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मतदान के सभी चरण खत्म, अब इंतजार मतगणना का

पटना/डेहरी-आन-सोन (रोहतास)/दाउदनगर (औरंगाबाद)-सोनमाटी टीम। लोकसभा चुनाव के लिए सातों चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है। 40 सीटों वाले बिहार में 11 अप्रैल (4 सीट) से शुरू हुआ मतदान 18 अप्रैल (5 सीट), 23 अप्रैल (5 सीट), 29 अप्रैल (5 सीट), 6 मई (5 सीट), 12 मई (8 सीट) और अंत में 19 मई (8 सीट) को खत्म हुआ। अब सबको 23 मई को होने वाली मतगणना का इंतजार है। बिहार में मुख्य मुकाबला भाजपा-राजद नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस-राजद नेतृत्व वाले महागठबंधन के बीच है। विभिन्न मीडिया एजेंसियों के एक्जीट पोल का औसत अनुमान निष्कर्ष यह है कि बिहार में इस बार भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन को 25 और महागठबंधन को 15 सीट मिलने की संभावना है। महागठबंधन में राजद, कांग्रेस, रालोसपा, वीआईपी और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा शामिल हैं। पिछली बार एनडीए में रालोसपा थी, जदयू नहीं था। इस बार जदयू एनडीए में और रालोसपा महागठबंधन में है। बिहार में पहली बार लालू प्रसाद यादव की गैरमौजूदगी में चुनाव हुआ। वह चारा घोटाले में रांची जेल में सजा काट रहे हैं।

आसान नहीं आकलन कि मतदाता ने किसे वोट दिया?
चूंकि भारत में चुनाव जाति-धर्म और अन्य मुद्दों के आधार पर भी लड़ा जाता है, इसलिए यह पता करना आसान नहीं होता कि मतदाता ने किसको वोट दिया है? अब मतदाता इस सवाल का सही जवाब भी नहीं देते कि उन्होंने किसे वोट दिया? इस वजह से मतदान के बाद होने वाला एग्जिट पोल का नतीजा कई बार वास्तविक मतगणना परिणाम से विपरीत होता है। जबकि एग्जिट पोल का निष्कर्ष चुनाव के दिन वोट डालने वाले मतदाताओं से सवाल पूछ कर ही निकाला जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को बिहार में 40 में 30 सीट पर जीत हुई थी। इस बार एनडीए को पांच सीट के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। 2014 में भाजपा को 22, कांग्रेस को 02, एनसीपी को 01, जदयू को 02, रालोसपा को 06, राजद को 04 और 03 सीट अन्य को हासिल हुई थीं। 2014 के लोकसभा में जदयू एनडीए में नहीं था और एनडीए को 51.5 फीसदी मत मिले थे। इस बार राजद एनडीए के साथ है और मत प्रतिशत में करीब तीन फीसदी नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। महागठबंधन को 2014 में 32.8 फीसदी वोट मिले थे। इस बार 43 फीसदी वोट मिलने की संभावना है।

मतदान प्रतिशत कम, मगर उत्साह के अनोखे रंग भी !

लोकतंत्र के महापर्व लोकसभा चुनाव में हालांकि बिहार में 50 फीसदी से से अधिक हुआ, मगर मतदान केेंद्रों पर मतदान करने की लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उत्साह के अनोखे रंग भी सामने आए। पटना के समनपुरा में इस बार भी एक ही सिर से जुड़ी दो शरीर वाली 22 वर्षीय बहनों ने मतदान किया। दोनों जुड़ी बहनों शबा और फराह की तस्वीर चुनाव आयोग की ओर से जारी की गई। इस बार सबा-फराह को दो मत डालने की अनुमति चुनाव आयोग की ओर से दी गई। पिछले चुनाव में जुड़े शरीर वाली बहनों को चुनाव आयोग ने एक मतदाता मानते हुए एक वोट देने की अनुमति दी थी। तब चुनाव आयोग ने इन्हें शारीरिक रूप से दो, मगर मानसिक रूप से एक माना था। हालांकि दोनों के शरीर तो अलग है, मगर सिर से दोनों एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों को अलग करने के लिए होने वाले आपरेशन की इजाजत नहीं दी है, क्योंकि आपरेशन में दो में से किसी एक की जान जाने की आशंका है। बालीवुड अभिनेता सलमान खान दोनों बहनों को अपनी बहन मानते हैं। दोनों ने मुंबई पहुंचकर सलमान खान को राखी बांधी थी। सलमान खान को 2002 में हिट एंड रन केस में सजा होने पर दोनों बहनों ने खाना-पीना छोड़ दिया था। बिहार सरकार की ओर से हर महीने शबा-फराह के परिवार को पांच हजार रुपये देने का प्रावधान किया गया है।

