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बीसवीं सदी की चिट्ठी : सोनमाटी के पन्नों पर समय के शिखर हस्ताक्षर (संदर्भ अंतरराष्ट्रीय प्रेस दिवस)

20वीं सदी चिट्ठियों का जमाना था। चिट्ठियां जो सोनमाटी परिवार की धरोहर बन चुकी हैं। और, सोनमाटी के 20वीं सदी के अंक जो पत्रकारिता के शोधार्थियों-प्रशिक्षुओं के लिए आज आंचलिक पत्रकारिता का प्रमाणिक दस्तावेज हैं। जानिए कि सोनमाटी ने कैसा इतिहास बनाया है? कि, क्यों सोनमाटी भारत के हिंदी जगत का एक सर्वश्रेष्ठ लघु मीडिया ब्रांड है? कि, कैसे अपने अंचल में समाचार-विचार पत्र की अग्रणी भूमिका निभाकर सोनमाटी देश में आंचलिक पत्रकारिता का एक श्रेष्ठ ध्वजधारक प्रतिमान बना? अत्यंत संसाधनहीन सोन नद अंचल (बिहार) में लेटर-प्रेस की कठिनतम हस्त-तकनीक के दौर से कंप्यूटरीकृत आफसेट-प्रेस के आधुनिक तकनीक तक के सफर में सोनमाटी में गुजरी 20वीं सदी के दो दशकों का कालखंड जीवंत रहा है। 21वीं सदी में पत्रकारिता के चरित्र और जरूरत में आमूल परिवर्तन के बावजूद सोनमाटी की सूचना-प्रवाह-धमनी में रोजमर्रा की सूचनात्मक पत्रकारिता से अलग विश्वविश्रुत सोन नद तट के सबसे बड़े शहर डेहरी-आन-सोन और प्रदेश-देश खासकर रोहतास, औरंगाबाद जिलों की चुनिंदा खोज-खबर, समाचार विश्लेषण, प्रतिनिधि विचार का धड़कता सरोकार आज भी अपने नन्हें कलेवर में सुपरिचित तेवर और दायित्व की गंभीरता के साथ कायम है। पढि़ए पत्रकारिता, राजनीति, साहित्य और कारपोरेट जगत के दिग्गजों द्वारा ‘सोनमाटी” को स्वत:स्फुर्त लिखी गई और प्रकाशित हुई बीसवीं सदी की चिट्ठी, जो आंचलिकता की सीमा में सोनमाटी की विश्वसनीयता, व्यापकता, सर्वस्वीकार्यता और श्रेष्ठता की भी मुहर हैं।
कृष्ण किसलय, समूह संपादक, सोनमाटी

बीसवीं सदी की चिट्ठी : राजनीति के राष्ट्रीय हस्ताक्षरों की

थोड़े समय में ही सोनमाटी ने अच्छी प्रगति की है। मेरी शुभकामना है कि सोनमाटी निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ जनता की सेवा करते हुए उन्नति करे।
जगजीवन राम, उपप्रधानमंत्री, भारत सरकार

बिहार सांस्कृतिक दृष्टि से बड़ा वैभवशाली रहा है। यह मौर्यों-गुप्तों का स्वर्णयुग और बौद्ध-प्रज्ञा का साक्षी रहा है। इस दिशा में आपका प्रयास सराहनीय है।
मीरा कुमार, लोकसभा अध्यक्ष, नई दिल्ली

मुझे इस बात से सच में गौरव हो रहा है कि छोटे शहर नगर से भी इतना पुष्ट प्रकाशन संभव है। सोनमाटी सोन-अंचल को जीवंत बनाए रखे।
शंकरदयाल सिंह, सांसद-साहित्यकार, पटना

सोनमाटी के अंकों को देखकर विश्वास बंधता है, जाति-धर्म-सांप्रदायिकता से परहेज रखते हुए यह रोहतास जिला और सोन नद अंचल के विकास-बदलाव में अपनी भूमिका निभाएगा।
विपिनबिहारी सिन्हा, उद्योगमंत्री, तिलौथू हाउस, पटना

सोनमाटी का अंक मिला। मेरी ओर से सोनमाटी परिवार को हार्दिक शुभकानाएं। आशा है, भविष्य में भी आपका सहयोग मिलता रहेगा।
डा. कांति सिंह, राज्य मंत्री, भारत सरकार

