शराब की होम डिलीवरी में कोडवर्ड! 500 वाली बोतल 1500 में, खेप पहुंचाने के लिए जंगली-पहाड़ी रास्ते का इस्तेमाल

औरंगाबाद (बिहार)। राज्य में प्रतिबंध के बावजूद विदेशी शराब की खेप दूसरे राज्यों झारखंड व उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से आ रही है। राज्य की सीमा पार से विदेशी शराब की अवैध होम डिलीवरी के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस की नजरों से बचने के लिए धंधेबाज रोज कोडवर्ड बदल रहे हैं। यह काला धंधा पहले राधेश्याम जैसे छद्म नाम का इस्तेमाल कर हो रहा था। इसके बाद डिजिटल वाटर कोडवर्ड का प्रयोग शुरू किया गया। झारखंड के सीमावर्ती इलाके से लगे कौआकोल में इस कोडवर्ड का प्रयोग होता रहा है। आर्डर मिलने के बाद शौकीनों को शराब इसी कोडवर्ड पर उपलब्ध कराई जाती रही है।

शराबबंदी को अंगूठा
रजौली, कौआकोल व गोविन्दपुर थाने की सीमा झारखंड की सीमा से जुड़ी है। सीमा के कुछ दूर अन्दर जाने पर लोगों को आसानी से झारखंड निर्मित देसी शराब उपलब्ध हो जाती है। लोग चोरी-छुपे शराब लेकर जिले में प्रवेश कर जाते हैं। शराब की डिलीवरी एस्कार्ट कर की जा रही है। शराब के धंधेबाज सीमा पार से शराब की खेप जिले में लाने के लिए रोज नये-नये तरीके अपना रहे हैं और राज्य में शराबबंदी को अंगूठा दिखा रहे हैं। इस काले धंधे में बड़ी संख्या में जिले के युवा शामिल हंै।
पुलिस द्वारा कई तरीकों पर पानी फेर दिये जाने के बाद अब धंधेबाज एस्कार्ट कर शराब के वाहनों को जिले में ला रहे हैं। आगे चल रहा वाहन शराब वाले वाहन के ड्राइवर को रास्ता क्लीयर होने का सिग्नल देता है। आगे वाले वाहन के सिग्नल के बाद ही शराब वाली गाड़ी आगे बढ़ती है। दोनों वाहनों के बीच एक-दो किलोमीटर का फासला होता है। खतरा होने पर शराब के वाहन को रोक दिया जाता है।
जेल जाने के बाद भी धंधे में
धंधेबाजों के मुताबिक शराब के इस अवैध धंधे में ढाई-तीन गुना कमाई है। चार सौ से 5 सौ रुपये की रेट वाली शराब की कीमत यहां 12 से 15 सौ रुपये तक वसूल की जा रही है। ज्यादा कमाई की लालच व शराब की मांग के कारण ही जेल जाने के बावजूद वहां से छूटकर आने के बाद धंधेबाज फिर इस धंधे में जुट जाते हैं।
जंगली रास्ते का इस्तेमाल
धंधेबाज जिले में बिहार राज्य की सीमा पार से शराब लाने में सीमा से लगे जंगली व पहाड़ी रास्तों का इस्तेमाल पुलिस से बचने के लिए कर रहे हैं। कौआकोल, रोह, रूपौ, गोविन्दपुर व रजौली के जंगली रास्तों का शराब की अवैध ढुलाई के लिए उपयोग किया जा रहा है। धंधेबाज अक्सर रात के समय शराब को लाने का काम कर रहे हैं, क्योंकि देर रात में पुलिस द्वारा पकड़े जाने का खतरा दिन की अपेक्षा कम होता है।
वेब रिपोर्टिंग : मिथिलेश दीपक

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