भोजपुरी चित्रकला के संरक्षण को नई पहल, बिहार संग्रहालय में पहली संगठित प्रदर्शनी

  • सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, बिहार संग्रहालय और भारतीय विरासत संस्थान में एमओयू

पटना। बिहार की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए बिहार संग्रहालय और भारतीय विरासत संस्थान, नोएडा के बीच कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर भारतीय विरासत संस्थान के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी और बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह उपस्थित रहे।

बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि यह समझौता बिहार संग्रहालय को केवल पुरावस्तुओं के संरक्षण तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि बिहार की समृद्ध लोक एवं पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का भी प्रमुख केंद्र बनाएगा। उन्होंने विशेष रूप से पीड़िया लेखन जैसी लोक कला का उल्लेख करते हुए कहा कि संग्रहालय के माध्यम से विलुप्तप्राय कलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

भारतीय विरासत संस्थान के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने इस एमओयू को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संरक्षण भारतीय विरासत संस्थान के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में से एक है और इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में बिहार कला मंच और आसरा सेवा केन्द्र के तत्वावधान में भोजपुरी चित्रकला प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। पद्मश्री प्रो. श्याम शर्मा, पद्मश्री अशोक कुमार विश्वास, पद्मश्री डॉ. भीम सिंह भवेश तथा बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि प्रदर्शनी के लिए लगभग 100 कलाकृतियाँ प्राप्त हुई थीं, जिनमें से स्थान की सीमाओं के कारण 45 चित्रों का प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी चित्रकला लोकजीवन, पर्व-त्योहार, अनुष्ठानों और सामाजिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है और इसकी विशिष्ट शैली इसे अलग पहचान देती है।

पद्मश्री डॉ. भीम सिंह भवेश ने कहा कि यह आयोजन बिहार की कला और संस्कृति के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल लोक कलाओं का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

पद्मश्री अशोक कुमार विश्वास ने कहा कि किसी भी कला को जीआई टैग मिलना उसके विकास और पहचान के लिए नए रास्ते खोलता है। वहीं पद्मश्री प्रो. श्याम शर्मा ने भोजपुरी चित्रकला को बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की सशक्त अभिव्यक्ति बताया।

भोजपुर की पीड़िया लेखन को जीआई टैग मिलने के बाद यह पहली बड़ी प्रदर्शनी मानी जा रही है। कार्यक्रम में कमलेश कुंदन, भास्कर मिश्रा, अमन राज, रूपा कुमारी, रौशन राय, अनिता पाण्डेय, गुड़िया कुमारी, मुकेश कुमार, अभिनव मिश्रा और रामावती देवी सहित कई कलाकारों ने भाग लिया। धन्यवाद ज्ञापन रौशन राय ने किया।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर कलाकारों की रचनाओं और लोक कलाओं की सराहना की।

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