विश्वास करें, अपनी सारी व्यस्तताओं के बावजूद सोनमाटी को पूरा पढऩे की कोशिश करता हूं। छोटे समाचारपत्रों को पढ़कर अलग किस्म की अनुभूति मिलती है। सोनमाटी तो जब भी आता है, मेरे गांव की सुगंध लेकर आता है।
संजय निरूपम, सांसद, मुम्बई

बीसवीं सदी की चिट्ठी : कारपोरेट जगत के कंपनी लीडरों की

सोनमाटी के प्रति पाठकों का लगाव आपके कुशल संपादन-प्रकाशन का द्योतक है।
उदयशंकर अवस्थी, सीएमडी, इफ्को, नई दिल्ली

चूंकि अखबार युग का द्रष्टा होता है, इसलिए डेहरी-आन-सोन जैसी छोटी जगह से सोनमाटी जैसे जिम्मेदार पत्र का निरंतर प्रकाशन एक महत्वपूर्ण घटना है।
सत्यदेव प्रसाद, कार्यकारी निदेशक, पीपीसीएल, अमझोर (बिहार)

सोनमाटी बड़े ही सटीक और उत्तरदायित्वपूर्ण ढंग से विभिन्न सामयिक विषयों की प्रस्तुति कर रहा है। मैं समझता हूं, आंचलिक पत्रकारिता के क्षेत्र में सोनमाटी छोटे पत्रों में एक प्रकार से मानक की स्थिति में पहुंच गया है।
गोपाल मोहन, महाप्रबंधक, टाइम्स आफ इंडिया, दिल्ली

सोन अंचल की माटी से जुड़े रोजमर्रा की खबरों से अलग राजनीतिक समाचारों के विश्लेषण के साथ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भों का भी समावेश कर सोनमाटी विशेष आंचलिक समाचारपत्र बन गया है।
डा. मुनीश्वर पाठक, भारतीय सैनिक स्कूलों के गर्वनर, निदेशक, जगजीवन सेनाटोरियम

बीसवीं सदी की चिट्ठी : देशप्रदेश के प्रख्यात संपादकों-पत्रकारों की

हम सब उम्मीद करें कि जो बेहतर दुनिया आनी है, वह 20वींसदी के सिमटने के पहले ही हमारे सामने हो, ताकि 21वीं सदी पर कोई कर्ज न रहे।
राजेन्द्र माथुर (भारत के यशस्वी संपादक) प्रधान संपादक, नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली

समय के अर्थ को उजागर करने के लिए सोनमाटी को शुभकामनाएं!
दीनानाथ मिश्र, वरिष्ठ संपादक-सांसद, नई दिल्ली

सोनमाटी मध्य बिहार के उपनगरों, अंचलों की समस्याओं को नजदीक और गहराई से प्रस्तुत कर रहा है। इसका रोहतास विशेषांक भी पढऩे का मौका मिला। अंक बहुत पसंद आया।
रामजी मिश्र मनोहर, निदेशक, हिंदी पत्रकारिता संस्थान, पटना सिटी

आंचलिक पत्रकारिता के क्षेत्र में सोनमाटी एक अच्छा प्रयास है।
उर्मिलेश, पूर्व कार्यकारी संपादक, राज्यसभा टीवी, दिल्ली

सपना देखना, नई परंपरा बनाना और उसके लिए साहस के साथ संघर्ष करना अच्छा लगता है। आपका सपना पूर्णता पाए।
अमरेन्द्र कुमार, वरिष्ठ उप संपादक, राष्ट्रीय सहारा, दिल्ली

सोनमाटी मिल रहा है। काफी अच्छा निकाल रहे हैं।
प्रवीण बागी, प्रतिष्ठित पत्रकार, ईटीवी बिहार प्रमुख

यह सच है कि सोनमाटी लगातार निखरता जा रहा है।
कृपा शंकर, वरिष्ठ पत्रकार-कथाकार, (सासाराम, दिल्ली में अग्रणी कार्य)

