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नारायण मेडिकल कालेज को मिला यूनिवर्सिटी का दर्जा

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यह बिहार का एकमात्र विश्वविद्यालय है, जहां नर्सरी कक्षा से स्नातकोत्तर का अध्यापन और इससे भी आगे शोध-अध्ययन हो रहा है। संकल्पना यही है कि नन्हा बच्चा इस शैक्षणिक परिसर में एक बार प्रवेश करे तो वह दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के उपयुक्त और ज्ञानवान होकर बाहर निकले। जमुहार के देवनारायण सिंह और मंगला देवी का सपना था कि उनके गांव में अस्पताल खुले, ताकि उनके गांव और आस-पास के गांवों के लोगों को बेहतर जरूरी चिकित्सा मुहैया हो सके। आज यह शैक्षणिक परिसर अपने पुरखे के सपने से आगे नई दुनिया की उड़ान भर रहा है।

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पटना/डेहरी-आन-सोन (बिहार)-कृष्ण किसलय। बिहार सरकार ने रोहतास जिले के डेहरी-आन-सोन में विश्वविद्यालय स्थापित करने और उसका संचालन करने के प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति की मुहर लगा दी है। अब सरकार के इस फैसले पर राज्यपाल की स्वीकृति की औपचारिकता पूरी होने और फिर इसके राज्य सरकार के गजट में विज्ञापित होने का इंतजार है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बिहार मंत्रिपरिषद की बैठक में पांच जून को बिहार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2013 के अंतर्गत देवमंगल ट्रस्ट के गोपालनारायण सिंह विश्वविद्यालय की स्थापना-संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।

दी गई विश्वविद्यालय की तैयारी की जानकारी
उधर, सात जून को राज्य सरकार के इस फैसले के बाद डेहरी-आन-सोन से आठ किलोमीटर दूर जमुहार स्थित नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल परिसर में पत्रकार-वार्ता का आयोजन कर राज्य सरकार के इस फैसले और मेडिकल कालेज के विश्वविद्यालय के रूप में परिवर्तित होने से संबंधित तैयारी के बारे में जानकारी दी गई। देवमंगल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं भाजपा के राज्यसभा सांसद गोपालनारायण सिंह ने बताया कि कालेज परिसर बहुत पहले से ही विश्वविद्यालय के रूप में आकार ग्रहण करने की अपनी आंतरिक तैयारी करता रहा है। विश्वविद्यालय का प्रशासनिक भवन बनकर तैयार है और अन्य भवन व जरूरी आधारभूत संरचना भी पूर्व से मौजूद हैं। मानव संसाधन के स्तर पर तैयारी अंतिम चरण में है। गोपालनारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति, पंजीकार और परीक्षा नियंत्रक यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) के मानकों के अनुरूप तदर्थ तौर पर नियुक्त कर लिए गए हैं।

पुरखे के सपने से आगे नई दुनिया की उड़ान : गोपालनारायण
गोपालनारायण सिंह ने बताया कि यह बिहार का एकमात्र विश्वविद्यालय परिसर है, जहां नर्सरी कक्षा से स्नातकोत्तर की अध्यापन और इससे भी आगे शोध-अध्ययन हो रहा है। संकल्पना यही है कि नन्हा बच्चा इस शैक्षणिक परिसर में एक बार प्रवेश करे तो वह दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के उपयुक्त और ज्ञानवान होकर बाहर निकले। उन्होंने बताया कि उनके पिता देवनारायण सिंह और मां मंगला देवी का सपना था कि उनके गांव में अस्पताल खुले, ताकि उनके गांव और आस-पास के गांवों के लोगों को बेहतर जरूरी चिकित्सा मुहैया हो सके। आज यह परिसर अपने पुरखे के सपने से आगे नई दुनिया की उड़ान भर रहा है।

मील का पत्थर स्थापित करेगा विश्वविद्यालय
पत्रकार वार्ता में कुलपति डा. एमएन वर्मा और रजिस्ट्रार राधेश्याम जायसवाल भी मौजूद थे, जिन्होंने आशा व्यक्त की कि यह निजी विश्वविद्यालय चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी सामूहिक प्रतिभा की सक्रियता से बिहार में नायाब मील का पत्थर स्थापित कर सकेगा। देवमंगल ट्रस्ट के उच्च प्रबंधन की ओर से इस बात का प्रयास जारी है कि अगले साल कृषि विज्ञान और अन्य अनुसंधान संस्थान इस विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित हो जाएं।

