समकालीन साहित्यकार प्रेमचंद की तरह कलम का मजदूर बने : सिद्धेश्वर


पटना -कार्यालय प्रतिनिधि। बेहतर और सार्थक साहित्य सृजन के लिए, समय का बहाना नहीं चलता। साहित्य अध्ययन और सृजन की साधना करनी पड़ती है। सम्मान पत्र, पुरस्कार और छपास की भूख वाले नए या पुराने रचनाकार साहित्य सृजन के नाम पर,छलावा कर रहे होते हैं। प्रेमचंद या निराला जयंती मनाने वाले रचनाकार, पहले उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा ले, साहित्य की साधना करें, और उनकी तरह कलम का मजदूर बने। शौक के रूप में साहित्य सृजन करने वाले रचनाकार, सिर्फ खुद को छलावा नहीं दे रहे होते बल्कि पूरे साहित्यिक परिवेश को गंदा कर रहे होते हैं। नए रचनाकारों को इससे बचना चाहिए।
भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वाधान में, गूगल मीट के माध्यम से फेसबुक के अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका के पेज पर ” अवसर साहित्य यात्रा समागम ” के 5 साल पूरे होने पर नए पुराने रचनाकारों को संबोधित करते हुए संस्था के संयोजक एवं अध्यक्ष वरिष्ठ कवि चित्रकार सिद्धेश्वर ने उपरोक्त उदगार व्यक्त किया।


कार्यक्रम प्रभारी एवं तर्पण साप्ताहिक की सह संपादिका ऋचा वर्मा ने कहा कि पूरे देश में ऑनलाइन साहित्यिक गोष्ठी करने वाली यह पहली संस्था है, जो साहित्य की सभी विधाओं के साथ, कला और संगीत का भी आयोजन सफलता पूर्वक, पिछले 5 साल से लगातार कर रही है।
प्रभारी एवं राइजिंग बिहार के सह संपादक डॉ. अनुज प्रभात ने कहा कि पंकज कुमार, नीरज कुमार के संपादन एवं सिद्धेश्वर के साहित्य संपादन में हम सबको बहुत कुछ सीखने का मौका मिला है। साथ ही साथ इस अखबार के माध्यम से नई पुरानी प्रतिभाओं को समुचित अवसर भी मिला है। हम सभी एक साहित्यिक परिवार की तरह एक दूजे से कुछ सीख रहे हैं सिखला रहे हैं।

प्रभारी एवं युवा कवयित्री राज प्रिया रानी ने कहा कि कोरोना काल की देन सोशल मीडिया पर अब जबकि ऑफ /ऑन लाइन की होड़ लगी है इसकी चमक सातवें आसमान पर है। लेकिन सिद्धेश्वर द्वारा संस्थापित अवसर साहित्य यात्रा की बात सबसे अलग और अद्भुत है।
चर्चित लेखिका पूनम कतरियार ने कहा कि वैसे रचनाकारों को इन साहित्यिक गोष्ठियों में शामिल नहीं करना चाहिए, जो समय का बहाना बनाकर सिर्फ अपनी रचना का पाठ कर फिर लेफ्ट हो जाते हैं।
सुप्रसिद्ध साहित्यकार तारिक असलम तस्नीम ने कहा कि सिद्धेश्वर के द्वारा चलाया जा रहा, यह साहित्यिक अभियान, साहित्य के प्रदूषित वातावरण से नए लेखकों को बचाने का सार्थक प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज एक तरफ अखबार से साहित्य गायब होता जा रहा है, ऐसे में तर्पण एवं राइजिंग बिहार साप्ताहिक अखबार के माध्यम से, इसके साहित्य संपादक सिद्धेश्वर अभूतपूर्व साहित्य सेवा कर रहे हैं। इस अखबार में पाठकों की प्रतिक्रिया भी प्रकाशित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रचनाकारों की रचनाओं की समीक्षा करते समय व्यक्तिगत प्रहार नहीं करना चाहिए।
इसके अतिरिक्त इस विचार विमर्श चर्चा गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करने वालों में अनिल कुमार जैन, रॉकी कुमारी, निर्मल कर्ण, हजारी सिंह, पुष्पा पांडेय, दिव्यांजलि, गीता चौबे गूंज एवं रजनी गुप्ता ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किये l कार्यक्रम का समापन ऋचा वर्मा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ

प्रस्तुति : बीना गुप्ता

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