
पूर्णिया। किसानों में संतुलित उर्वरक उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुवार को पूर्णिया जिले के धमदाहा प्रखंड स्थित धमदाहा गांव में कृषि जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना, कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्णिया, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर तथा बिहार कृषि विभाग के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में कुल 87 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 22 महिलाएं एवं 65 पुरुष शामिल थे। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा मृदा परीक्षण आधारित खेती की व्यवहारिक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उर्वरकों का असंतुलित एवं अत्यधिक उपयोग मृदा स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ उत्पादन लागत एवं पर्यावरणीय समस्याओं को भी बढ़ाता है।
वैज्ञानिकों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक एवं हरित खादों के संतुलित उपयोग की सलाह दी। कार्यक्रम में गोबर की खाद, कम्पोस्ट एवं हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना, जलधारण क्षमता तथा सूक्ष्मजीव गतिविधियों में होने वाले सुधार पर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों को ढैंचा एवं सनई जैसी हरित खाद फसलों की खेती के लिए भी प्रेरित किया गया।कार्यक्रम के दौरान किसानों को गोबर की खाद के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं उपयोग की तकनीकों की जानकारी दी गई। साथ ही ड्रोन तकनीक के माध्यम से उर्वरकों के छिड़काव से जल एवं उर्वरक की बचत तथा कम समय में अधिक क्षेत्र में कार्य करने के लाभ बताए गए।
इस अवसर पर पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से डॉ. पवन जीत एवं डॉ. गौस अली सहित डॉ. के. एम. सिंह, प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्णिया, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, बिहार कृषि विभाग, नाबार्ड, इफको तथा जलजीविका के विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने किसानों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं के समाधान सुझाए। कार्यक्रम में किसानों ने आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों के प्रति विशेष रुचि दिखाई।