मेडिकल पीजी की भी पढ़ाई शुरू : गोविन्दनारायण
देवमंगल ट्रस्ट के सचिव गोविन्दनारायण सिंह ने बताया कि डेहरी-आन-सोन शहर से आठ किलोमीटर दूर जमुहार गांव में पुरानी जीटी रोड स्थित नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल को अभी तक जमुहार में नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल को कालेज में एमबीबीएस की पढ़ाई की सौ सीटें और अस्पताल में परीक्षण-चिकित्सा के लिए मरीजों के 650 बेड की अनुमति वर्ष 2008-09 में दी गई थी। अब वर्ष 2018 से पोस्ट ग्रेजुएशन के विभिन्न विषयों में 70 सीटों के लिए भी अनुमति प्राप्त हो चुकी है। एमबीबीएस की सीटें भी बढ़कर 150 हो चुकी हैं। नारायण मेडिकल कालेज के अस्पताल का पहुंच क्षेत्र रोहतास जिले के साथ पड़ोसी औरंगबाद, कैमूर और भोजपुर जिले भी हैं।

अब परीक्षाओं का बेहतर संयोजन-नियंत्रण
नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल के प्रबंध निदेशक त्रिविक्रम नारायण सिंह के अनुसार, विश्वविद्यालय की मान्यता मिल जाने से दूसरे विश्वद्यिालय पर कालेज की निर्भरत खत्म हो गई है, जिससे हम समय पर परीक्षा का आयोजन कर सकेेंगे और परीक्षाओं का बेहतर संयोजन-नियंत्रण कर सकेेंगे। हमारा प्रयास बेहतर फैकल्टी जुटाने का है, ताकि विद्यार्थियों को सक्षम और उपयोगी शिक्षा सुलभ हो सके। इसके संस्थान की ओर से अध्यापकों को प्रतिस्पर्धी वेतन और सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।

(तस्वीर : निशांत राज)

प्रबंधन संस्थान के 11 विद्यार्थियों का कैैंपस सलेक्शन से मिली नौकरी

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-सोनमाटी समाचार। नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल परिसर के अंतर्गत देवमंगल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा संचालित नारायाण इंस्टीट्यूट आफ मैनेजरियल एक्सीलेंस के पांच विद्यार्थियों का चयन निजी क्षेत्र की कंपनी आईसीआईसीआई प्रूडेन्सियल द्वारा कैैंपस में इंटरव्यू लेकर नौकरी देने के लिए किया गया। इस कंपनी के प्रतिनिधियों ने संस्थान परिसर में पहुंचकर प्रबंधन इंस्टीट्यूट के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों का अपनी जरूरत के अनुरूप अपने तरीके से साक्षात्कार लेकर उनकी क्षमता और प्रबंधकीय उपयोगिता की परख की और पांच छात्र-छात्रा का चयन किया गया। नारायाण इंस्टीट्यूट आफ मैनेजरियल एक्सीलेंस के निदेशक डा. कुमार आलोक प्रताप के अनुसार, भविष्य में कई प्रतिष्ठित कंपनियां यहां के छात्र-छात्राओं का कैैंपस सलेक्शन करने आएंगी। पिछले महीने भी अन्य कंपनियों ने नारायण इंस्टीट्यूट आफ मैनेजरियल एक्सीलेंस के छह छात्र-छात्राओं का नौकरी के लिए चयन किया था।

रीढ़ की हड्डी काटकर निकाला गया ट्यूमर

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-सोनमाटी समाचार। रोहतास जिले के नोखा थाना अंतर्गत लोकडिहरी के निर्धन परिवार के बाबूधन पासवान की रीढ़ की हड्डी के बीच ट्यूमर हो गया था, जिस कारण इस मरीज स्थिति लंबे समय से लकवा के मरीज की तरह हो गई थी और वह चलने-फिरने और अपने नित्यकार्य करने में लगभग विफल था। नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल में इस मरीज का परीक्षण कर उसके लकवाग्रस्त होने के कारण की पड़ताल की गई और चिकित्सकों की टीम ने आपरेशन कर रीढ़ की हड्डी को काटकर उसके बीच से ट्यूमर को बाहर निकाला। इस मरीज का आपरेशन करने और अन्य उपचार कार्य करने वाले चिकित्सकों के दल में नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल के न्यूरो विभाग के सर्जन डा. जयेन्द्र कुमार, हड्डी विभाग के सर्जन डा. अंशुमान, मेडिसिन विभाग के चिकित्सक डा. राशिद एकबाल और एनेस्थिसिया विभाग के डा. आदित्य प्रकाश शामिल थे।
नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल के प्रबंध निदेशक त्रिविक्रम नारायण सिंह के अनुसार, राज्य और राज्य के बाहर के अन्य निजी चिकित्सालयों के मुकाबले कम खर्च में इस मरीज का उपचार किया गया। डाक्टरों ने अनुमान व्यक्त किया है कि रीढ़ की हडड्ी के बीच से होकर गुजरने वाली धमनियों में पूर्ववत रक्तसंचार कायम होने और मांसपेशियों को रिकवर होने में वक्त लगेगा, मगर तीन महीनों बाद मरीज सामान्य स्थिति में लौट आएगा और फिर से अपने पैरों पर चलने में सक्षम हो जाएगा।

(सूचना एवं तस्वीर : भूपेन्द्रनारायण सिंह, पीआरओ, नारायण मेडिकल कालेज)

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