
नारायण स्कूल ऑफ लॉ और पुनर्वास विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को मिली शैक्षणिक व व्यावसायिक दिशा
डेहरी -आन-सोन (रोहतास)। गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय (जीएनएसयू) में नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग संकायों में दीक्षारंभ, इंडक्शन-सह-ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए गए। नारायण स्कूल ऑफ लॉ में विधि के विद्यार्थियों के लिए एक सप्ताह के इंडक्शन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, वहीं पुनर्वास विज्ञान संकाय में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम, शैक्षणिक व्यवस्था, व्यावहारिक प्रशिक्षण और क्षेत्र की व्यावसायिक संभावनाओं से परिचित कराया गया।
नारायण स्कूल ऑफ लॉ के दीक्षारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सासाराम व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजेंद्र कुमार राय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विधि शास्त्र का केवल प्रमाण पत्र प्राप्त करना बड़ी उपलब्धि नहीं है, बल्कि उसमें निहित ज्ञान को आत्मसात करना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी एक अच्छे अधिवक्ता बनना चाहते हैं या एक अच्छे विधिज्ञ, यह उनके अपने प्रयास और लक्ष्य पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने ज्ञानार्जन के लिए एक अच्छे संस्थान का चयन किया है, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था है। अब आवश्यकता है कि वे कड़ी मेहनत करें और देश के नामी-गिरामी अधिवक्ताओं की तरह अपनी प्रतिभा से अपना और संस्थान का नाम रोशन करें।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) जगदीश सिंह ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय उनके पठन-पाठन और शैक्षणिक विकास में हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने कार्यक्रम में बहुमूल्य समय निकालकर शामिल होने के लिए न्यायाधीश विजेंद्र कुमार राय का अभिनंदन भी किया।
कार्यक्रम को वरिष्ठ शिक्षिका डॉ. संगीता कुमारी और नारायण स्कूल ऑफ लॉ के डीन डॉ. विनोद कुमार सरोज ने भी संबोधित किया। संस्थान के निदेशक डॉ. विजय नंद बेहरा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए एक सप्ताह तक चलने वाले इंडक्शन कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य से विद्यार्थियों को अवगत कराया। अंत में संकाय के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. लोकेश चंद्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर संकाय के शिक्षकगण और शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहे।
पुनर्वास विज्ञान के विद्यार्थियों को मिली करियर की दिशा

इसी क्रम में विश्वविद्यालय के पुनर्वास विज्ञान संकाय में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत और उन्हें पाठ्यक्रम, शैक्षणिक व्यवस्था तथा पुनर्वास विज्ञान के व्यापक क्षेत्र से परिचित कराने के उद्देश्य से इंडक्शन-सह-ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) कुमार आलोक प्रताप मुख्य अतिथि और परीक्षा नियंत्रक सह अकादमिक डायरेक्टर सुदीप कुमार सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कुलसचिव प्रो. (डॉ.) कुमार आलोक प्रताप ने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ मानवीय संवेदनाओं, अनुशासन और व्यावसायिक नैतिकता को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पुनर्वास विज्ञान केवल एक अकादमिक विषय नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक अथवा विकासात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों को बेहतर और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता विकसित करने पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि सुदीप कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और परीक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए कहा कि नियमित उपस्थिति, अनुशासन, समय प्रबंधन और निरंतर अध्ययन उच्च शिक्षा में सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम से ऑनलाइन माध्यम से देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों एवं पेशेवर संगठनों के विशेषज्ञ भी जुड़े। ऑल इंडिया ऑक्यूपेशनल थेरेपी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पंकज बाजपेयी ने ऑक्यूपेशनल थेरेपी के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं और समाज में इसकी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को विषय की बुनियादी समझ मजबूत करने तथा नई तकनीकों और शोध से निरंतर जुड़े रहने की सलाह दी।
भारतीय पुनर्वास परिषद के सदस्य एवं नेहरू ग्राम भारती डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी, प्रयागराज के कुलसचिव सह विशेष शिक्षा विभाग के निदेशक श्याम सुंदर मिश्रा ने विशेष शिक्षा और पुनर्वास के संबंधों पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को दिव्यांगजनों के समावेशी विकास के लिए कार्य करने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के पेशेवरों के लिए तकनीकी दक्षता के साथ संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण भी अत्यंत आवश्यक है।
राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग में ऑक्यूपेशनल थेरेपी प्रोफेशनल काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अखिलेश कुमार शुक्ला ने अपने वीडियो संदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोध, नवाचार और साक्ष्य-आधारित अभ्यास के महत्व पर बल दिया।
पुनर्वास विज्ञान संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) अवनीश रंजन ने स्वागत संबोधन में विद्यार्थियों को संकाय की शैक्षणिक गतिविधियों, पाठ्यक्रम, प्रयोगशाला, व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुशासन, शोध तथा रोजगार एवं उच्च शिक्षा की संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण से परिचित कराने के साथ पुनर्वास विज्ञान की सामाजिक उपयोगिता और पेशेवर जिम्मेदारियों का बोध कराना है।
मुख्य वक्ताओं में प्रबंधन संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) रजनीश रत्न, नारायण इंस्टीट्यूट ऑफ अलाइड एंड हेल्थकेयर साइंसेज के निदेशक प्रो. (डॉ.) नीरज कुमार तथा विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी भूपेन्द्र नारायण सिंह ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के जरूरतमंद वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में राम मोहन दुबे ने अतिथियों, ऑनलाइन जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में ऑक्यूपेशनल थेरेपी विभाग की प्रभारी डॉ. प्रियंवदा, संकाय के शिक्षकगण, वरिष्ठ छात्र-छात्राएं और शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहे। मंच का संचालन द्वितीय वर्ष की छात्राओं सायमा और कनिष्का ने किया।
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