लाइफ स्टाइल : बदले पारंपरिक पूजा पंडाल, नए ट्रेंड ने जगह बनाई

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-कार्यालय/वरिष्ठ संवाददाता। सदियों तक बंगाल का हिस्सा बने रहने के कारण बिहार के डेहरी-आन-सोन में भी मूर्ति-पूजा लोकजीवन के धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव-संचार का उपक्रम रहा है। किसी दस्तावेज या स्मृति की उपलब्धता के अभाव में आज यह कहना कठिन है कि प्राचीन काल में उत्तर भारत से दक्षिण भारत की यात्रा में सोन नद पार करने के देहरीघाट वाले, मध्यकाल तक देश के प्राचीनतम मार्गोंं उत्तरापथ-दक्षिणापथ के संयोजक नदी-गर्भसेतु वाले, आधुनिक भारत में यात्री-माल यातायात के लिए सोननहर प्रणाली वाले या फिर 20वींसदी के एशिया प्रसिद्ध डालमियानगर कारखाना वाले डेहरी-आन-सोन में कच्ची मिट्टी की हस्तशिल्प कला वाली मूर्ति-पूजा की शुरुआत कब हुई? मगर यह कहा जा सकता है कि इस तरह की सामूहिक मूर्ति-पूजा का आरंभ बंगाली क्लब (डालमियानगर) से ही हुआ होगा और यहां सबसे पहले कच्ची मिट्टी की सरस्वती प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा हुई होगी, जिसमें दुर्गा प्रतिमा प्रतिष्ठापन-पूजोत्सव भी जुड़ गया होगा। बंगाली क्लब में प्रतिमा रखने की परंपरा देश की आजादी से पहले शुरू हुई थी।

इतना तय है कि दुर्गापूजा की परंपरा कोलकाता से ही डालमियानगर में ग्रहण की गई और सबसे पहले मूर्ति स्थापना के साथ दुर्गापूजा का आयोजन कोलकाता (बंगाल) से जुड़े बांग्ला भाषियों द्वारा आरंभ हुआ। शहर में दुर्गापूजा करने वाली सबसे पुरानी संस्था का अस्तित्व अब बंगाली क्लब (1938 से सक्रिय) के रूप में मौजूद है, जिसके मौजूदा पदेन अध्यक्ष एआर वर्मा, कोषाध्यक्ष गौतम दास हैं। मूर्ति स्थापना के साथ सरस्वती पूजा बेशक स्थानीय लोगों ने शुरू की होगी। मिट्टी की मूर्ति गढऩे वाले कुम्हर टोली (डेहरी-आन-सोन) के कुम्भ-कला के कारीगर शहर के पुराने बासिंदों में से रहे हैं।

अपने समय में अपना ऐश्वर्य था डालमियानगर बंगाली क्लब की झांकी का
दुर्गापूजा के अवसर पर अपने समय में बंगाली क्लब की झांकी का अपना ऐश्वर्य था, जिसमें रोहतास इंडस्ट्रीज के संचालकों-प्रबंधकों का भी बड़ा योगदान होता था। बाद में डालमियानगर कारखाना परिसर से अलग डेहरी-आन-सोन के बाबूगंज में शहर के तब के सदर चौक के पास यंत्रचालित दुर्गा-मूर्ति झांकी की शुरुआत हुई। फिर तो दुर्गा प्रतिमाओं का सिलसिला अनेक जगहों पर शुरू हो गया। नागपंचमी के अवसर पर डालमियानगर कारखाना देखने के लिए उमडऩे वाली दूर-दराज तक के ग्रामीण आबादी की भीड़ दुर्गापूजा के अवसर पर शहर में उमडऩे लगी। नागपंचमी के अवसर पर सबके अवलोकन के लिए डालमियानगर के कारखाने पूरी तरह खुले रहते थे। दरअसल, ग्रामीण आबादी सदियों से मकरसंक्रांति के अवसर पर एनिकट, पड़ाव मैदान और बालगोविंन्दा बिगहा (जहां पहले खुली जमीन थी) में लगने वाले मेले में आती थी, जो धीरे-धीरे खत्म हो गए तो उसे डालमियानगर कारखाना देखने का उत्सवी माहौल मिला था। मगर आठवें दशक में डालमियानगर कारखानों में भी प्रवेश-निषेध कर दिया गया।

