
पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा रोहतास जिले के करगहर प्रखंड अंतर्गत कुशलाही स्थित मत्स्य फार्म में शुक्रवार को एक दिवसीय मत्स्य पालन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन, मत्स्य स्वास्थ्य संरक्षण तथा आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों के प्रति जागरूक करना था।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनूप दास के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 35 मत्स्य पालकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आईसीएआर-आरसीईआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. तारकेश्वर कुमार और वैज्ञानिक सुरेंद्र कुमार अहिरवाल ने किसानों को वैज्ञानिक मत्स्य पालन की उन्नत तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी।
वैज्ञानिकों ने तालाब की उत्पादकता बढ़ाने के लिए जल की गुणवत्ता बनाए रखने, घुलित ऑक्सीजन की नियमित निगरानी, जल के पीएच संतुलन तथा प्राकृतिक प्लवक के विकास को बढ़ावा देने की वैज्ञानिक विधियों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि इन उपायों को अपनाने से मछलियों की बेहतर वृद्धि सुनिश्चित होती है और अचानक होने वाली मृत्यु की घटनाओं में कमी आती है।
कार्यक्रम में मत्स्य रोग प्रबंधन पर भी विशेष चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को परजीवी संक्रमण के शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर उपचार तथा रोगों की रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। साथ ही, तालाब में फिंगरलिंग डालने से पूर्व मत्स्य बीज के उचित विसंक्रमण, निर्धारित मात्रा में चूने के प्रयोग और स्वच्छ जल प्रबंधन के महत्व को भी समझाया गया।
इस अवसर पर मत्स्य उद्यमी एवं बिहार सरकार के पूर्व सचिव दिनेश कुमार राय भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं और उपलब्ध सब्सिडी का लाभ उठाकर आधुनिक मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ उद्यम बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों ने इस प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए सीखी गई तकनीकों को अपने मत्स्य पालन कार्यों में अपनाने की प्रतिबद्धता जताई।