वयोवृद्ध मतदाता भी पहुंचे वोट देने
हालांकि दिव्यांगों के लिए मतदान केेंद्रों पर बूथ तक ले जाने की व्यवस्था और पानी, छाया आदि की व्यवस्था अपवाद छोड़कर कहीं नहीं दिखाई पड़ी। फिर भी वयोवृद्ध स्त्री-पुरुष मतदाता अपनी-अपनी व्यवस्था से अपने परिजनों के सहारे मत देने पहुंचे। इस दृश्य को डेहरी-आन-सोन में जोड़ा मंदिर (वार्ड-25) स्थित हरिओम स्कूल के मतदान केेंद्र पर देखा गया। डेहरी-आन-सोन के ही जक्खी बिगहा स्थित मदरसा स्कूल के मतदान केेंद्र पर ईवीएम के दो बार खराब हो जाने से मतदान की प्रक्रिया घंटों रुकी रही, जिसकी जानकारी सोनमाटीडाटकाम को मतदाताओं ने दी और बताया कि इसकी शिकायत चुनाव आयोग और पर्यवेक्षण अधिकारी से की गई। कई मतदान केेंद्रों के ईवीएम के बाधित होने की खबर दी गई। इस बार भी महिला मतदाताओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक संख्या में उत्साह के साथ मतदान की लंबी लाइनों में देखा गया।

मतदाताओं की नजर संभवानाशील सरकार पर
बिहार के काराकाट और सासाराम लोकसभा क्षेत्रों में मतदान केेंद्रों पर महसूस किया गया कि इन दोनों क्षेत्रों में सीधा मुकाबला मीरा कुमार (कांग्रेस), छेदी पासवान (भाजपा) और उपेंद्र कुशवाहा (रालोसपा), महाबली सिंह (जदयू) के बीच रहा है। राज्यसभा सांसद गोपालनारायण सिंह ने सोनमाटीडाटकाम से कहा, इस बार मतदाताओं ने प्रत्याशी नहीं, दिल्ली में बनने वाली एनडीए की मोदी सरकार की संभावना के मद्देनजर ही मतदान किया है।  सोनघाटी पुरातत्व परिषद के उपाध्यक्ष भूपेंद्रनारायण सिंह (पत्रकार) के मुताबिक, किसी लहर के सतह पर नहीं दिखने की वजह यही रही कि मतदाताओं ने मन में अपना फैसला पहले से तय कर रखा था। पत्रकार जगनारायण पांडेय (सरांव) के अनुसार, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता घनश्याम तिवारी की निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपस्थिति प्रभावकारी न हो, मगर नई पीढ़ी में भविष्य में बतौर बेहतर विकल्प बनाने-चुनने का संकेत तो दे ही गया है।

प्राइवेट स्कूल्स चिल्ड्रेन वेल्फेयर एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री और संतपाल सीनियर सेकेेंड्री स्कूल (सासाराम) के अध्यक्ष डा. एसपी वर्मा, दाउदनगर (औरंगाबाद) स्थित विद्या निकेतन के सीएमडी सुरेश कुमार गुप्ता, सीईओ आनंद प्रकाश और विवेकानंद मिशन स्कूल के संस्थापक डा. शंभूशरण सिंह का कहना है कि मतदाता जागरूक हो चुके हैं। मतदाताओं ने बिहार के विकास, शिक्षा के बेहतर आगाज के मद्देनजर अपना सुविचारित फैसला ही दिया है, जिसके परिणाम के आने की प्रतीक्षा है।

