कोरोना का मेगा जंप, 36 पाजिटिव/ घर लौट रहे प्रवासी, राहतदाता सक्रिय/ खुलेंगे निजी स्कूल, अभिभावकों से अपील

डेहरी-आन-सोन/सासाराम (रोहतास)-सोनमाटी टीम। 25 मार्च से लागू देशव्यापी लाकडाउन का मकसद यही था कि नए मरीज नहीं बढ़े। संकट यह खड़ा हुआ कि दूसरे राज्यों में जो जहां था, वहीं फंस गया। उनमें बड़ी संख्या प्रवासी श्रमिकों की हैं, जो रोज कमाकर अपने और अपने परिवार का पेट पालते है। यातायात के साधन बंद होने पर प्रवासी मजदूरों का कारवां समूहों में पैदल ही घर की ओर चल पड़ा। एक मई से उनके लिए ट्रेन और बस चलाई गईं, मगर इससे राज्य के ग्रामीण इलाकों में कोरोना ने पांव पसार लिए, जहां मरीज नहीं थे। प्रवसियों के लौटने के बाद मरीजों की संख्या दोगुना से ज्यादा हो चुकी है। 20 दिनों में कोरोना मरीजों की संख्या 1900 पहुंच गई है, जिनमें अधिसंख्य प्रवासी मजदूर हैं। रोहतास जिला 21 मई को पटना से आई जांच रिपोर्ट में 36 मरीज पाजिटिव पाए गए हैं। इस तरह रोहतास में कोरोना के शिकार लोगों की संख्या 127 हो गई। चिंता की बात यह है कि इनमें डेहरी प्रखंड के आठ प्रवासी मरीज शामिल हैं, जिन्हें डीएवी (कटार) के क्वारंटाइन केेंद्र में रखा गया था। सूचना के बाद अनुमंडल प्रशासन इनके संपर्क चेन को खंगालने में जुट गया है, ताकि अन्य संदिग्धों की पहचान कर जरूरी मेडिकल कार्यवाही की जा सके।

वीरकुंवर सिंह चौक पर डालमियानगर का दल :

बिहार और बिहार से गुजर कर पड़ोसी राज्य झारखंड जा रहे प्रवासी श्रमिकों का कारवां हर रोज विस्थापन, बेरोजगारी के दर्द और भूख-दुख के बावजूद इस उम्मीद से जीटी रोड पर अपने घर की ओर बढ़ा जा रहा है कि फटेहाली ही सही, अपने वतन, अपनी जमीन और अपनों के बीच वह जी लेगा। उन्हें अपने वतन में आने-होने का अहसास कराने का कार्य विभिन्न संगठनों को लोग अपने सामाजिक दायित्व निर्वाह के साथ कर रहे हैं। हर रोज सामाजिक कार्यकर्ताओं का समूह भी जीटी रोड के विभिन्न जगहों पर खड़ा होकर ट्रकों, अन्य वाहनों और पैदल भी आने वाले श्रमिकों के लिए पानी और नाश्ता का प्रबंध करने में जुटे हुए हैं। रोहतास उद्योगसमूह परिसर के शासकीय परिसमापक हिमांशु शेखर के निर्देश पर स्थानीय प्रभारी प्रबंधक एआर वर्मा के नेतृत्व में डाालमियानगर परिसर कर्मचारियों का दल वीरकुंवर सिंह चौक पर खड़ा होकर घर लौट रहे प्रवासियों को पानी का बोतल, भोजन का पैकेट, बिस्कुट आदि दे रहा है। एआर वर्मा ने जानकारी दी कि नगर परिषद में चल रहे सामुदायिक किचन में रोहतास उद्योगसमूह परिसर के कर्मचारियों के सहयोग से पांच क्विंटल चालव, तीन टिन तेल और 110 किलो आलू का योगदान किया है।

नगरपरिषद के निकट सोनकला केेंद्र ने बांटी राहत

जीटी रोड पर नगरपरिषद के निकट सांस्कृतिक सर्जना की संवाहक संस्था सोन कला केेंद्र की टीम की ओर से प्रवासियों को राहत सामग्री का वितरण किया गया। सोन कला केेंद्र की ओर से पांच दिन राहत सामग्री वितरण के लिए शंकर लाज में भोजन बनाने वाले हलुवाई को बैठाया गया है। राहत सामग्री वितरण करने वालों में संस्था के संरक्षक राजीवरंजन कुमार (सनबीम स्कूल), सलाहकार चंद्रगुप्त मेहरा, अध्यक्ष दयानिधि श्रीवास्तव, कार्यकारी अध्यक्ष जीवन प्रकाश, उपाध्यक्ष अरुण शर्मा, सचिव निशांत राज, उप सचिव सुशील कुमार ओम, कोषाध्यक्ष राजीवकुमार सिंह, उप कोषाध्यक्ष नंदकुमार सिंह, विशेष सदस्य पारस प्रसाद, अनिल कुमार पाठक, उदय कुमार गुप्ता, सिन्टू सोनी, अविनाश सिन्हा अमूल्य, पिंटू दिलवाले, वीरेन्द्र कुमार, राजेश सिन्हा छोटू, चंदन गुप्ता, दुर्गा चौरसिया, अनिल गुप्ता आदि शामिल थे। उधर, इस दिशा में एक और सामाजिक संगठन अग्रसर हुआ है। आरंभ एक पहल प्रगति की ओर की प्रीति श्रीवास्तव ने सोनमाटीडाटकाम को बताया है कि महिलाओं नेतृत्व वाले उनके संगठन की तैयारी एक हजार भोजन पैकेट वितरण की है, जिसके लिए अरुणा दुबे, अर्चना मिश्रा, प्रिया सिंह, पूजा मिश्रा, विनीता सिंह आदि सक्रिय हैं।

