
फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर इस वर्ष होलिका दहन 02 मार्च 2026, सोमवार की मध्यरात्रि 11:53 बजे से 12:50 बजे के बीच किया जाएगा। वसन्तोत्सव होली 04 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। यह जानकारी आचार्य पं० लालमोहन शास्त्री ने दी।
बताया गया कि 02 मार्च को सायं 05:18 बजे से पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो रही है। इसी संध्या काल में श्री सत्यनारायण व्रत कथा का आयोजन होगा। पूर्णिमा के साथ भद्रा भी सायं 05:18 बजे से प्रारंभ होकर रात्रि 04:56 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार भद्रा के मुख का त्याग कर भद्रा के पुच्छ काल में ही होलिका दहन करना चाहिए। इसलिए रात्रि 11:53 से 12:50 बजे के मध्य का समय शुभ माना गया है।
शास्त्रीय प्रमाण देते हुए आचार्य ने बताया—“प्रदोष व्यापिनी ग्राह्या पौर्णिमा फाल्गुनी सदा।तस्यां भद्रा मुखं त्यक्त्वा पूज्या होला निशामुखे॥” अर्थात प्रदोषकालीन फाल्गुनी पूर्णिमा ग्राह्य है तथा भद्रा के मुख को त्यागकर रात्रि में होलिका दहन करना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि 03 मार्च मंगलवार को पूर्णिमा सायं 04:33 बजे तक रहेगी तथा इसी दिन चन्द्रग्रहण का दृश्य योग बन रहा है। सूतक काल 9 घंटे पूर्व से प्रभावी रहेगा, जिसके कारण 03 मार्च को प्रातः 09 बजे से मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने तथा खाद्य पदार्थों में पवित्र कुश रखने की सलाह दी गई है।
आचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार यदि होलिका दहन रात्रि 12 बजे के बाद किया जाता है, तो होली एक दिन छोड़कर मनाई जाती है। इसी कारण इस वर्ष 04 मार्च 2026, बुधवार को सर्वत्र वसन्तोत्सव होली हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी।
- प्रस्तुति : आचार्य पं० लालमोहन शास्त्री