 

 

लोकसभा चुनाव के साथ हुआ डिहरी विधानसभा का उपचुनाव भी

काराकाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डिहरी विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए भी मतदान हुआ। बिहार सरकार में मंत्री रहे इलियास हुसैन के अलकतरा घोटाला में सजा मिलने के बाद इस विधानसभा क्षेत्र से उनकी सदस्यता खत्म कर दी गई और उपचुनाव कराया गया। डिहरी विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के साथ सीधा नहीं होकर त्रिकोणीय है, जिसमें तीसरा मुख्य कोण निर्दलीय प्रत्याशी ने बनाया है। यहां मुख्य मुकबला पूर्व विधायक सत्यनारायण सिंह (भाजपा), इलियास हुसैन के पुत्र फिरोज हुसैन (राजद) और पूर्व विधायक प्रदीप कुमार जोशी (राष्ट्र सेवा दल) के बीच है।
मतदाताओं को प्रभावित करने की भी हुई कवायद
मतदान के ट्रेंड पर रोहतास इंडस्ट्रीज कांप्लेक्स के प्रभारी अधिकारी एआर वर्मा (डालमियानगर) की रायशुमारी के अनुसार, इस आलोक में भी डिहरी विधानसभा क्षेत्र के मतदान का पूर्वानुमान लगाया जाना चाहिए कि भले ही समाज के अग्रणी जातियों के मतदाताओं को प्रभावित करना सरल नहीं, मगर अति पिछड़ी और महादलित जातियों के मतदाताओं को प्रभावित करना सरल है। निर्दलीय प्रत्याशी ललन सिंह की मौजूदगी नजरअंदाज नहीं की जा सकती, चाहे असर थोड़ा हो। जैसी की सूचना छनकर आई, समाज के नाराज वर्ग का मत पूर्व विधायक प्रदीप कुमार जोशी की ओर मुड़ा माना जा रहा है। जबकि पिछले 15 सालों में प्रदीप कुमार जोशी ने सूप संस्कृति सूत्र का इस्तेमाल कर अपना मजबूत आधार वोट तैयार किया है। पत्रकार उपेंद्र मिश्र ने माना कि मतदान-भ्रमण के दौरान मुकाबला भाजपा-राजद के बीच ही दिखा, महसूस हुआ है। संघर्ष का मजबूत त्रिकोण बनाने के बावजूद प्रदीप जोशी की पुरानी मत-शक्ति इस बार नहीं दिखी।