बीसवीं सदी की चिट्ठी : देश के प्रसिद्ध साहित्यकारों, कवि-कथाकारों की

सोनमाटी का मुंशी प्रेमचंद स्मृति अंक मिला। स्व. प्रेमचंद के व्यक्तित्व और साहित्य पर बहुत महत्वपूर्ण सामग्री आपने सोनमाटी में संकलित कर दी है। अभी तक माटी से ही किसलय उत्पन्न होता था। अब कृष्ण किसलय ने सोनमाटी को जन्म दिया है। बधाई!
डा. रामकुमार वर्मा, प्रख्यात समालोचक, अंतरराष्ट्रीय प्राध्यापक, प्रयागराज

मुझे खेद है, प्रेमचंद जन्मशती पर अनेक व्यस्तताओं के कारण आपके विशेषांक के लिए नहीं लिख सका। मेरा बाप के प्रकाशन की स्वीकृति भी भेज सकता था। पर, मेरी स्थिति एक अनार और सौ बीमार वाली रही, उसी ने सब अस्त-व्यस्त कर दिया।
अमृत राय, सुप्रसिद्ध साहित्यकार (प्रेमंचद के पुत्र), प्रयागराज

मुंशी प्रेमचंद महान युगद्रष्टा सर्जक थे। प्रेमचंद पर गंभीर विशेषांक निकालकर सोनमाटी ने उल्लेखनीय श्रद्धांजलि अर्पित की है। सोनमाटी अपने अंचल की अन्वेषी भूमिका निभाता रहे। हार्दिक शुभकामनाएं!
रामेश्वर सिंह कश्यप, बहुचर्चित रेडियो नाटक लोहासिंह के यशस्वी रचनाकार

सोनमाटी की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम ही होगी। इसका मुंशी प्रेमचंद विशेषांक तो मैंंने अपने कई मित्रों को दिखाया, सबने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
मिथिलेश्वर, सप्रसिद्ध कथाकार, आरा, वाराणसी

सोनमाटी ने गहरी सांस्कृतिक अभिज्ञता का परिचय दिया है। बड़े शहरों के पत्रकार तो सेठाश्रित अखबारों में महज चाकरी करते हैं।
डा. बुद्धिनाथ मिश्र, प्रसिद्ध नवगीतकार, पत्रकार, देहरादून

सोनमाटी एक उपयोगी आंचलिक पत्र है और इसके शोणभद्र (सोन नद) के अंचल में व्यापक होने की प्रचुर संभावना है।
रामदयाल पांडेय, अध्यक्ष, हिंदी प्रगति समिति, बिहार सरकार

रोहतास जइसन टांड इलाका में सोनमाटी वास्तविक में सोना के फेेंड़ लहरवले बा।
हवलदार त्रिपाठी सहृदय, निदेशक, भोजपुरी अकादमी, पटना

सोनमाटी ने पत्रकारिता के सिद्धांत को कायम रखा है। संपादकीय में सामग्री रहती है। सोनमाटी आंचलिक हिंदी पत्रकारिता जगत का अशेष साधुवाद का अधिकारी है।
डा. नंदकिशोर तिवारी, विश्वविद्यालय प्रोफेसर, आलोचक (सासाराम, बिहार)

सोनमाटी सोन अंचल की ठीक-ठीक खबर पेश कर रहा है।
प्रो. अरुण कमल, प्रसिद्ध कवि, पटना

सोनमाटी के अंक मिले। प्रयास अच्छा है। प्रसन्नता की बात है कि इसे साहित्योन्मुख भी बनाया है। मैं रुचिपूर्वक पढ़ता हूं।
बलराम, प्रतिष्ठित कथाकार-पत्रकार, नई दिल्ली

बीसवीं सदी की चिट्ठी : प्रसिद्ध महिला लेखिकासाहित्यकारों की

आपके साप्ताहिक का नाम सोनमाटी मुझे बहुत पसंद आया। अच्छा निकाल रहे हैं।
ममता कालिया, प्रसिद्ध कथाकार, प्रयागराज

सोनमाटी के कई अंक संग्रहणीय बन पाए हैं। शुभकामना!
डा. शशिप्रभा शास्त्री, प्रतिष्ठित साहित्यकार, देहरादून

साहस से जूझने और सफलता प्राप्त करने के लिए बधाई। सोनमाटी के अंक मिल रहे हैं। धन्यवाद!
आशारानी व्होरा, महिला विषयों की प्रतिष्ठित लेखिका, दिल्ली

