पाँच टीमें, एक लक्ष्य: खेत तक पहुँचेगा कृषि अनुसंधान

पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में आयोजित तीन दिवसीय संस्थान अनुसंधान परिषद बैठक–2026 का शुक्रवार को समापन हुआ। 5 से 7 अगस्त तक चली बैठक में पूर्वी भारत के किसानों की बदलती जरूरतों के अनुरूप जलवायु-सहिष्णु, टिकाऊ और लाभकारी कृषि के समाधान विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में संस्थान के पाँच प्रमुख विषयगत कार्यक्रमों के अंतर्गत संचालित 85 अनुसंधान उप-परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान वैज्ञानिकों ने चल रही अनुसंधान परियोजनाओं की प्रगति, उपलब्धियों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही राष्ट्रीय कृषि प्राथमिकताओं और किसानों की वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नई अनुसंधान पहलों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

संस्थान के निदेशक एवं संस्थान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष डॉ. अनुप दास ने वैज्ञानिकों से “एक टीम, एक कार्य” की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान का उद्देश्य ऐसी तकनीक और समाधान विकसित करना होना चाहिए, जो किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करें, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करें तथा कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हों। उन्होंने स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर अनुसंधान को तेजी से खेत तक पहुँचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के दौरान आने वाली चुनौतियाँ और बाधाएँ कई बार बेहतर एवं प्रभावशाली परिणामों का आधार बनती हैं।

पाँच विषयगत कार्यक्रमों में अनुसंधान की समीक्षा

फसल अनुसंधान प्रभाग के प्रमुख डॉ. संजीव कुमार ने “जलवायु-सहिष्णु कृषि के लिए पुनर्योजी एवं समेकित कृषि प्रणालियाँ” विषय का नेतृत्व किया। इसके तहत संरक्षण कृषि के माध्यम से धान परती क्षेत्र के बेहतर उपयोग, धान–गेहूँ प्रणाली के सतत गहनीकरण, प्राकृतिक खेती, लघु एवं सीमांत किसानों के लिए समेकित कृषि प्रणाली मॉडल, फसल विविधीकरण, तनाव-सहिष्णु फसल किस्मों, कृषिवानिकी, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं और पादप संरक्षण से जुड़े अनुसंधान पर चर्चा हुई।

कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र, रांची के प्रमुख डॉ. अवनि कुमार सिंह ने “बागवानी फसलों के आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन एवं उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकियाँ” विषय का नेतृत्व किया। इसमें आनुवंशिक संसाधनों के प्रबंधन, किस्म सुधार, उन्नत उत्पादन तकनीक, संरक्षित खेती, कटाई उपरांत प्रबंधन और मूल्य संवर्धन पर विचार किया गया। किसानों को बेहतर किस्मों और उत्पादन तकनीकों से जोड़ने तथा बाजार की संभावनाओं के अनुरूप बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने “भूमि एवं जल उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन” विषय का नेतृत्व किया। इसके अंतर्गत मृदा, भूमि और जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन, जल उत्पादकता एवं पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने, परिशुद्ध जल एवं पोषक तत्व प्रबंधन तथा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग से संबंधित अनुसंधान पर चर्चा हुई। सौर ऊर्जा, सेंसर आधारित सिंचाई और धान परती क्षेत्र के मानचित्रण जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

पशुधन एवं मत्स्य प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. कमल शर्मा ने “सतत पशुधन एवं मत्स्य उत्पादन प्रणालियाँ” विषय का नेतृत्व किया। इसमें पशुधन एवं मत्स्य उत्पादन में सुधार, फसल–पशुधन–मत्स्य एकीकरण, आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण, पशु स्वास्थ्य, रोग निगरानी, संसाधनों के पुनर्चक्रण और आजीविका संवर्धन पर चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने फसल उत्पादन के साथ पशुपालन एवं मत्स्य पालन को जोड़कर किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने पर बल दिया।

सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार प्रभाग के प्रमुख डॉ. उज्ज्वल कुमार ने “सामाजिक-आर्थिक, प्रसार एवं नीति अनुसंधान” विषय का नेतृत्व किया। इसमें कृषि विकास के सामाजिक-आर्थिक पहलुओं, प्रौद्योगिकी अपनाने, कार्बन क्रेडिट, पूर्वानुमान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग के अनुप्रयोग, प्रौद्योगिकी प्रसार और नीतिगत सहयोग पर विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि कृषि तकनीकों की सफलता का आकलन केवल वैज्ञानिक परिणामों से नहीं, बल्कि किसानों की आय, आजीविका तथा सामाजिक एवं पर्यावरणीय लाभों के आधार पर भी किया जाना चाहिए।

प्रयोगशाला से खेत तक तकनीक पहुँचाने पर जोर

बैठक में प्रयोगशाला और प्रायोगिक स्तर पर सफल उन्नत किस्मों एवं तकनीकों को व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुँचाने पर विशेष जोर दिया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि भविष्य का कृषि अनुसंधान समेकित, मांग-आधारित, जलवायु-सहिष्णु और प्रभाव-केंद्रित होना चाहिए। नई तकनीकें वैज्ञानिक रूप से प्रभावी होने के साथ किसानों के लिए सरल, उपयोगी, बड़े स्तर पर अपनाने योग्य और आर्थिक रूप से व्यवहार्य भी होनी चाहिए।

बैठक के उद्घाटन सत्र में डेवलपमेंट फोकस, बेंगलुरु के साथ कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र, रांची में विकसित उन्नत सब्जी किस्मों के बीज उत्पादन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। वहीं, समापन सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ द्वारा जनजातीय उप-योजना के अंतर्गत गोद लिए गए उदलू गांव की सफलता की कहानी पर आधारित वृत्तचित्र का विमोचन किया गया।

बैठक का समापन बहुविषयक अनुसंधान को और मजबूत करने तथा प्रयोगशाला से खेत तक प्रभावी एवं उपयोगी कृषि तकनीकों को तेजी से पहुँचाने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ। इसमें किसानों की जरूरतों को कृषि अनुसंधान के केंद्र में रखने पर विशेष जोर दिया गया। सदस्य सचिव डॉ. पी.सी. चंद्रन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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