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संजय कुमार को तिलकामांझी राष्ट्रीय सम्मान/ मौसमी फल-सब्जी पर वेबिनार/ जीवनप्रकाश को बधाई/ रेलवे की उपेक्षा नीति

शुभकरण चूड़ीवाली की स्मृति में दिया जाता है सम्मान

पटना (कार्यालय प्रतिनिधि)। बिहार के वरिष्ठ लेखक-पत्रकार संजय कुमार का चयन तिलकामांझी राष्ट्रीय सम्मान 2020 के लिए किया गया है। यह घोषणा तिलका मांझी राष्ट्रीय सम्मान समारोह के संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार-पत्रकार लतांत प्रसून ने की है। अंग मदद फाउंडेशन, भागलपुर की ओर से स्वाधीनता सेनानी शुभकरण चूड़ीवाला की स्मृति में यह सम्मान पत्रकारिता, साहित्य, कला, संस्कृति आदि के लिए दिया जाता है। प्रेस इनफारमेशन ब्यूरो, आकाशवाणी, दूरदर्शन में समाचार संपादक और पत्रिका सैनिक समाचार में संपादक का कार्य कर चुके संजय कुमार पटना प्रेस इनफारमेशन ब्यूरो में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। मीडिया, पर्यावरण और सामाजिक सरोकार को लेकर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में 1987 से लगातार लेखन करने वाले संजय कुमार की मीडिया, संस्कृति, स्थानीय इतिहास, पर्यावरण आदि विषयों पर 10 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। वह 1977 में भागलपुर की नाट्य संस्था दिशा से जुड़कर रंगमंच पर भी सक्रिय रहे। भागलपुर के मूलवासी और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले संजय कुमार का चयन 1993 में भारतीय सूचना सेवा में हुआ।

रिपोर्ट, तस्वीर : निशांत राज

मौसमी फल-सब्जियों से शारीरिक प्रतिरक्षा होती है मजबूत

जमुहार, डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-विशेष संवाददाता। गोपालनारायण सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित नारायण कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा पोषण एवं प्रतिरक्षा विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। उदयपुर (राजस्थान) के महाराणा प्रताप कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग की शोध छात्रा रमा मौर्या ने मुख्य वक्ता के रूप में पोषण, प्रतिरक्षण में मौसमी फलों-सब्जियों की विशेषता से अवगत कराते हुए कहा कि इनके उपयोग से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। जबकि बाजार के फास्ट फूड शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। वेबिनार के आयोजन-संचालन हार्टीकल्चर विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. संदीप मौर्या और एग्रोनोमी की सहायक प्रोफेसर डा. स्नेहा ने किया। आरंभ में वेबिनार के प्रतिभागियों को संस्थान के सचिव गोविंदनारायण सिंह ने स्वागत करते हुए शुभकामनाएं दी और अंत में प्रो. केपी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बेबीनार में नारायण कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक उदयप्रताप सिंह, प्राध्यापकों डा. मोहम्मद हाशिम, डा. प्रशांत, डा. नम्रता, डा. रवि सक्सेना, डा. प्राची, ज्ञानप्रकाश, नीरज, सौम्या आदि ने भाग लिया।

रिपोर्ट, तस्वीर : भूपेंद्रनारायण सिंह, जनसंपर्क पदाधिकारी

सोन कला केेंद्र के जीवन प्रकाश की जीत पर बधाई

(जीवन प्रकाश का स्वागत करते राजीव रंजन)

डालमियानगर (रोहतास)-कार्यालय प्रतिनिधि। शहर की सांस्कृतिक संस्था सोन कला केेंद्र के कार्यकारी अध्यक्ष जीवन प्रकाश के डालमियानगर माडल स्कूल प्रबंध समिति के लिए विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा निर्वाचन प्रक्रिया से प्रबंध समिति सदस्य निर्वाचित किए जाने पर सोन कला केेंद्र के संरक्षकों वरिष्ठ चिकित्सक डा. रागिनी सिन्हा, विधायक सत्यनारायण सिंह, डा. एसबी प्रसाद, उदय शंकर (मोहिनी समूह), राजीव रंजन कुमार (सनबीम स्कूल) और अध्यक्ष दयानिधि श्रीवास्तव सहित पदाधिकारियों-सदस्यों ने बधाई दी है। जीवन प्रकाश ने कहा कि उनकी जीत में सोन कला केेंद्र का भी व्यापक समर्थन रहा है। कहा कि अभिभावकों के धन (स्कूल फीस) से ही संचालित माडल स्कूल प्रबंध समिति को वह अभिभावकों-विद्यार्थियों के हित में बनाए रखने का पारदर्शी कार्य करेंगे।

रेलवे की उपेक्षा नीति असहनीय : बबल कश्य

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-कार्यालय प्रतिनिधि। रेलसेवा के मामले में पर्याप्त राजस्व देने वाले स्टेशन डेहरी-आन-सोन की उपेक्षा पर चैंबर्स आफ कामर्स के अध्यक्ष बबल कश्यप ने स्थानीय सांसद सिंह को ज्ञापन सौंपकर ध्यान आकृष्ट किया है। बबल कश्यप का कहना है कि रेलवे की डेहरी-आन-सोन की उपेक्षा की आदत हो गई है। किसी ट्रेन के ठहराव करने का मामला हो या अन्य यात्री सुविधाओं को बहाल करने का, रेलवे के अधिकारी डेहरी-आन-सोन को नजरअंदाज करते हैं और सुविधाएं जिला मुख्यालय सासाराम तक सीमित कर देते हैं। बबल कश्यप ने इस संबंध में डीआरएम से दूरभाष पर वार्ता कर चालू की गई दो नई ट्रेनों का ठहराव भी डेहरी-आन-सोन स्टेशन पर करने की मांग की है। बबल कश्यप ने कहा है कि डेहरी-आन-सोन को लेकर रेलवे की उदासीनता नहींटूटी तो शहर के लोग आंदोलन का रुख भी अपना सकते हैं।

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