
बिहार को एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। पटना से भोजपुर होते हुए सासाराम तक 120 किलोमीटर लंबे फोरलेन एक्सेस कंट्रोल्ड नेशनल हाइवे का निर्माण ओमान की गल्फर इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी करेगी। दरभंगा के बाद यह राज्य का दूसरा एक्सेस कंट्रोल्ड हाइवे होगा।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने प्रोजेक्ट के लिए एजेंसी का चयन कर लिया है। अब केवल फाइनेंशियल क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। अनुमान है कि एक से दो महीने में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:-
- लंबाई: 120 किलोमीटर
- दो चरणों में निर्माण: पहला चरण – पटना से भोजपुर (46 किमी) दूसरा चरण – आरा से सासाराम (74 किमी)
- लक्ष्य: वर्ष 2028 तक प्रोजेक्ट पूरा करना
- सफर का समय: पटना से सासाराम की दूरी 4 घंटे से घटकर केवल 2 घंटे में तय होगी
किसे मिलेगा फायदा
इस फोरलेन सड़क के बनने से पटना, भोजपुर, अरवल, रोहतास और सासाराम जिलों के लोगों को सीधा लाभ होगा। अरवल जिले तक आना-जाना आसान होगा, वहीं जीटी रोड से कनेक्टिविटी के कारण पटना से बनारस और उससे आगे तक का सफर भी सुविधाजनक हो जाएगा। पीरो, नौबतपुर, अरवल, सहार, हसन बाजार, संझौली और नोखा जैसे इलाकों के लोगों के लिए यह हाइवे जीवनरेखा साबित होगा।
क्यों खास है यह हाइवे
यह ग्रीनफील्ड हाइवे कई नेशनल हाइवे (NH-19, NH-319, NH-922, NH-131G, NH-120) और स्टेट हाइवे (SH-12, SH-102, SH-2, SH-81) को जोड़ेगा। एक्सेस कंट्रोल्ड डिजाइन होने के कारण इसमें सीमित प्रवेश और निकास होंगे, जिससे दुर्घटना की संभावना कम होगी। परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों के समय व ईंधन दोनों की बचत होगी।






