
डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)। रोहतास में दहेज हत्या से जुड़े एक पुराने मामले ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डेहरी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बालरती बिगहा निवासी दिलीप महतो ने एसपी रोहतास को दिए आवेदन में दावा किया है कि जिस महिला को वर्ष 2014 में मृत मानकर उसके ससुरालवालों के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया गया था, वह करीब 12 साल बाद झारखंड में जीवित मिली है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मामले की जांच में शव की पहचान और महिला की तलाश को लेकर आवश्यक सत्यापन नहीं किया।
2014 में दर्ज हुआ था दहेज हत्या का मामला
दिलीप महतो के अनुसार, उनके पुत्र अरुण कुमार की शादी वर्ष 2003 में औरंगाबाद जिले के पिरौटा निवासी हजारी वर्मा की पुत्री शकुंतला देवी उर्फ कांति देवी से हुई थी। वर्ष 2014 में शकुंतला देवी बिना बताए घर से चली गईं। इसके बाद मायके पक्ष की ओर से 20 अगस्त 2014 को डेहरी नगर थाना में कांड संख्या 329/14 दर्ज कराया गया। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि मामले में धारा 498ए, 302, 201/34 तथा दहेज अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई और महिला की हत्या कर शव छिपाने का आरोप लगाया गया।
आठ लोगों को जेल भेजे जाने का दावा
दिलीप महतो का दावा है कि मामले में पति अरुण कुमार, ससुर दिलीप महतो, सास भगवनों देवी, बबीता देवी, देवर भरत महतो, गोतनी सविता देवी, देवर गोबिंद महतो और गोतनी संजू देवी समेत आठ लोगों को जेल भेजा गया। परिजनों के अनुसार, जमानत और मुकदमे की प्रक्रिया में परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और जमीन व वाहन तक बेचने पड़े। उनका कहना है कि बाद में सासाराम न्यायालय में मामला समाप्त हो गया, लेकिन इस दौरान परिवार को सामाजिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
झारखंड में जिंदा मिली महिला
मामले में नया मोड़ तब आया, जब करीब 12 वर्ष बाद दिलीप महतो को सूचना मिली कि शकुंतला देवी झारखंड के कांडी थाना क्षेत्र के लभारी कला गांव में रह रही हैं। परिजन वहां पहुंचे और उनके अनुसार महिला को जीवित पाया। सूचना मिलने के बाद एसपी के निर्देश पर डेहरी मुफस्सिल पुलिस ने महिला को बरामद कर डेहरी लाया। पुलिस ने डेहरी मुफस्सिल थाना के माध्यम से न्यायालय में महिला का बयान दर्ज कराया, जिसके बाद उसे कस्टडी में भेजे जाने की बात कही गई है।
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल वर्ष 2014 में हुई जांच को लेकर उठ रहा है। यदि बरामद महिला ही वही शकुंतला देवी हैं, तो उस समय कथित शव की पहचान कैसे हुई और हत्या के मामले में पुलिस ने किन तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की, इसकी जांच महत्वपूर्ण होगी। साथ ही मामले में शिकायतकर्ता की भूमिका और तत्कालीन जांच की प्रक्रिया की भी निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि आधिकारिक पुलिस जांच और न्यायालयीन रिकॉर्ड से होना बाकी है।




