

पटना / भागलपुर -कार्यालय प्रतिनिधि। बिहार के नालंदा ज़िले के सिलाव, नेपुरा के पारंपरिक हथकरघा बुनकर कमलेश कुमार को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा स्थापित यह पुरस्कार उनके उत्कृष्ट शिल्प कौशल और जटिल बावन बूटी साड़ी बुनाई परंपरा के गहन ज्ञान को मान्यता प्रदान करता है।
बुनकर सेवा केंद्र, भागलपुर द्वारा अनुशंसित, कुमार का चयन बिहार की समृद्ध हथकरघा विरासत, विशेष रूप से दुर्लभ और उत्कृष्ट बावन बूटी बुनाई को उजागर करता है, जो राज्य के बाहर काफी हद तक अज्ञात है। एक कुशल कारीगर कमलेश कुमार ने इस अनूठी वस्त्र कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है।
बिहार के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में श्री कुमार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 11वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के दौरान आगामी 7 अगस्त को भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उन्हें मिलने वाला यह सम्मान हथकरघा बुनकर समुदाय और बिहार के लोगों के लिए गौरव का एक महत्वपूर्ण क्षण होगा ।
यह पुरस्कार न केवल श्री कुमार के असाधारण कौशल का सम्मान है, बल्कि बिहार की पारंपरिक हथकरघा विरासत की ओर राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करता है तथा स्वदेशी शिल्प के संरक्षण और विकास को प्रोत्साहित करता है। बातचीत में कमलेश कुमार ने बताया कि यह कल उन्हें विरासत में मिली है तथा लंबे समय से वह इससे जुड़े हुए हैं । राजगीर के शांति स्तूप को तसर साड़ी मे उकेरने के कार्य के लिए यह पुरस्कार दिया जा रहा है । वह निफ़्ट पटना सहित अनेक संस्थानों में बावन बूटी कला के प्रशिक्षण कार्य से भी जुड़े हुए हैं ।
बुनकर सेवा केंद्र, भागलपुर के उपनिदेशक राजेश चटर्जी ने बताया कि पहली बार बिहार के किसी बुनकर को इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है । इसके माध्यम से बुनकर समाज की काला को प्रोत्साहन दिया जा रहा है तथा उन्हें एक नयी पहचान भी मिल रही है ।
बुनकर सेवा केंद्र, भागलपुर के तकनीकी पर्यवेक्षक प्रभात कुमार सिंह द्वारा हथकरघा को बढ़ावा देने के उपायों के बारे में बताया गया ।
बुनकर सेवा केंद्र, भागलपुर के वस्त्र डिजाइनर अनिरुद्ध रंजन ने बावन बूटी बुनाई के तकनीकी पक्षों के बारे मे जानकारी हुए इसे एक उत्कृष्ट कला बताया ।
राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित कमलेश कुमार ने इस उपलब्धि के लिए भारत सरकार तथा बुनकर सेवा केंद्र, भागलपुर को विशेष धन्यवाद दिया है ।
( रिपोर्ट,तस्वीर : पीआईबी (पटना), इनपुट : निशांत राज )