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कोविड-19 सुरक्षा कार्यशाला 2 को/ देश को युवा उद्यमिता की दरकार/ संस्कृति पर संगोष्ठी/ अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह

प्रखंडों में दौरा कर स्कूलों को दिए दिशा-निर्देश

सासाराम (रोहतास)-कार्यालय प्रतिनिधि। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के रोहतास जिला अध्यक्ष रोहित वर्मा ने रोहतास जिला इकाई के उपाध्यक्ष सुभाष कुमार कुशवाहा, महामंत्री अनिल कुमार और सचिव समरेंद्र कुमार के साथ अकोढ़ीगोला, नासरीगंज और काराकाट का दौरा कर एसोसिएशन की प्रखंड इकाइयों की कार्यकारिणी के साथ बैठक की। रोहित वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठकों में 04 जनवरी से विद्यालयों को खोले जाने से संबंधित सरकार के निर्णय और दिशा-निर्देश के बारे में बताया गया। यह बताया कि कोरोना महामारी के दौर में विद्यालय संचालन के पारंपरिक पद्धति में बदलाव किया जाना जरूरी है। बैठक में निजी विद्यालयों के हित के लिए अग्रणी संघर्ष करने वाले प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमाएल अहमद के बारे में जानकारी दी गई कि उनका रोहतास दौरा 02 जनवरी को होगा, जो सासाराम में विद्यालय खुलने से संबंधित कार्यशाला में आवश्यक जानकारी देंगे और कोविड-19 से बचाव की व्यावहारिक सुरक्षा तकनीक के बारे बताएंगे। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन की अकोढ़ीगोला, नासरीगंज और काराकाट प्रखंड इकाइयों के विस्तार की घोषणा संबंधित बैठकों में की गई।

युवा वर्ग ही उद्यमिता का आधार : प्रो. सेन

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-विशेष संवाददाता। एक्सएलआरआई, जमशेदपुर के प्रो. प्रबल कुमार सेन ने कहा कि देश में युवा वर्ग ही भावी उद्यमिता का आधार है। उद्यमिता में पिछड़ जाने या विफल रह जाने के डर से इस दिशा में युवा आने का साहस नहींकरते हैं। जबकि डिजिटल युग में उद्यमिता के क्षेत्र में प्रवेश से डरने की जरूरत नहींहै। वह अग्रणी उद्यमिता विशेषज्ञ के रूप में जमुहार स्थित जीएनएसयू के नारायण एकेडमी आफ एक्सीलेंस के एमबीए, बीएमएस, बीसीए, बीकाम आनर्स के प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम को आनलाइन संबोधित कर रहे थे। जीएनएसयू के कुलपति डा. एमएल वर्मा, सचिव गोविंदनारायण सिंह, कुलसचिव डा. राधेश्याम जायसवाल और परीक्षा नियंत्रक प्रो. कुमार आलोक प्रताप और करीब दौ सौ विद्यार्थी से जुड़े इस आनलाइन कार्यक्रम के आरंभ में प्रबंध शिक्षा संकाय के डीन प्रो. आलोक कुमार ने विशेषज्ञ वक्ता का परिचय दिया।

