सोन कला स्थापनादिवस 03 को/ दयनीय दशा में शिक्षण संस्थान/ महादेवखोह में श्रावण-उत्सव नहीं

सादगी से मनेगा सोन कला केेंद्र का स्थापना दिवस

(एक साल का हुआ पौधा : सोन तट पर सोन कला केन्द्र द्वारा पौधरोपण – फाइल फोटो)

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-कार्यालय प्रतिनिधि। सांस्कृतिक सर्जना की संवाहक संस्था सोन कला केेंद्र का एक वर्ष पूरा हो गया। संस्था की वार्षिक आमसभा सह स्थापनादिवस 03 जुलाई को शंकर लाज परिसर में संपन्न होगा। यह फैसला संस्था के सलाहकार डा. एसबी प्रसाद के आवास पर गत सप्ताह संस्था की कार्यकारिणी की हुई बैठक में लिया गया। इसके बाद 30 जून को स्थापनादिवस के आयोजन के स्वरूप पर चर्चा की गई। गत सप्ताह हुई बैठक में अध्यक्ष दयानिधि श्रीवास्तव, संस्थापक सलाहकार कृष्ण किसलय, सलाहकार पारस प्रसाद, कार्यकारी अध्यक्ष जीवन प्रकाश, उपाध्यक्ष उपेंद्र कश्यप, कोषाध्यक्ष राजीव सिंह, उप सचिव सत्येन्द्र गुप्ता, प्रीतिराज सिन्हा, उप कोषाध्यक्ष नंद कुमार सिंह, राजू सिन्हा, अमिताराज पांडेय, उदय गुप्ता, सन्नी कुमार उपस्थित थे। बैठक के आरंभ में बीएपीआईकान का स्पीकर बनाए जाने पर डा. एसबी प्रसाद को बधाई दी गई और अंत में सीमा पर शहीद भारतीय जवानों के प्रति दो मिनट का मौन रखा गया। 30 जून को संरक्षक डा. एसबी प्रसाद, अध्यक्ष दयानिधि श्रीवास्तव, कार्यकारी अध्यक्ष जीवन प्रकाश, सचिव निशांत राज, कोषाध्यक्ष राजीव कुमार सिंह, उप सचिव सत्येंद्र गुप्ता ने बैठक कर स्थापना दिवस के संक्षिप्त स्वरूप पर चर्चा की। यह तय किया गया कि 03 जुलाई को शंकर लाज परिसर में लाकडाउन के अनुशासन फीजिकल डिस्टेंस (शारीरिक दूरी) और मास्क कवर का पालन करते हुए सोन कला केंद्र परिवार की आमसभा (बैठक) संख्या-विभाजन कर दो सत्रों में सादगी के साथ आयोजित होगी।

रिपोर्ट, तस्वीर : निशांत राज

स्कूल कर्मियों के सामने अ भरण-पोषण की समस्या

(डा चंचल कुमार)

दाउदनगर (औरंगाबाद)-विशेष संवाददाता। सम्पूर्णानंद एजुकेशनल एंड सोशल डेवलपमेंट ट्रस्ट के सचिव डा चंचल कुमार ने मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा है कि राज्य के सभी प्राइवेट स्कूल और कोचिंग संस्थान लाकडाउन के कारण गंभीर आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं। इनके संचालकों, शिक्षकों, कर्मचारियों के घरों की स्थिति दयनीय हो चली है और उनके घरों में भरण-पोषण की समस्या आसन्न हो गई है। विद्यार्थियों की फीस नहीं आने के कारण शिक्षकों को पूरा वेतन नहीं मिल पा रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देकर जल्द वांछित निर्णय लेना चाहिए। मौजूदा हालत में राज्य के हजारों संस्थान बंद होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। आज विद्यालय अपने भवन का किराया देने, भवन के बैंक ऋण का भुगतान करने में समर्थ नहीं रह गए हैं। शिक्षण संस्थानों के संचालक चिंतित हैं कि इस आसन्न संकट का निदान कैसे निकाला जाए? बिजली बिल, गाड़ी का टैक्स आदि खर्च की स्थिति सोचनीय है। लगातर स्कूल बंद रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी बाधित है। स्कूल से दूर रहने के कारण उनका ध्यान पढ़ाई से विचलित हो गया है। विद्यालयों के बंद होने से अधिसंख्य अभिभावकों ने स्कूल फीस का भुगतान नहीं करने का मन बना रखा है। सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो स्कूल धीरे-धीरे बंद होने लगेंगे। स्थानीय स्तर पर अभिभावकों-विद्यार्थियों के सामने उच्च शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की समस्या खड़ी होगी। डा चंचल कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर निजी शिक्षण संस्थानों और उनमें कार्यरत शिक्षकों-कर्मचारियों की दयनीय स्थिति के बारे में जानकारी दी है।

रिपोर्ट, तस्वीर : उपेन्द्र कश्यप

करुणानंद की अपील, महादेवखोह में न बढ़ाएं भीड़

बौलिया (रोहतास)-सोनमाटी संवाददाता। कैमूर पहाड़ में जलप्रपात युक्त गुफा स्थित महादेवखोह आश्रम परिसर में इस वर्ष कोरोना महामारी के मद्देनजर श्रावण मेला के अवसर पर हर साल होने वाला भंडारा का आयोजन नहींहोगा और प्रसाद का वितरण भी नहींकिया जाएगा। यह जानकारी देते हुए महादेवखोह आश्रम परिसर के अध्यक्ष साधुबाबा करुणानंद ने कहा है कि शारीरिक दूरी के अनुशासन के साथ महादेव का श्रृंगार-पूजन होगा। उन्होंने प्रशासन से श्रावण शुक्ल पक्ष (पखवारा) के अवसर पर महादेवखोह आश्रम परिसर में पुलिस गश्त बढ़ाने का आग्रह किया है, ताकि भीड़ नहींलगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से भी जमावड़ा नहींकरने और शारीरिक दूरी, मास्क आदि के अनुशासन का पालन कर दर्शनार्थ आने की अपील की है। महादेवखोह आश्रम परिसर के महासचिव श्यामसुत सिन्हा, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र पांडेय, सह संचालक राधासुत सिन्हा आदि की देख-रेख में आश्रम परिसर का सैनिटाइजेशन कराया गया है।

रिपोर्ट : राधासुत सिन्हा

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