
पटना। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती को टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की ओर से किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में 27 अक्टूबर 2026 को पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड के सिल्हौरी गांव में ‘खेत बचाओ अभियान 2’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में 46 महिला किसानों सहित 100 से अधिक किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरकों के उपयोग और संतुलित खाद प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने खेती में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ उत्पादन लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के उपाय भी बताए।
डॉ. रचना दुबे ने प्राकृतिक खेती, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, ढैंचा से हरी खाद तैयार करने और फसल चक्र में दलहनी फसलों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाने से उसकी उर्वरता और जलधारण क्षमता में सुधार होता है। इससे मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता भी बढ़ती है। उन्होंने कृषि गतिविधियों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के उपायों की भी जानकारी दी।
डॉ. सौरभ कुमार ने जैव उर्वरकों के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इनमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नाइट्रोजन स्थिरीकरण और फॉस्फोरस की उपलब्धता बढ़ाकर पौधों के पोषण में सहायक होते हैं। उन्होंने किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी। साथ ही खेती की लागत कम करने और मिट्टी की सेहत बेहतर रखने के लिए जैव उर्वरकों को अपनाने पर बल दिया।
किसानों ने विशेषज्ञों से साझा की समस्याएं
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती, फसल रोग प्रबंधन, सिंचाई और कृषि उत्पादन से जुड़ी अपनी समस्याओं पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की। विशेषज्ञों ने किसानों को मिट्टी की सेहत बनाए रखने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों में मृदा संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ऐसी कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना रहा, जिनसे भूमि की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहे और खेती अधिक टिकाऊ बन सके।





