मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया रबर डैम का लोकापर्ण

Pitri Paksha Mela

गया ( कार्यालय प्रतिनिधि)। गया में फल्गु नदी पर देश का सबसे बड़ा रबर डैम तथा विष्णुरपद घाट से सीताकुंड तक जाने के लिए बने स्टील ब्रिज का लोकार्पण और पितृपक्ष मेला महासंगम 2022 का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्घाटन किया।

पौराणिक नगरी के नाम पर इस रबर डैम का नाम गयाजी डैम रखा गया है। रबर डैम से गया के लोगों की कई तरह की समस्याओं का हल हो गया है। साथ ही पितृ पक्ष के मौके पर पिंडदानियों को भी काफी सहूलियत होगी।

फल्गु नदी में सिर्फ बारिश के मौसम में ही सतह पर पानी होता है। बाकी दिनों में पानी नहीं रहता। मान्यता है कि गया में बहने वाली फल्गु नदी माता सीता से श्रापित है। मान्यताओं के अनुसार पिंडदान के बाद तर्पण के लिए इसी नदी का जल जरूरी होता है। लेकिन पानी नहीं होने की वजह से न सिर्फ पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों को भी असुविधा होती थी।

इसी को देखते हुए फल्गु नदी पर रबर डैम का निर्माण कराया गया है। अब नदी में सालभर सतह पर पानी रहेगा और पिंडदान करने आए लोगों को समस्या नहीं होगी। रबड़ डैम के ऊपर 411 मीटर लंबा स्टील पैदल पुल का निर्माण कर विष्णुपद घाट से सीताकुंड तक पिंडदान के लिए जाने का रास्ताब भी आसान कर दिया गया है।

Rubber Dam 'Gayaji Dam'

देश का सबसे लंबा डैम

बिहार के पहले एवं देश के सबसे लंबे रबर डैम का निर्माण फल्गु नदी पर किया गया है। इसकी लंबाई 411 मीटर है। पानी को रोकने के लिए रबर बैलून का प्रयोग किया गया है। यह फल्गु नदी के सतही प्रवाह को रोकने के लिए तीन मीटर ऊंचा एवं 411 मीटर लंबा भारत का सबसे लंबा रबर डैम है, जिसमें 65- 65 मीटर लंबाई के छह स्पैबन हैं।

इस डैम योजना की पूरी रूप रेखा IIT रुड़की के विशेषज्ञों द्वार स्थल निरीक्षण के बाद दिए गए परामर्श को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था।

 यहां की धार्मिक मान्यता

Sitakund GAYA

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति जिन तीन कृत्यों से होती है, वे हैं श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण। पुराणों में पिंडदान और तर्पण के लिए गया को सबसे पवित्र भूमि बताया गया है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, गया जी तीर्थ में स्वयं भगवान श्री राम अपने परिवार के साथ पिता दशरथ के पिंडदान के लिए आए थे।

वहां राम और लक्ष्मण श्राद्ध का सामान जुटाने इधर-उधर गए, तभी माता ने राजा दशरथ का श्राद्ध कर दिया। मान्यता है कि दशरथ की चिता की राख उड़ते-उड़ते गया नदी के पास पहुंची। उस वक्त केवल माता सीता वहां मौजूद थी। तभी आकाशवाणी हुई कि श्राद्ध का समय निकल रहा है। यह सुन सीता माता ने फल्गु नदी की रेत से पिंड बनाए और पिंडदान कर दिया।

इस पिंडदान का साक्षी माता ने वहां मौजूद फल्गु नदी, गाय, तुलसी, अक्षय वट और एक ब्राह्मण को बनाया। जब भगवान राम और लक्ष्मण वापस आए और श्राद्ध के बारे में पूछा। तब माता सीता ने पूरी बात बताई। साथ ही पिंडदान के साक्षी को गवाह बताया। राम ने जब इन चारों से पूछा कि पिंडदान हुआ या नहीं, तो फल्गु नदी ने झूठ बोल दिया कि माता सीता ने कोई पिंडदान नहीं किया। ये सुनकर माता सीता ने झूठ बोलने को लेकर फल्गु नदी को श्राप दे दिया। तब से फल्गु नदी जमीन के नीचे ही बहती है।

सीएम नीतीश के साथ उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी मौजूद रहे।

रिपोर्ट :  मुकेश प्रसाद सिन्हा, तस्वीर : आशुतोष सिन्हा
(इनपुट : निशांत राज)

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