“विश्व शराब-मुक्त दिवस” हर साल 2 अक्टूबर, महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को शराब के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और शराब के सेवन से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है।आज हमारे देश में नशे के प्रति लोगों का बढ़ता आकर्षण एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। शराब की इसी गंभीर समस्या पर प्रस्तुत है डॉ. प्रितम भि. गेडाम का विशेष आलेख—“शराब की गिरफ्त में दम तोड़ती जिंदगियां और उजड़ते परिवार”

शराबी का नाम आते ही हमारे जेहन में सबसे पहले जो छवि उभरती है, वह एक दुर्गुणों से भरे, गंदे व्यक्ति की होती है, जो नशे की हालत में अपना होश खो चुका है और जीवन को तबाह करने पर तुला हुआ है। उसे कोई सम्मान नहीं देना चाहता। हर कोई शराबियों से दूर रहना चाहता है। परिवार के लोग भी अपने शराबी सदस्य को नफरत की नजर से देखते हैं। खुद शराबी भी कभी अपने बच्चे को शराबी बनते हुए देखना पसंद नहीं करता। शराब के नशे में आज बाप बेटे की जान लेता है, तो बेटा मां-बाप की जान लेता है। ऐसी खबरें हम अक्सर पढ़ते हैं। शराब इतनी बुरी चीज है। शराब एक साइकोएक्टिव और जहरीला पदार्थ है और इसकी लत लग सकती है। यह जहर धीरे-धीरे मस्तिष्क को कमजोर बनाता है। बाद में शराबी अपने मस्तिष्क पर से नियंत्रण खो देता है। इसके बाद मनुष्य खुद के काबू में नहीं रहता और अनुचित कार्य भी करने लगता है, क्योंकि नशे के कारण शराबी अच्छे-बुरे के बीच अंतर करने की क्षमता खो चुका होता है।
आज के आधुनिक युग में नशा तो जैसे फैशन हो गया है, ऐसा महसूस होता है। लोगों का नशे के प्रति बढ़ता आकर्षण इस बात का संकेत देता है कि भारत का शराब बाजार 2030 के दशक तक दोगुना होने की राह पर है। किशोरवयीन छात्र-छात्राएं भी पार्टी के नाम पर शराब पीते हैं। बीच सड़क पर नशे में धुत होकर तमाशा करते हुए उन्हें हम सोशल मीडिया के माध्यम से देखते रहते हैं। नए साल, होली या बर्थडे पार्टी के नाम पर होने वाली युवाओं की नशे की पार्टियों के वीडियो खूब वायरल होते हैं। न कपड़ों की सुध होती है, न संस्कारों की, केवल मदहोशी की मस्ती छाई होती है। कम उम्र में शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य तथा व्यवहार के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
देश में तेजी से अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है। आज अपराधों में कम उम्र के युवा ज्यादा नजर आते हैं। बलात्कार, हत्या, डकैती जैसे गंभीर अपराधों में भी नाबालिगों की संख्या काफी है। नशे से अपराध बढ़ सकते हैं। नशे की स्थिति में व्यक्ति की निर्णय लेने और आत्मनियंत्रण की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कई हिंसक घटनाओं और अपराधों में नशे की भूमिका सामने आती है, हालांकि अपराध के पीछे सामाजिक, आर्थिक और अन्य कई कारण भी होते हैं। हमारे समाज में शराब बेहद आसानी से मिलने वाला नशा है, जिस तक किसी की भी सहज पहुंच होती है। पिछड़े इलाकों, कम शिक्षित वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में देशी शराब बनाने की अवैध भट्टियों की खबरें भी अक्सर देखने को मिलती हैं। नकली जहरीली शराब का बाजार भी लगातार फल-फूल रहा है, जबकि बड़ी संख्या में नकली जहरीली शराब पीने से मौत की घटनाएं लगातार होती रहती हैं। शराब की अवैध तस्करी का जाल भी तेजी से फैल रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में वर्ष 2019 में शराब पीने की वजह से लगभग 26 लाख लोगों की मौत हुई। अनुमान के मुताबिक, 40 करोड़ लोग शराब से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे। इनमें से 20.9 करोड़ लोग शराब पर निर्भर थे। वर्ष 2019 में शराब के सेवन से दिल की बीमारियों के कारण अनुमानित 4,74,000 लोगों की मौत हुई। शराब पीने से कई तरह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें ब्रेस्ट, लिवर, सिर और गर्दन, एसोफेजियल और कोलोरेक्टल कैंसर शामिल हैं। वर्ष 2019 में दुनिया भर में पाए गए कैंसर के मामलों में से 4.4 फीसदी मामले शराब पीने की वजह