कोर्ट-आर्डर : बीत चुके 20 वर्ष, विजयदशमी पर भी डालमियानगर में नहीं पहुंची अपनी बिजली

डालमियानगर (बिहार)-विशेष प्रतिनिधि। हाई कोर्ट के आदेश के 20 वर्ष बीत चुके हैं और डालमियानगर के लोग इंतजार कर रहे हैं कि उनके घरों में भी अपनी बिजली आखिर कब पहुंचेगी? डालमियानगर रोहतास इंडस्ट्रीज काम्लेक्स में रहने वाले डालमियानगर कारखानों के कर्मियों के घरों में जो बिजली पहुंच रही है, वह या तो उधार की है या जुगाड़ की, अपनी नहीं है, क्योंकि उन्हें उनकी बिजली खपत की कोई बिल नहीं मिलती और न ही वे उसका कोई भुगतान बिजली विभाग को करते हैं। इस स्थिति में जाहिर है कि उनकी बिजली का बिल या तो रोहतास इंडस्ट्रीज के संचालक भरेंगे या उन्हें यूं ही मुफ्त बिजली मिलती रहेगी, जैसा कि डालमियानगर के आवासीय कालोनियों में रोहतास इंडस्ट्रीज के कारखानों के तालाबंद होने और फिर समापन (लिक्विडेशन) में चले जाने से पहले होता रहा है।

पहले रोहतास इंडस्ट्रीज के जिम्मे था बिजली भुगतान और आपूर्ति व मेन्टेनेन्स
डालमियानगर के कारखाने और इसके समूचे आवासीय परिसर के लिए बिहार सरकार के बिजली विभाग की ओर से एक ही कनेक्शन रोहतास इंडस्ट्रीज के नाम पर रहा है। डालमियानगर में सरकारी बिजली फीडर से हाई-टेंशन लाइन (तार) के जरिये आने वाली बिजली 500 केवीए के दो ट्रांफफार्मरों में पहुंचती है और फिर ट्रांसफार्मर से जरूरत के अनुरूप लो-टेंशन लाइन के जरिये विभिन्न आवासीय कालोनियों के घरों में जाती है। इस उपनगर में बिजली वितरण, उसकी देखरेख व मेन्टेनेन्स का काम सरकारी बिजली विभाग के बजाय रोहतास इंडस्ट्रीज का आंतरिक निजी बिजली विभाग ही करता रहा है और बिजली की खपत के बिल का भुगतान भी। 1984 में कारखानों में इसके प्रमोटरों (संचालकों) द्वारा स्थाई तौर पर तालाबंदी कर दी गई।  10 साल बाद 1995 में इसकी सारी संपत्ति को समापन (लिक्विडेशन) में डालकर इसे हाईकोर्ट के कंपनी जज के नियंत्रण में कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय (शासकीय समापक) से संबद्ध कर दिया गया।
कंपनी जज ने बिजली विभाग को दिया था अपना कनेक्शन देने और भुगतान लेने का आदेश
08 जुलाई 1997 को ही कंपनी जज (हाई कोर्ट) ने आदेश दिया था कि बिजली विभाग डालमियानगर के घरों में अपना कनेक्शन दे और बिजली उपभोग के बिल की वसूली करे। मगर बिजली विभाग अब तक ऐसा नहीं कर सका। जाहिर है कि हाई-टेंशन लाइन से ट्रांसफार्मरों के जरिये जो बिजली डालमियानगर के आवासीय कालोनियों में पहुंच रही है वह या तो मुफ्त में है या उसका भुगतान कालोनी में रहने वालों को करना है। रोहतास इंडस्ट्रीज तो समापन में जा चुका है और इसके पूर्व-कर्मचारियों से इसका अब कोई नाता नहीं है।

ट्रांसमिशन मजबूतीकरण और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क के लिए बनी समिति
चूंकि मार्च 2019 तक मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है, इसलिए बिजली विभाग की नींंद खुली है और वह डालमियानगर की आवासीय कालोनियों में वैध बिजली कनेक्शन के लिए सक्रिय हुआ है। बिजली विभाग की ओर से शहरी क्षेत्र में सब-ट्रांसमिशन के मजबूतीकरण और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क विकसित करने के लिए अशोक बिल्डकान लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है। बिजली विभाग को डालमियानगर में बिजली पहुंचाने लायक अपनी आधारभूत संरचना बनाने के लिए स्थल-सर्वेक्षण की आरंभिक अनुमति भारत सरकार के कारपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत शासकीय समापक हिमांशु शेखर की ओर से मिल चुकी है। इसी अनुमति के तहत विद्युत आपूर्ति प्रमंडल (डिहरी) के कार्यपालक अभियंता अभयरंजन कुमार ने तीन बिजली अधिकारियों की समिति सहायक अभियंता (आपूर्ति) श्यामल किशोर की अध्यक्षता में बनाई है, जिसमें सहायक अभियंता (परियोजना) आशुतोष त्रिपाठी और कनीय अभियंता (आपूर्ति) हिमांशु कुमार भूषण शामिल हैं।

सर्वेक्षण सहयोग के लिए रोहतास इंडस्ट्रीज काम्पलेक्स प्रबंधन ने भी बनाई समिति
रोहतास इंडस्ट्रीज काम्पलेक्स के प्रभारी अधिकारी एआर वर्मा ने सोनमाटीडाटकाम को बताया कि रोहतास इंडस्ट्रीज काम्पलेक्स प्रबंधन की ओर से भी तीन सदस्यीय कमेटी बिजली विभाग के सर्वेक्षण कार्य में सहयोग के लिए बनाई गई है, जिसमें नथूनी सिंह, खुर्शीद खां और सुरेश कुमार हैं। यह तो कहा ही जा सकता है कि बिजली विभाग कोर्ट के निर्देश के आलोक में अपना कार्य करने, बिजली कनेक्शन देने और 1995 से अपना बिल भुगतान लेने के मामले में लापरवाह है। हालांकि उसका 60 करोड़ रुपये का भुगतान रोहतास इंडस्ट्रीज से प्राप्त करने का दावा अभी कोर्ट के समक्ष विचारधीन है।

एआर वर्मा ने बताया कि जब कंपनी जज ने 1997 में  आदेश दिया था, तब रोहतास इंडस्ट्रीज काम्पलेक्स की देखरेख के लिए इसके क्रियाशील दफ्तर में 98 लोग कार्यरत थे, जिनके बिजली बिल या खपत का भुगतान शासकीय समापक कार्यालय (पटना) के जरिये होना था। डालमियानगर रोहतास इंडस्ट्रीज काम्पलेक्स की कालोनियों में विद्युत कनेक्शन देने के मामले में कोर्ट का यह स्पष्ट निर्देश है कि बिजली विभाग हर उपभोक्ता के बाबत शासकीय परिसमापक से एनओसी  (अनापत्ति प्रमाणपत्र) प्राप्त करे।

(रिपोर्ट : कृष्ण किसलय, तस्वीर : निशांत राज)

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