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(प्रसंगवश/कृष्ण किसलय) : … और नियम बनाने वाले ही भूल गए ‘कोरोना का कानून’!

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… और नियम बनाने वाले ही भूल गए ‘कोरोना का कानून’!
-कृष्ण किसलय (संपादक : सोनमाटी)

माननीय आए थे चैता सुनने, सम्मान पाने और फंस गए मुकदमा में। ऐसा इसलिए कि कोविड-19 काल में बिना अनुमति सार्वजनिक समारोह नहीं हो सकता और न उसमें शामिल हुआ जा सकता। आयोजन ऐसा हुआ कि किसी ने मास्क पहनने, सैनिटाइजर प्रयोग करने की जरूरत नहीं समझी और न ही दो गज दूरी के सोशल डिस्टेंस का पालन किया। आयोजन को शामिल होकर प्रोत्साहित करने वालों में जनता द्वारा निर्वाचित तीन विधायक भी हैं, जो कानून बनाने के लिए विधानसभा में भेजे जाते हैं। मगर ये ही कानून भूल गए। जबकि आम जनता को भी यह जानकारी है कि कोरोना नियंत्रण प्रावधान के कारण कोई सार्वजनिक कार्यक्रम बिना अनुमति आयोजित नहीं हो सकता।
रोहतास जिला के नासरीगंज थाना में अंचल अधिकारी श्यामसुंदर राय के प्रतिवेदन पर 12 अप्रैल को भारतीय दंड विधान की धारा 188, बिहार संक्रमण रोकथाम अधिनियम, तीव्र आवाज लाउडस्पीकर अधिनियम और प्रशासनिक अनुमति नहीं लेने से संबंधित धाराओं के तहत जिन नामजद 17 और आठ सौ से अधिक अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हुई, उनमें नोखा की विधायक पूर्व मंत्री अनिता चौधरी, काराकाट के विधायक अरुण सिंह, दिनारा के विधायक विजय कुमार मंडल, जिला परिषद अध्यक्ष नथुनी पासवान, डिहरी प्रखंड प्रमुख पूनम यादव, जिला परिषद सदस्य मनोज सिंह, बाराडीह पैक्स के अध्यक्ष हीरालाल यादव, अमियावर के मुखियापति बृजेश सिंह मंटू, वार्ड सदस्य विश्वनाथ सिंह, राजद के पूर्व जिला अध्यक्ष बुचुल सिंह, प्रधान महासचिव राजकिशोर सिंह, नकीब खां, जयराम सिंह अकेला, योगेंद्र चौधरी शामिल हैं। अंचल अधिकारी श्यामसुंदर राय के जिस प्रतिवेदन के आधार पर नासरीगंज थाना में यह कांड (संख्या 56/21, दिनांक 12.04.2021) दर्ज हुआ, उसमें बताया गया है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से कार्यक्रम की जानकारी हुई और कार्यक्रम का सत्यापन स्थानीय चौकीदार द्वारा कराया गया तो इसे सही पाया गया।
प्राथमिकी में दर्ज है कि दु-गोला चैता गायन का बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम बाराडीह के अरुण कुमार उर्फ दारा यादव द्वारा 11-12 अप्रैल की रात आयोजित हुआ। इनके (दारा यादव) के विरुद्ध भी प्राथमिक दर्ज हुई है। सवाल है कि कोविड-19 से संबंधित प्रावधान को पिछले 13 महीनों से जानने के बावजूद चैता का आयोजन क्यों किया गया और कोरोना से बेपरवाह भीड़ क्यों जुटाई गई? इसका उत्तर आसन्न पंचायत चुनाव में तलाशा जा सकता है। दरअसल वहां जुटे नेताओं में अनेक को पंचायत चुनाव लडऩा है, जिन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रभावित करने, ग्रामीण मतदाताओं के बीच पैठ बनाने के लिए आयोजन किया और सक्रिय सहयोग दिया। पंचायत चुनाव से जुड़ा एक उपक्रम विधान परिषद चुनाव का भी है। निकाय प्रतिनिधियों द्वारा विधान परिषद में निर्वाचन के जरिये पार्षद (विधायक) भेजे जाते हैं। आयोजन में शामिल रामनाथ यादव उर्फ शिवनाथ यादव या अन्य के विधान परिषद उम्मीदवार होने की संभावना है।
बहरहाल, विधायकों द्वारा कानून और प्रावधान की खुलेआम अवहेलना संकेत है कि जनप्रतिनिधि अपने को कानून से परे समझते और लोकतंत्र के तकाजा की परवाह नहीं करते हैं। यह प्रवृत्ति देशभर में देखी जा रही है कि जन प्रतिनिधि शुचिता का अनुकरणीय कदम पेश करने के लिए प्रावधानों-कानूनों के प्रति आग्रही होने के बजाय पद-ऐश्वर्य प्रदर्शन में विश्वास रखते और मानते हैं कि उनका तो आज भी राजतंत्र जैसा शासन का जन्मसिद्ध अधिकार है।

संपर्क : सोनमाटी-प्रेस गली, जोड़ा मंदिर, न्यू एरिया, डालमियानगर-821305, जिला रोहतास (बिहार) फोन 9708778136

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