
सासाराम (रोहतास)। रेडिया शरीफ स्थित वारसिया आश्रम एवं दरगाह परिसर में दो दिवसीय उर्स मेले का आयोजन किया गया। उर्स में विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सभी जाति और धर्म के लोगों की भागीदारी के कारण रेडिया शरीफ दरगाह वर्षों से सामाजिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी हुई है।
अंजुमन-ए-इंतजामिया कमिटी/ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने बताया कि दरगाह परिसर में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। यहां हिंदू-मुस्लिम समेत विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं और चादरपोशी कर अपनी मन्नतें मांगते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि दरगाह पर सच्चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी होती हैं।
उर्स मेले के दौरान अंजुमन-ए-इंतजामिया कमिटी/ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं के लिए आम लंगर की व्यवस्था की गई है। बाहर से आने वाले जायरीनों के ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। कमिटी के पदाधिकारियों की मौजूदगी में उर्स से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर अंजुमन इंतजामिया कमिटी/ट्रस्ट की सदर सबनम वारसिया, कार्यकारी सदर जनाब साबिर हुसैन वारसी, मुख्य संरक्षक हातिम ताई वारसी, सेक्रेटरी जनरल इंजीनियर एकलखु रहमान वारसी, प्रवक्ता डॉ. सद्दाम हुसैन वारसी, तैयब वारसी, सनौर मंडल वारसी, चंद्रशेखर वारसी, मोतिउर रहमान वारसी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
ट्रस्ट के प्रवक्ता डॉ. सद्दाम हुसैन वारसी ने कहा कि रेडिया शरीफ दरगाह गंगा-जमुनी तहजीब को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। यहां देश-विदेश से विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ पहुंचते हैं और आपसी भाईचारे एवं सद्भाव का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि दरगाह की यही समावेशी परंपरा इसे क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दिलाती है।
उर्स के दौरान दरगाह परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। लोगों ने दरगाह पर चादरपोशी कर अमन-चैन, खुशहाली और परिवार की समृद्धि की दुआ मांगी। आयोजन स्थल पर श्रद्धा और सौहार्द का माहौल देखने को मिला।
- रिपोर्ट, तस्वीर: टिपु सुलतान





