नये आयकर अधिनियम के सरलीकरण से सबको लाभ : डॉ. सुधाकर राव

  • बिहार की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से कम, महाराष्ट्र की 37 प्रतिशत : डॉ. भवेश

पटना। आयकर विभाग बिहार एवं झारखंड की ओर से ‘प्रारंभ-2026’ नामक मेगा आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन बिहार चैंबर्स ऑफ कॉमर्स सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य एक अप्रैल 2026 से लागू होने वाले आयकर अधिनियम 2025 के प्रमुख प्रावधानों और बदलावों के प्रति लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना तथा सूचित चर्चा को प्रोत्साहित करना था। यह कार्यक्रम विभाग की करदाता-केंद्रित पहल का हिस्सा था। इसके तहत करदाताओं और विभिन्न हितधारकों को नए कानून के तहत किए गए सुधारों और सरल प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य आयकर आयुक्त डॉ. डी. सुधाकर राव, पद्मश्री डॉ. विजय प्रकाश, पद्मश्री डॉ. भीम सिंह भवेश तथा पद्मश्री सुधा वर्गीज ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त डॉ. सुधाकर राव ने कहा कि बदलते आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए आयकर अधिनियम का सरलीकरण किया गया है। पहले एक ही विषय से जुड़े प्रावधान अलग-अलग स्थानों पर बिखरे हुए थे, जिन्हें अब एक जगह समाहित कर दिया गया है। उन्होंने पारदर्शी प्रशासन, हितधारकों की भागीदारी और नए कर कानून के सुचारु क्रियान्वयन के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता दोहराई।

पद्मश्री डॉ. भीम सिंह भवेश ने कहा कि बिहार-झारखंड की बड़ी आबादी के बावजूद देश के कुल आयकर में यहां की हिस्सेदारी एक प्रतिशत भी नहीं है, जबकि महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत है। उन्होंने सुझाव दिया कि आयकर विभाग को एक प्रतियोगिता आयोजित करनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक जिला एवं राज्य से अधिक कर जमा करने वालों को सम्मानित किया जाए।

पद्मश्री डॉ. सुधा वर्गीज ने कहा कि गरीब केवल लाभार्थी नहीं बनना चाहते, बल्कि वे भी देश के योगदानकर्ता बनना चाहते हैं। इसके लिए आयकर विभाग को आगे आकर पहल करनी होगी।

पद्मश्री डॉ. विजय प्रकाश ने कहा कि नए आयकर प्रावधानों के तहत कर भुगतान की प्रक्रिया आसान, सरल और सहज हो गई है।

कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर एवं फीडबैक सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने नए आयकर कानून तथा आयकर नियम 2026 के क्रियान्वयन से जुड़े सुझाव एवं व्यावहारिक समस्याएं साझा कीं। कार्यक्रम में सीआईएमपी के निदेशक प्रो. राणा सिंह, चैंबर के अध्यक्ष पी.के. अग्रवाल, बीआईए अध्यक्ष रामलाल खेतान, शिक्षाविद, सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी संस्थानों, व्यापार एवं उद्योग संगठनों, टैक्स पेशेवरों तथा शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

पूर्व आयकर आयुक्त अशोक झा ने कहा कि बदलते आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए आयकर अधिनियम का सरलीकरण किया गया है। पहले एक ही तथ्य कई स्थानों पर बिखरा हुआ था, जिसे अब एक जगह समाहित कर दिया गया है। इससे कानून को समझना काफी आसान हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि अब फॉर्म-16 की जगह फॉर्म-130 तथा फॉर्म-16ए की जगह फॉर्म-131 लागू किया गया है। फॉर्म-130 प्रत्येक वर्ष 15 जून तक जारी किया जाएगा। टीडीएस के कई फॉर्म को मर्ज कर सेक्शन-392 के अंतर्गत शामिल किया गया है। वहीं फॉर्म-393 में रेंट, कॉन्ट्रैक्टर, प्रोफेशनल, प्रॉपर्टी एवं नॉन-रेजिडेंट से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों के लिए फॉर्म-93, भारतीय कंपनियों, एलएलपी एवं ट्रस्ट के लिए फॉर्म-94, एनआरआई, विदेशी पीआईओ एवं ओसीआई के लिए फॉर्म-95 तथा विदेश में निगमित संस्थाओं के लिए फॉर्म-96 निर्धारित किया गया है।


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