
डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)। गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित नारायण कृषि विज्ञान संस्थान में आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देते हुए राइस ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई की शुरुआत की गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रति कुलाधिपति गोविंद नारायण सिंह ने कृषि में आधुनिक मशीनों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए इस पहल की सराहना की। उन्होंने संस्थान के निदेशक प्रो. एच. के. सिंह एवं अधिष्ठाता प्रो. एस. एस. सिंह को इस नवाचार के लिए बधाई देते हुए भविष्य में और अधिक आधुनिक कृषि उपकरणों को संस्थान में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि छात्र-छात्राओं और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी मिल सके।
संस्थान के निदेशक प्रो. एच. के. सिंह ने कहा कि खरीफ मौसम में समय पर धान की रोपाई अच्छी उपज का आधार होती है। वर्तमान समय में मजदूरों की कमी, बढ़ती मजदूरी और अनिश्चित मानसून किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। ऐसे में राइस ट्रांसप्लांटर किसानों के लिए तेज, किफायती और प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहा है।
अधिष्ठाता प्रो. एस. एस. सिंह ने प्रशिक्षण प्राप्त करने आए किसानों को बताया कि राइस ट्रांसप्लांटर की सहायता से कम समय में अधिक क्षेत्र में धान की रोपाई की जा सकती है। इस तकनीक से श्रम की आवश्यकता 70 से 80 प्रतिशत तक कम हो जाती है। साथ ही पौधों की रोपाई समान दूरी और समान गहराई पर होने से उनका विकास बेहतर होता है, जिससे फसल की बढ़वार और उत्पादन दोनों में वृद्धि होती है।
शस्य विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. धनंजय ने बताया कि राइस ट्रांसप्लांटर के सफल उपयोग के लिए 18 से 25 दिन पुरानी स्वस्थ मैट नर्सरी तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेत की अच्छी तरह पडलिंग एवं समतलीकरण किया जाए, ताकि मशीन सुचारु रूप से कार्य कर सके। रोपाई के बाद उचित जल प्रबंधन और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षक, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे और आधुनिक कृषि तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन देखा।