मातृभाषा में मां के दूध जैसी ताकत : अमीरचंद

पटना (सोनमाटी समाचार नेटवर्क)। भारत, भारतीयता और भारतीय जनमानस को मजबूती प्रदान करने में हिंदी का महत्वपूर्ण योगदान है। मातृभाषा से समाज-समुदाय को वही ताकत मिलती है, जो एक बच्चे को मां के दूध से प्राप्त होती है। यह विचार संस्कार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री अमीरचंद ने जगदंबी प्रसाद यादव स्मृति संस्थान, अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद और अखिल भारतीय नागरी लिपि परिषद के संयुक्त तत्वावधान में राजभाषा, नागरी लिपि एवं भारतीय संस्कृति पर पटना में केेंद्रित राष्ट्रीय वेबिनार संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर व्यक्त किया। अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् और विदेश मंत्रालय की पत्रिका गगनांचल के संपादक डा. आशीष कंधवे ने कहा कि हिंदी प्रदेश के लोग हिंदी के साथ खड़े रहें तो हिंदी के रथ का बढ़ता पहिया कोई रोक नहीं सकता। भाषा भी समाज और समुदाय की संपत्ति होती है। चार दर्जन देशों की अपनी यात्रा का अनुभव साझा करते हुए बताया कि हिंदी भाषा को लेकर बहुत परेशानी का सामना नहींकरना पड़ा। बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जगदंबी बाबू ने हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अग्रणी कार्य किया था। अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि आज हिन्दी को प्यार की नहीं, व्यापक ज्ञान की भाषा, विज्ञान की भाषा, और न्याय-न्यायालय के व्यवहार की भाषा बनाने की आवश्यकता है। त्रिपुरा के विधायक और भाषाविद् अतुलदेव बर्मन ने कहा कि त्रिपुरा की स्थानीय भाषाओं के लिए देवनागरी लिपि उपयुक्त है। अखिल भारतीय नागरी लिपि परिषद के महामंत्री डा. हरिसिंह पाल ने देवनागरी लिपि की वैज्ञानिकता की जानकारी दी। केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा जोशी ने बताया कि नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा की पढ़ाई भारतीय भाषाओं के माध्यम से करने पर सहमति है। हिंदी भवन के निदेशक जवाहर करनावत ने कहा कि भाषा और संस्कृति लिपि से जुड़ी होती है। अखिल भारतीय नागरी लिपि परिषद् के संरक्षक डा. परमानंद पांचाल ने जनजातीय समुदाय की आदिभाषाओं के साहित्य देवनागरी लिपि में लिपिबद्ध करने पर बल दिया।
संगोष्ठी के दूसरे सत्र में आनलाइन कविगोष्ठी :
अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद की महासचिव डा. अंशुमाला ने संस्था द्वारा हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और गैर-हिंदी प्रदेशों में प्रसार करने के लिए लगातार काम किए जाने की जानकारी दी। अखिल भारतीय नागरिक समिति की संयोजिका शहाबुद्दीन शिखा, अमरेंद्र प्रसाद सिंह, आकाशवाणी पटना के सहायक निदेशक डा. ओमप्रकाश जमुआर, विज्ञान लेखिका डा. शुभ्रता मिश्रा, सुधीर पंचाल, डा. ईश्वर सिंह, दिलीप कुमार ने भी वेबीनार संगोष्ठी में विचार रखे। कार्यक्रम का आरंभ लोकगायिका डा. नीतू कुमारी नवगीत की सरस्वती-वंदना से हुआ। दूसरे सत्र में पद्मश्री डा. शांति जैन की अध्यक्षता में काव्यगोष्ठी हुई, जिसमें पटना, मुजफ्फपुर के साथ अमेरिका से डा. आरती कुमारी, डा. नीलिमा सिंह, डा. मीनाक्षी हिमांशु, प्रो. नीलू गुप्ता, डा. स्नेह ठाकुर, डा. मीनाक्षी हिमांशु, मधुरेश नारायण, अनिरुद्ध सिन्हा, शोभारानी बरनवाल, डा. जयशंकर यादव ने आनलाइन काव्यपाठ किया। आनलाइन वेबीनार से बड़ी संख्या में श्रोता आनलाइन जुड़े। अंत में गोवा की पूर्व राज्यपाल साहित्यकार डा. मृदुला सिन्हा को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

रिपोर्ट, तस्वीर : बिन्देश्वर प्रसाद गुप्ता, पटना

देश-विदेश की 7 दर्जन फिल्में प्रदर्शित, डा.सोनी सम्मानित

एनंदुरबार (महाराष्ट्र)-सोनमाटी समाचार नेटवर्क। महाराष्ट्र के छत्रपति शिवाजी नाट्य मंदिर, एनंदुरबार में आयोजित इंटरनेशनल शार्ट फिल्म फेस्टिवल में 35 देशों से प्राप्त 471 फिल्मों में से सात दर्जन फिल्मों को 26 श्रेणियों में बांटकर उनका प्रदर्शन किया गया। समारोह का शुभारंभ आदिवासी लोककला परिषद और कला अकादमी के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार गावित, अभिनेता-निर्देशक डा. आलोक सोनी और अन्य अतिथियों ने दीप-प्रज्ज्वलित कर किया। इस फिल्म समारोह आयोजन समिति के अध्यक्ष डा. प्रकाश ठाकरे, निर्देशक डा. सुजीत पाटिल और तुशार थोराट थे। फिल्म समारोह के निर्णायक लेखकों-निर्देशकों-अभिनेताओं में अमेरिका के यंग मोन कांग, जर्मनी के थामश गार्श, इराक के अली घियास्वांद, बांग्लादेश के मोजुरूल इस्लाम मेघ और भारत के डा. आलोक सोनी, श्याम रंजनकर, नज्जो फजल खान, सुभाष पाटिल, शुभम अपूर्वा थे। चयनित हुईं फिल्मों के निर्देशक, अभिनेता, लेखक को पुरस्कार वितरण समारोह में लोकसभा सांसद डा. हीना ताई गावित और अन्य अतिथियों ने पुरस्कृत किया। लेखक-निर्देशक-अभिनेता और समारोह के मुख्य निर्णायक डा. आलोक सोनी भी उल्लेखनीय योगदान के लिए अंगवस्त्र, स्मृतिचिह्न, प्रमाणपत्र के साथ आलटाइम डायमंड अवार्ड-2020 से सम्मानित किए गए।

रिपोर्ट : डा. आलोक सोनी

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