
पटना/बक्सर । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बक्सर में शुक्रवार को राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस के अवसर पर “तकनीक और नवाचार से मत्स्य किसानों का सुदृढ़ीकरण” विषय पर किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मत्स्य पालकों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत मत्स्य प्रबंधन पद्धतियों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उनकी उत्पादन क्षमता एवं आय में वृद्धि करना था।
गोष्ठी में बक्सर जिले के 58 प्रगतिशील मत्स्य पालकों ने भाग लिया, जिनमें तीन महिला मत्स्य पालकों की सक्रिय सहभागिता विशेष आकर्षण रही। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बिहार की परिस्थितियों के अनुरूप मेजर कार्प प्रजातियों के वैज्ञानिक मत्स्य पालन, आधुनिक तालाब प्रबंधन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, मत्स्य रोगों की पहचान एवं नियंत्रण, संतुलित आहार प्रबंधन तथा अधिक उत्पादन प्राप्त करने की उन्नत तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी।
किसानों को सरकारी अनुदान योजनाओं, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) तथा प्रभावी विपणन व्यवस्था के माध्यम से मत्स्य व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने के उपाय भी बताए गए। इस अवसर पर प्रतिभागी किसानों के बीच स्प्रे मशीन एवं वाटर पंप का भी वितरण किया गया।
तकनीकी सत्रों में डॉ. कमल शर्मा, डॉ. उज्ज्वल कुमार, डॉ. देवकरण, डॉ. विवेकानंद भारती, डॉ. तारकेश्वर कुमार तथा मत्स्य प्रसार पदाधिकारी वेशवामनी ने वैज्ञानिक मत्स्य पालन की नवीनतम तकनीकों पर व्याख्यान दिए और किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संदेश में कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक मत्स्य प्रबंधन को अपनाकर मत्स्य पालक उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, संतुलित आहार, जल गुणवत्ता प्रबंधन तथा सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। अंत में डॉ. रामकेवल ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।




