कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में ‘कृषि यंत्रीकरण एवं फसल अवशेष प्रबंधन’ पर 4 दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

पटना- कार्यालय प्रतिनिधि। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग द्वारा आत्मा, लखीसराय के प्रायोजन में “कृषि यंत्रीकरण एवं फसल अवशेष प्रबंधन” विषय पर आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शनिवार को हुआ। इस प्रशिक्षण में बिहार के लखीसराय जिले से 22 किसानों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में श्री जे.पी. नारायण (पूर्व संयुक्त निदेशक, कृषि अभियांत्रिकी, बिहार सरकार), संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास, डॉ. आशुतोष उपाध्याय (प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग) तथा डॉ. संजीव कुमार (प्रमुख, फसल अनुसंधान प्रभाग) उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को छोटे कृषि उपकरणों के उपयोग, फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों, कृषि मशीनों के चयन, संचालन एवं रखरखाव की विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. अनुप दास ने उत्पादन लागत घटाने, कृषि कार्यों की समयबद्धता बढ़ाने और पर्यावरणीय क्षरण कम करने के लिए आधुनिक कृषि औजारों एवं प्रभावी अवशेष प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया।

मुख्य अतिथि जे.पी. नारायण ने बिहार में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने, कस्टम हायरिंग केंद्रों को सुदृढ़ करने तथा सतत कृषि के लिए फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने भूमि तैयारी, बुवाई, निराई-गुड़ाई, कटाई एवं कटाई उपरांत कार्यों में आधुनिक मशीनों के सही चयन और नियमित रखरखाव के महत्व को रेखांकित किया।

प्रशिक्षण के दौरान संवादात्मक सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें किसानों ने अपने अनुभव और समस्याएं साझा कीं। वक्ताओं ने बताया कि उचित यंत्रीकरण और अवशेष प्रबंधन से उत्पादकता, मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण में सुधार संभव है।समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. आशुतोष उपाध्याय एवं डॉ. विकास सरकार (प्रधान वैज्ञानिक) ने की।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. पी.के. सुंदरम, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. पवन जीत, डॉ. आरती कुमारी एवं डॉ. कीर्ति सौरभ के सहयोग से, डॉ. कुंदन कुमार (परियोजना निदेशक, आत्मा, लखीसराय) के प्रायोजन में किया गया। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

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