प्रेमचंद के लेखन और व्यक्तित्व के विविध पहलू को सामने लाने की संपादकीय सूझबूझ के लिए बधाई। अंक में विचारपूर्ण विश्लेषणात्मक सामग्री है।
निरुपमा सेवती, प्रतिष्ठित कथाकार, मुम्बई

उल्लेखनीय समीक्षा-टिप्पणी में बीसवीं सदी का सोनमाटी

डालमियानगर (डेहरी-आन-सोन) जैसे छोटे नगर से सोनमाटी जैसे छोटे समाचारपत्र का दृष्टि संपन्न ढंग से प्रकाशित होना महत्वपूर्ण बात है।
दिवाकर, कार्यकारी संपादक, नेशनल हेराल्ड समूह, दिल्ली (डालमियानगर पत्रकारिता समारोह में टिप्पणी)

मैंने अपनी पत्रकारिता के करियर की शुरुआत सोनमाटी के संवाददाता के रूप में की थी।
कन्हैया भेलारी, बिहार के प्रतिष्ठित पत्रकार, पटना
(बिहारी अस्मिता सम्मान समारोह स्मारिका में टिप्पणी)

देश, प्रदेश और अंचल स्तर पर लोकप्रिय प्रतिष्ठित हिन्दी साप्ताहिकों में हिन्दुस्तान, ब्लिट्ज, संडे मेल, संडे आब्जर्वर, सोनमाटी, आर्थिक जगत, कृषक जगत, रोजगार समाचार आदि-आदि उल्लेखनीय हैं।
डा. बजरंग राव बांगरे, वरिष्ठ कारपोरेट हिंदी अधिकारी, हैदराबाद
(पीएचडी शोध प्रबंध : स्वातंत्र्योत्तर हिंदी साप्ताहिक पत्रकारिता में)

नई दिल्ली से प्रकाशित टाइम्स इंडिया समूह की देश की प्रतिष्ठित पत्रिका सारिका में सोनमाटी पर छपी सशक्त टिप्पणी पढ़ी। डालमियानगर से इतना स्तरीय पत्र निकाल रहे हैं। बधाई!
डा. मृत्युंजय उपाध्याय, धनबाद (झारखंड)

युवा महिला केेंद्र सिरसा, हरियाणा (अध्यक्ष : सुषमा स्वराज) द्वारा हिंदी साहित्य सम्मेलन के अधिवेशन पर संयोजित अखिल भारतीय लघु पत्र-पत्रिका प्रदर्शनी में शामिल 514 लघु पत्र-पत्रिकाओं में सोनमाटी सहित 86 पत्र-पत्रिकाओं के विशेषांकों की प्रशंसा की गई।
कुमारी शमीम शर्मा, सिरसा (हरियाणा) की प्रकाशित रिपोर्ट में

सोनमाटी ने निरंतर बेहतर प्रकाशन का कीर्तिमान बनाया है। यह कम समय में ही हिंदी समाज में लोकप्रिय हुआ।
त्रिपुरारि त्रिवेदी, रेडियो वार्ता (रोहतास में पत्रकारिता)

मैं बर्लिन विदेशी पत्रकार संघ का सदस्य हूं। सोनमाटी के लिए मैं बतौर विशेष संवाददाता लिखना चाहता हूं।
रामनारायण यादव, बर्लिन (पश्चिम जर्मनी)

सोनमाटी में प्रकाशित रिपोर्ट, इसके स्तंभ और संपादकीय ध्यान खींचने में समर्थ हैं।
सैन्नी अशेष की तारिका (कहानी लेखन महाविद्यालय, अंबाला छावनी) में

