आगमन उनके पिता इलियास हुसैन की विधानसभा सदस्यता होने के कारण अचानक हुआ है, जिससे वह इलाके से मिक्स नहीं हो सके हैं।

एक ओर तीव्र राष्ट्रवाद, दूसरी ओर धुर मंडलवाद
डालमियानगर रोहतास इंडस्ट्रीज कांप्लेक्स के प्रभारी अधिकारी एआर वर्मा का कहना है कि पूरे बिहार में लोकसभा चुनाव में एक ओर तीव्र राष्ट्रवाद है और दूसरी ओर धुर मंडलवाद है। उपचुनाव में भी यही धाराएं प्रभावकारी हैं। दोनों ही वाद भाजपा और राजद के लिए घोषित-पोषित हैं। देश में समाजवाद की आखिरी पार्टी जदयू है, जो राष्ट्रवादी दल भाजपा के साथ है। दूसरी ओर कांग्रेस का गठबंधन राजद के साथ है, मगर बिहार में मजबूत कांग्रेस के बजाय राजद ही है। अब मतदाताओं को इन्हीं के प्रत्याशियों को चुनना है। मतदाताओं के मंथन में दोनों के प्रत्याशियों में से कोई पसंद नहीं आए तो विकल्प निर्दलीय ही बचता है, या फिर नोटा (इनमें से कोई नहीं) का विकल्प है। इस विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रवाद और मंडलवाद से अलग प्रखर हिन्दूत्व का चेहरा 15 साल पहले आकार भी ग्रहण कर चुका है।
स्थानीय प्रत्याशी को मतदाता देंगे महत्व
भाजपा के प्रदेश स्तरीय युवा नेता बबल कश्यप, ज्वेलरी के अग्रणी कारोबारी धीरज कश्यप (सोना ज्वेलर्स), पूर्व प्रत्याशी रिंकू सोनी, अर्जुन प्रसाद केसरी (अर्जुन स्टोर) का कहना है कि हम तो घोषित तौर पर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं और महसूस कर रहे हैं कि मतदाता भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में होंगे। प्रत्याशी स्थानीय हैं, छवि साफ-सुथरी है और कार्यकर्ताओं के लिए उन तक पहुंच सीधी सरल है तो जाहिर है मतदाताओं का आकर्षण होगा। सज्जन अग्रवाल (देवांश फैशन) का कहना है कि मतदाताओं का रूझान तो उस पार्टी के साथ होगा, जो राष्ट्रवाद की पोषक और सीमा पर तैनात हमारे जवानों के प्रति अग्रणी तौर पर संवेदनशील है।

पुराने अनुभवों का दुहराव या नए का चुनाव
उर्वशी होटल के संचालक सन्तोष गुप्ता, तिरूपति कपड़ा शो-रूम के संचालक, मारवाड़ी युवा मंच के संरक्षक ओमप्रकाश केजरीवाल, अखिल भारतीय मध्यदेशीय वैश्य सभा के रोहतास जिला अध्यक्ष सुरेश प्रसाद गुप्ता (मेडिकल कार्नर) का कहना है कि अभी किसी प्रत्याशी के बारे में कुछ कहना जल्दबाजी है। निर्दलीय उम्मीदवारों की ताकत हार-जीत के समीकरण को जटिल बनाएगी। त्रिकोणीय संघर्ष का मजबूत कोण माने जाने वाले निर्दलीय प्रत्याशी को डिहरी की जनता पहले परख चुकी है। अब देखना यही है कि मतदाता नए में से किसी का चुनाव करता है या अपने पुराने अनुभव को ही दुहराता है।
चयन उसका, जो होगा कारोबारियों के लिए हितकारी
कला निकेतन के प्रदीपदास सरावगी, अटैची सेंटर के मो.  अली, कामधेनु के अरुण कुमार गुप्ता, विकास लाज के सुरेंद्र चौरसिया का मानना है कि जीतने के बाद तो सभी प्रत्याशियों का प्रभाव-चरित्र एक ही तरह का देखा जाता है। व्यापारी-कारोबारी अपनी-अपनी दृष्टि से अपने जनप्रतिनिधि के चयन पर विचार कर रहे हैं कि कौन उनके लिए हितकारी होगा? अभी किसी के बारे कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि राय 15 मई के बाद ही स्थिर हो सकेगी।