निजी विद्यालयों को खोलने की अनुमति

(निजी विद्यालयों की समस्या से अवगत कराते रोहित वर्मा)

सासाराम (रोहतास)-सोनमाटी संवाददाता। निजी विद्यालयों में अब 33 फीसदी श्रमशक्ति के साथ कार्य शुरू हो जाएगा। जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रेमचंद्र ने जिलाधिकारी पंकज दीक्षित से निजी विद्यालयों की समस्याओं पर चर्चा कर और उनसे निर्देश प्राप्त कर निजी विद्यालयों को 33 फीसदी शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के साथ कार्यालय खोलने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शिक्षण कार्य करने का आदेश दिया है। जिन विद्यालयों में कोविड-19 का क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है, उन पर यह आदेश लागू नहीं होगा। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री डा. एसपी वर्मा और रोहतास जिला इकाई के अध्यक्ष रोहित वर्मा ने रोहतास के जिला शिक्षा पदाधिकारी से मिलकर उन्हें सभी 19 प्रखंड के निजी विद्यालयों में आनलाइन क्लास संचालन और इससे संबंधित परेशानी से अवगत कराया था। इस आदेश के लिए संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमाएल अहमद, राज्य महामंत्री डा. एसपी वर्मा, जिला अध्यक्ष रोहित वर्मा के साथ रोहतास जिला के निजी विद्यालय के संचालकों ने जिला प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है और साधुवाद दिया है।

अभिभावकों से अपील, जमा करें फीस

प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रवक्ता और शिक्षक अर्जुन कुमार ने अभिभावकों से स्कूलों की फीस जमा करने की अपील की है। जान है तो जहान है, इस नीति पर फिलहाल दुनिया चल रही है। मगर कब तक? कोरोना से जंग लड़ते हुए जीने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। कोरोना के भय से हम ठहर जाएंगे, घर छुप जाएंगे, मगर कब तक? भूख और न्यूनतम जरूरत तो ठहरेगी नहीं। हां, अपेक्षित सतर्कता आवश्यक है। कोरोना के कारण हुए लाकडाउन से समाज के निचले पायदान और हाशिये का अल्प आय वर्ग परिवार बेहद परेशान है। जरा सोचिए, अपने परिवार के लिए रोटी, कपड़ा, दवा और न्यूनतम जरूरत की पूर्ति के लिए निजी विद्यालयों का शिक्षक भोर से रात तक कैसा परिश्रम करता है? अपने लिए भी और आपके बच्चों के लिए भी। अभिभावक स्कूल की फीस जमा कराएं, ताकि बच्चों के शिक्षकों को वेतन मिल सके। स्कूल का संचालन फीस पर ही निर्भर है। फीस पर ही सारी व्यवस्था, सारा साज-श्रृंगार है। अभिभावक बच्चों की आनलाइन पढ़ाई के लिए लैपटाप, डेस्कटाप, नोटबुक और अन्य संसाधन की व्यवस्था करें। कोरोना काल में पढ़ाई का यही उपाय है। शिक्षक को हर हाल मेंंस्कूल जाना और नियत समय देना है। स्कूल की फीस का भुगतान पहले की तरह करें। ताकि स्कूल से तनख्वाह और पारिश्रमिक प्राप्त हो सके। वह भी जी सकेें अपने परिवार के लिए और आपके बच्चों के लिए। एक बात और, बिहार में यह चुनावी साल है। कुछ लोग पढ़ाई, फीस, व्यवस्था को लेकर तरह-तरह की अफवाह फैला रहे हैं। अफवाह पर ध्यान नहीं दें, सहयोग करें। हां, समस्या है तो स्कूल प्रबंधन से बात करें। समाधान जरूर होगा, क्योंकि कोरोना संकट सबके लिए है। सबको ही मिलकर रास्ता निकालना है।

One thought on “कोरोना का मेगा जंप, 36 पाजिटिव/ घर लौट रहे प्रवासी, राहतदाता सक्रिय/ खुलेंगे निजी स्कूल, अभिभावकों से अपील

  • May 21, 2020 at 10:36 pm
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    हमें लगता है कि मार्च का पूरी फीस देनी चाहिए और स्कूल प्रबंधक से मिलकर अप्रैल-मई का 50% फीस स्कूल में जमा करा देनी चाहिए ताकि शिक्षकों का पेमेंट हो सके

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