संतपाल में रावण-दहन, नारायण मेडिकल में डांडिया धमाल भी
सासाराम में दुर्गापूजा अवकाश के पहले संत पॉल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में रामकथा का आगाज रावण-दहन और महिषासुर मर्दिनी की जीवंत झांकी के साथ विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने किया। विद्यालय के अध्यक्ष एसपी वर्मा, सचिव वीणा वर्मा प्राचार्या आराधना वर्मा ने भगवती द्वारा महिषासुर का वध और रावण वध की कथा का औचित्य बताते हुए कहा कि हमें भीतर के अहंकार का त्याग करना होगा, तभी दुर्गापूजा की सार्थकता है। इसके बाद नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल में लाइट इफेक्ट से पूर्ण डांडिया कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें गीत गायन, नृत्य प्रस्तुति और हास्य-व्यंग्य अभिनय से धमाल मचाया गया। नारायण किड्ज वल्र्ड स्कूल में तो प्रसाशक मोनिका नारायण के निर्देशन-संयोजन में पहली बार नन्हें बच्चों ने सामूहिक डांडिया नृत्य किया।

मालगोदाम मोड़ पर साम्प्रदायिक सौहाद्र्र की मिसाल बरकरार
डेहरी-आन-सोन में पिछले 23 सालों से हिन्दू-मुस्लिम प्रतिभागियों के जरिये संप्रदायिक सौहार्द का सफल मिसाल कायम करने वाले स्टेशन रोड (मालगोदाम मोड़) स्थित युवा किंग कला मंच का 24वां वर्षगांठ की दुर्गापूजा पर जामताड़ा और स्थानीय कामगारों ने पश्चिम बंगाल के कारीगर महताब शहबाज, अशरफ व सलीम और डेहरी-आन-सोन पानीटंकी के मूर्ति कलाकार अवधेश कुमार के नेतृत्व में महाराष्ट्र के त्रंबकेश्वर मंदिर की प्रतिकृति और दुर्गा प्रतिमा कानिर्माण किया है, जिसमें रोशनी, फूल सजावट आदि का संयोजन अजंता आर्ट, बिनु लाइट व सोनू कुमार ने किया है। ‘

इन सबके कला-श्रम से पंडाल के अंदर झील में तैरती नाव पर सवार दुर्गा प्रतिमा को साकार करने का प्रयास किया गया है। पूजा का आयोजन पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह की अध्यक्षता में अनुज गुप्ता, संदीप गुप्ता (उपाध्यक्ष), बबली सिंह बिश्नोई (महासचिव), पत्रकार वारिस अली (सचिव), संजय अग्रवाल (कोषाध्यक्ष), विनय कुमार सिंह (उप कोषाध्यक्ष), प्रमोद कुमार गुप्ता (संगठन सचिव), अधिवक्ता बैरिस्टर सिंह (कानूनी सलाहकार), सुरेंद्र चौधरी (सूचना सचिव) और सभी सदस्यों ने किया है।

 

पाली में अमृतसर का स्वर्णमंदिर, बाबानगरी में मनोकामना देवी की झांकियां
डेहरी-आन-सोन में दुर्गापूजा आयोजन के पुराने स्थानों में एक पाली का काली कला मंदिर भी है, जिसने इस बार अपने पूजा पंडाल में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की झांकी प्रस्तुत की है। इसे पश्चिम बंगाल के कारीगरों ने तैयार किया है। न्यू एरिया के सीमांत पर जीटी रोड के नीचे स्थित बाबानगरी में बोकारो (झारखंड) की मनोकामना देवी मंदिर की प्रतिकृति प्रस्तुत की गई है। जबकि शहर के नए पूजा-स्थलों में से एक तारबंगला के दुर्गाचौक स्थित नवयुवक संघ के परसिर में कोलकाता के पार्कस्ट्रीट मंदिर की झांकी प्रस्तुत की गई है। दुर्गापूजा के माहौल के दौरान पूजा-पूर्व डेहरी-आन-सोन के पाली रोड, थाना चौक, डिहरी बाजार, ओल्ड जीटी रोड से इंडियाविजन-2020 की झांकी गुजरी। इंडियाविजन झांकी भूतपूर्व राष्ट्रपति एवं अंतरिक्ष वैज्ञानिक डा. एपीजे अब्दुल कलाम की संकल्पना पर आधारित थी, जिस पर डा. कलाम की पुस्तक भी 21वींसदी के आरंभ में प्रकाशित हुई थी।

(रिपोर्ट, तस्वीर : भूपेन्द्रनारायण सिंह, वारिस अली, निशांत राज, अवधेशकुमार सिंह, अर्जुन कुमार, संपादन : कृष्ण किसलय)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.