और, सोनमाटी लिखी गई कविताएं भी

चार दशक पहले जब आंचलिक समाचार-विचार पत्र ‘सोनमाटी” का प्रकाशन डालमियानगर (डेहरी-आन-सोन), बिहार से आरंभ हुआ था, तब रोहतास जिला के वरिष्ठ कवि स्वर्गीय चंद्रेश्वर नीरव ने सोनमाटी के अलग अंदाज, तेवर, सामग्री स्तर और प्रस्तुति से प्रभावित होकर प्रतिक्रिया स्वरूप एक कविता लिखी थी। स्व. नीरव आशु कवि भी थे, उन्होंने सोनमाटी प्रेस कार्यालय में बैठे-बैठे ही कविता लिख दी थी। तब सोनमाटी के सलाहकार संपादक अवधेश कुमार श्रीवास्तव (तिलौथू, रोहतास) भी वहां थे। मरहूम शायर आईए सिद्दकी जाजिब ने भी सोनमाटी पर कविता लिखी थी, जो जनसंवाद स्तंभ में ही प्रकाशित की गई थी। और, चालीस बाद बिहार के औरंगाबाद जिला के वरिष्ठ अध्यापक, कवि गिरिजेश पांडेय ने भी सोनमाटी पर स्वत:स्फुर्त कविता लिखी, जो सोनमाटी के 05 अप्रैल के अंक में प्रकाशित की गई। प्रस्तुत है सोनमाटी में प्रकाशित सोन नद तट वासी और यहां कार्यरत तीनों कवियों के कविता-अंश :-

1. महकी-चहकी सोनमाटी !

व्यंग्य वाण लिए हुए शब्दों की घाटी,
पत्रकारिता क्षेत्र में शुरू हुई नई परिपाटी।
इतिहास आंचल में राजनीति पायल में,
महकी सोनमाटी ! चहकी सोनमाटी !!
0- चन्द्रेश्वर नीरव
सचिव, स्नेह संगम, तिलौथू (रोहतास), बिहार)

2. ये जो है सोनमाटी !

खबरों की फुहारों का सावन है सोनमाटी।
हर बैर बदअमनी से, पावन है सोनमाटी ।।
0- आईए सिद्दीकी
सहायक समादेष्टा, बीएमपी-2, डेहरी-आन-सोन

3. सोनमाटी, यह सोनमाटी…!

सोन नद्य का पा सानिध्य बल खाती इठलाती
सोन की कोख से निकली है बिटिया सोनमाटी
जन-गण की भाषा को जन-जन तक पहुंचाती
सोनमाटी ! यह सोनमाटी !!
0- गिरिजेश पांडेय
ऊब, ओबरा (औरंगाबाद, बिहार)

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जो चिट्ठी ढूंढे नहीं जा सकी : वर्ष 1979-2000 में प्रकाशित सोनमाटी के हजारों पन्नों में बीसवीं सदी के उन चिट्ठियों-टिप्पणियों को ढूंढना अभी बाकी है, जिनमें देश-प्रदेश के कई अग्रणी संपादक, पत्रकार, साहित्यकार, राजनेता आलोक मेहता, मिथिलेश सिंह, गुंजन सिन्हा, नवेन्दु, वेदप्रकाश वाजपेयी, भगवानदास अरोड़ा, परिपूर्णांनंद पांडेय, अशोक ओझा, कल्याण सिन्हा, ज्ञानवर्द्धन मिश्र, महेश खरे, अनिल विभाकर, विनोद बंधु, डा. खगेन्द्र ठाकुर, डा. गुरुचरण सिंह, डा. सिद्धनाथ कुमार, डा. बालेन्दुशेखर तिवारी, डा. ब्रजवल्लभ मिश्र, ओमप्रकाश लाल, वेंकेटलाल ओझा, श्यामकृष्ण पांडेय, प्रसिद्ध मगही कवि मथुरा प्रसाद नवीन, वरिष्ठ भोजपुरी कवि गणेशदत्त किरण, ब्रजकिशोर दुबे, सतीषराज पुष्करणा, ईशमधु तलवार, डा. स्वर्ण किरण, शंकर (संपादक, अब, परिकथा), भूपेंद्र अबोध, विकासकुमार झा, शिवेन्द्रनारायण सिंह, श्रीशचंद्र मिश्र सोम, विजयकृष्ण अग्रवाल आदि के मत-सम्मत दर्ज हैं।

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(संयोजन : निशान्त राज, प्रबंध संपादक, सोनमाटी)

FACEBOOK की ओर से फेसबुक पेज SONEMATTEE media group के लिए चेहरा समूह प्रदर्शित करती रेखाचित्र प्लेट के साथ 01.05.2020 को यह अति संक्षिप्त संदेश आया :-
milestone-1.

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