

अरुण दिव्यांश की कविता : सावन है मुस्कान धरा का
सावन है मुस्कान धरा का
सावन है मुस्कान धरा का, सावन है व्याख्यान धरा का। सावन धरा पल्लवित करता, यह सावन है प्राण धरा का ।।
सावन यह संदेश हरा का, फसलें पौधे वृक्ष हरा सा। वर्ष का सबसे सुहाना मौसम, पुण्यित पावन माह बड़ा सा ।।
सावन माह भोले को भाता, काॅंवरिया कंधे काॅंवर उठाता । गागर में वह सागर समाता, सप्रेम बाबा को जल चढ़ाता ।।
सावन खूब हरा भरा सुहाए, माॅं बहनें कजरी बहुत गाए। सावन मनभावन हुआ पावन, माॅं बहनें इसे चार चाॅंद लगाए।।
सावन माह जन जन भाए, जन जन के उर ठंढक लाए। सावन माह बना मनभावन, नर हरि हर को भी मन भाए।।
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