महिलाओं का रूझान सरकारों के कार्यक्रम के प्रति
डेहरी-आन-सोन की पूर्व राजकीय शिक्षक डा. सरिता सिंह ((मकराईं)  और पत्रकार चंद्रगुप्त मेहरा (पाली रोड) का कहना है कि पहले के चुनावों के मुकाबले महिलाओं की अधिक संख्या इस बात का संकेत है कि रुझान नीतीश सरकार के विकास कार्यों के प्रति है। जबकि वरिष्ठ राजद नेता बुचुल सिंह (दरिहट) का कहना है कि राजद के प्रतिबद्ध मतदाता और महागठबंधन के प्रति ध्रुवीकृत जातियों के मतदाताओं ने बड़ी खामोशी से अपनी राय मतदान केेंद्रों पर जाहिर की। अटैची सेंटर (डेहरी-आन-सोन) के संचालक गुलाम अली का कहना है कि मुस्लिम समाज के मतदाताओं ने बेशक अपना संगठित वोट अपनी पसंद की पार्टी और प्रत्याशी को दिया। रोहतास जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष सत्येन्द्र प्रसाद सिंह और डिहरी चेस क्लब के संस्थापक निर्देशक दयानिधि श्रीवास्तव, सह संस्थापक निर्देशक स्वयंप्रकाश मिश्र, सचिव नंदकुमार सिंह का कहना है कि अगड़ी जाति के आर्थिक तौर पर पिछड़े परिवार के लिए 10 फीसदी विशेष आरक्षण व्यवस्था और बिहार में सभी तबके के वृद्ध दंपति (पति, पत्नी दोनों) को पेंशन देने की घोषणा ने भाजपा और जदयू के प्रति मतदाताओं में नया आकर्षण पैदा किया और मतदाताओं ने इसी प्ररिप्रेक्ष्य में अपना मत दिया है। सनबीम पब्लिक स्कूल (डेहरी-आन-सोन) के प्रबंध निदेशक राजीव रंजन के अनुसार, मतदाताओं ने अपना पूर्व सुविचारित फैसला ही ईवीएम का बटन दबाकर दिया है।
पूर्व अनुभव के मद्देनजर बेहतर प्रत्याशी का चयन
जबकि सोनघाटी पुरातत्व परिषद के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद सरावगी (जयहिंद मार्केट कांप्लेक्स), कारपोरेट कारोबारी अरुण कुमार गुप्ता (पाली रोड), मोहिनी इंटरप्राइजेज के संचालक उदय शंकर, सोना ज्वेलर्स के धीरज कश्यप उर्फ टिंकू, होटल उर्वशी (डेहरी-आन-सोन) के संचालक संतोष कुमार गुप्ता, कामधेनु स्वीट्स एंड कन्फेक्शनरीज के अरुण कुमार गुप्ता, अखिल भारतीय मध्यदेशीय वैश्य सभा के रोहतास जिला अध्यक्ष सुरेश प्रसाद गुप्ता,  मारवाड़ी युवा मंच (डिहरी-डालमियानगर) के संरक्षक ओमप्रकाश केजरीवाल का कहना है कि शहर (डेहरी-आन-सोन) के बहुसंख्यक कारोबारी मतदाताओं ने अपने पूर्व अनुभवों के आधार पर व्यापार के भविष्य, निर्भय वातावरण के मद्देनजर ही अपेक्षाकृत सरल पहुंच में होने वाले प्रत्याशी के प्रति मतदान किया है। अपने मतदान में कारोबारी मतदाताओं ने देश-प्रदेश में बनने वाली सरकार की संभावना का भी ध्यान रखा है।

नोट बटन दबाने का भी किया गया आह्वान
इस बार मतदाताओं ने ईवीएम में नोटा बटन का भी उपयोग किया। अभी जानकारी सामने नहीं आ सकी है कि किसी प्रत्याशी के मनोनुकल नहीं होने की दशा में कितने प्रतिशत ने नोटा बटन दबाया। नोटा (अर्थात इनमें से कोई नहीं) का संवैधानिक अधिकार 2014 के लोकसभा चुनाव से मतदाताओं को मिला है। हालांकि नोटा मत की गणना रद्द मतों में की जाती है। चुनाव के दौरान डिहरी विधानसभा क्षेत्र में नोटा बटन के इस्तेमाल का आह्वान मैरीन इंजीनियर संजीव कुमार उर्फ बंटी (प्रेस गली वार्ड 25) सहित कई लोगों ने बतौर अभियान किया। डेहरी-आन-सोन में तो इस आशय का पर्चा बांटा गया। यह मांग भी की गई कि एक-तिहाई से कम पाने वाले प्रत्याशियों के क्षेत्र में या नोटा मत की संख्या दो प्रत्याशियों के बीच जीत के मतों के अंतर से अधिक होने वाले क्षेत्र में फिर से चुनाव होना चाहिए। अब देखना है कि पर्चा बांटने के बावजूद मतदाताओं ने इसका इस्तेमाल कितना किया?

(रिपोर्ट और तस्वीर : कृष्ण किसलय, उपेंद्र कश्यप, निशांत राज)

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