से हुए और कैंसर से हुई 4,01,000 मौतें शराब के सेवन से संबंधित थीं। शराब से जुड़ी बीमारियों का एक बड़ा हिस्सा सड़क दुर्घटनाओं से भी संबंधित है। शराब पीकर वाहन चलाने पर दुर्घटना होने की प्रबल संभावना रहती है। इनमें मौतें तो होती ही हैं, लेकिन दुर्घटनाओं में अनेकों लोगों को जीवनभर के लिए दिव्यांगता का सामना भी करना पड़ता है। वर्ष 2019 में शराब से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं में कुल 2,98,000 मौतें हुईं, जिनमें से 1,56,000 मौतें किसी अन्य व्यक्ति द्वारा शराब पीने की वजह से हुईं। अकेले अमेरिका में हर साल शराब से जुड़ी वजहों से लगभग 88,000 लोगों की मौत होती है, जिसे रोका जा सकता है।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 2018 में कराए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, देश में लगभग 16 करोड़ व्यक्ति शराब का सेवन करते थे। इनमें से 5.7 करोड़ से अधिक व्यक्ति हानिकारक या निर्भरता वाले शराब सेवन से प्रभावित थे और उन्हें शराब के सेवन से जुड़ी समस्याओं के लिए मदद की जरूरत थी। वर्ष 2016 में पूरे भारत में शराब पीने की वजह से लिवर सिरोसिस से लगभग 1,40,600 लोगों की मौत हुई। शराब का अत्यधिक और लंबे समय तक सेवन फैटी लिवर सहित यकृत से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। शुरुआती अवस्था में शराब छोड़ने से फैटी लिवर में सुधार संभव है।
भारत में शराब पर ज्यादा टैक्स, आबकारी शुल्क, लाइसेंस फीस और दूसरे कर लगाए जाते हैं, जिनसे देश भर की राज्य सरकारों को बहुत ज्यादा राजस्व मिलता है। शराब से जुड़े करों से होने वाला कुल सालाना राजस्व 2025-26 में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान रहा। लेकिन शराब से होने वाला देश का नुकसान इससे कई गुना ज्यादा बड़ा है। शोध के अनुसार, भारत में शराब पीने से होने वाली मौतों के कारण 2011 से 2050 के बीच कम से कम 25.8 करोड़ जीवन-वर्षों का नुकसान होगा और शराब की बिक्री से मिलने वाले टैक्स को घटाने के बाद भी शराब से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण 2050 तक भारतीय समाज पर 97,895 अरब रुपये का कुल आर्थिक बोझ पड़ेगा, जो जीडीपी के 1.45 फीसदी औसत नुकसान के बराबर है। अध्ययन में पाया गया कि शराब से जुड़ी बीमारियों के इलाज का स्वास्थ्य व्यवस्था पर अनुमानित आर्थिक बोझ 3,127 अरब रुपये होगा। शराब का सामाजिक बोझ, जिसमें स्वास्थ्य व्यवस्था का खर्च, अपनी जेब से किया गया खर्च और उत्पादकता का नुकसान शामिल है, 1,21,364 अरब रुपये आंका गया।
परिवार के मुखिया पर घर की जिम्मेदारी, बच्चों की शिक्षा, भरण-पोषण, अभिभावकों की सेवा और उनकी हर तरह की आवश्यकताओं को पूरा करने का दायित्व होता है। अगर वही मुखिया शराब के नशे में डूबने लगे, तो वह खुद के साथ-साथ परिवार, समाज और देश के लिए भी परेशानी का सबब बन जाता है। एक बार किसी को नशे की लत लग जाए, तो नशेड़ी अपनी लत पूरी करने के लिए उचित-अनुचित सभी तरह के काम करने लगता है। इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य खराब होता है तथा पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। समाज में समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं और विकास में रुकावटें पैदा होती हैं।
स्वस्थ और खुशहाल जिंदगी पाने के लिए सभी को नशे को ‘ना’ कहना चाहिए और अपनी मानसिक एवं शारीरिक सेहत को मजबूत बनाना चाहिए। अगर देश नशामुक्त होता है, तो अपराध जगत का आधारस्तंभ ही खत्म हो जाएगा, क्योंकि नशा और अपराध एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बीमारियां, अपराध, दुर्घटनाएं और वाद-विवाद बेहद कम हो जाएंगे। लोगों में डर का माहौल खत्म होगा, समाज में समरसता आएगी और संस्कारशील समाज का निर्माण होगा। जीवन में खुशियां बढ़ेंगी और देश के विकास को गति मिलेगी।
जीवन अनमोल है। नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत नशामुक्ति के लिए 14446 पर संपर्क करें। नशा छोड़ें, सुखी जीवन से नाता जोड़ें।
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