
पटना। हरियाली अमावस्या के अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की ओर से पर्यावरण संरक्षण एवं हरित संसाधनों के संवर्धन के उद्देश्य से पौधरोपण अभियान आयोजित किया गया। अभियान के तहत पटना मुख्यालय के अलावा कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र, रांची, कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर में भी पौधरोपण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में आयोजित वृहद पौधरोपण अभियान का सीधा प्रसारण भी किया गया। संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अभियान का सीधा प्रसारण देखा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
अभियान के तहत संस्थान के पटना मुख्यालय, अनुसंधान केंद्र एवं दोनों कृषि विज्ञान केंद्रों में कुल 64 फलदार एवं बहुउद्देशीय पौधे लगाए गए। इनमें आम, कटहल, गागर नींबू, इमली और जमरूल जैसे पौधे शामिल रहे। इन प्रजातियों का चयन इनके पोषण, पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किया गया।
यह पहल ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अनुरूप आयोजित की गई। संस्थान के विभिन्न केंद्रों एवं किसानों के खेतों में इस अभियान के तहत अब तक 6,000 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। अभियान का उद्देश्य लोगों को पौधरोपण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित संसाधनों के संवर्धन के लिए प्रेरित करना है।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि पौधरोपण केवल पर्यावरण संरक्षण की गतिविधि नहीं, बल्कि स्वस्थ, सुदृढ़ और सतत भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी उचित देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है।
डॉ. दास ने कहा कि फलदार एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल वृक्ष प्रजातियों का रोपण कृषि-जैव विविधता को मजबूत करता है। इससे विविध आहार के माध्यम से पोषण सुरक्षा को बढ़ावा मिलता है तथा सतत उत्पादन और बाजार योग्य उपज के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि ऐसे वृक्ष कार्बन अवशोषण, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, सूक्ष्म जलवायु के नियमन और जल संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करते हैं। इसलिए पौधरोपण को केवल एक मौसमी गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय एवं कृषि विकास की रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम में संस्थान एवं इसके विभिन्न केंद्रों के 110 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, हरित संसाधनों के संवर्धन और सतत कृषि विकास का संदेश दिया गया।