चुनाव में मतदाताओं ने अपनी-अपनी पसंद का चढ़ा लिया है चश्मा
विधानसभा के मतदाता फिलहाल मौन हैं या बेहद डिप्लोमेट हो गए हैं। मगर जिन मतदाताओं ने अपनी-अपनी पसंद का चश्मा चढ़ा लिया है, वे मुखर हैं और अंतिम समय तक अपने-अपने प्रत्याशी के पक्ष में उनकी मुखरता कायम भी रहेगी। डेहरी चेस क्लब के संस्थापक दयानिधि श्रीवास्तव (शंकर लाज) का कहना है कि जनप्रतिनिधि ऐसा होना चाहिए, जो अपने मतदाताओं की पहुंच में हो। चेस क्लब के संस्थापक संयोजक दयानिधि श्रीवास्तव, सह संस्थापक संयोजक स्वयंप्रकाश मिश्र और सचिव नंदकुमार सिंह कहते है, हमें यह कहने में संकोच नहीं है कि चेस क्लब परिवार ने अपने सदस्य विशेष के लिए अपनी पसंद की राजनीति का चश्मा लगा लिया है।

जबकि डिहरी विधानसभा क्षेत्र का चुनाव लड़ चुके और रोहतास जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष सत्येंद्र प्रसाद सिंह (स्टेशन रोड) का कहना है कि हम अपने समर्थकों के दल-बल सहित भाजपा के साथ है, अपने परिवार की पुश्तैनी पार्टी के साथ हैं। मगर डिहरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडऩे का मेरा पूर्व अनुभव कहता है कि भाजपा प्रत्याशी को भीतरघात रोकने और इसके काट की रणनीति भी पहले से तैयार करनी होगी, क्योंकि अभी तक डिहरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा (पहले जनसंघ) के प्रत्याशी ने जीत हासिल नहीं की है। फिलहाल भाजपा के साथ जदयू और लोजपा की ताकत तो है, फिर भी भाजपा प्रत्याशी के समक्ष दूसरे ध्रुव के मतदाताओं को तोडऩे की चुनौती है और लड़ाई की जवाबदेही भी।

13 प्रत्याशियों का चुनाव लडऩे के लिए नामांकन

बहरहाल, कुल 13 प्रत्याशियों ने चुनाव लडऩे के लिए अपना नामांकन कराया है, जिनके नाम ललन सिंह (राष्ट्रीय समता पार्टी सेकुलर), फिरोज हुसैन (राजद), सत्यनारायण सिंह यादव (भाजपा), डा. शैलेश कुमार सागर (निर्दलीय), तनवीर अंसारी (निर्दलीय), ब्रजमोहन सिंह (सीपीआई), प्रदीप कुमार जोशी (राष्ट्र सेवा दल), रामोगोविन्द दुबे (निर्दलीय), ज्योति रश्मि (निर्दलीय), कृष्ण कुमार (निर्दलीय), प्रदीप कुमार (निर्दलीय), आनंद कुमार चौधरी (निर्दलीय) और विरेंद्र कुमार (निर्दलीय) हैं। दावा सभी का है कि या तो वह जीतेंगे या फिर किसी की जीत-हार का कारण बनेंगे। इनमें से जहां तीन प्रत्याशियों सत्यनारायण सिंह यादव, फिरोज हुसैन और प्रदीप कुमार जोशी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है, वहीं तीन ललन सिंह, ब्रजमोहन सिंह और तनवीर अन्सारी एक हद तक ही सही मत आकर्षित करने वाले उम्मीदवार माने जा रहे हैं।

(रिपोर्ट, तस्वीर : कृष्ण किसलय, साथ में निशान्त राज)

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