रबी योजना-2026 को लेकर कृषि वैज्ञानिकों और किसानों का संवाद, समय पर खेती पर जोर

पटना। रबी मौसम की बेहतर तैयारी और किसानों को वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना, रांची स्थित अनुसंधान केंद्र तथा कृषि विज्ञान केंद्र रामगढ़ एवं बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को रबी योजना-2026 के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ऑनलाइन संवाद हुआ। इसमें करीब 186 लोगों ने भाग लिया, जिनमें 101 किसान शामिल रहे।


ऑनलाइन संवाद के दौरान केंद्रीय मंत्री ने किसानों, वैज्ञानिकों और अन्य हितधारकों को पिछले रबी मौसम में रिकॉर्ड उत्पादन के लिए बधाई दी। उन्होंने आगामी रबी मौसम की तैयारी स्थानीय परिस्थितियों और बदलते जलवायु परिवेश को ध्यान में रखकर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रबी की योजना किसानों की जरूरतों के आधार पर गांव, प्रखंड और जिला स्तर से तैयार होकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचनी चाहिए। इसके लिए आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य सरकार, एटीएमए और किसानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।


श्री चौहान ने छोटे किसानों की आय और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए समेकित कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने तथा किसानों के खेतों पर इसके प्रदर्शन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कृषि विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। साथ ही विकसित कृषि संकल्प अभियान और खेत बचाओ अभियान के तहत किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने तथा किसानों को फसल बीमा, वीबी-जी राम जी और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने की बात कही।


कार्यक्रम में डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक, आईसीएआर तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव आतीश चंद्रा ने भी रबी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया।


इस दौरान किसान-वैज्ञानिक संवाद भी हुआ। आईसीएआर के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि किसानों के लिए समय सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है। खेती के प्रत्येक कार्य को सही समय पर करना जरूरी है। उन्होंने रबी फसलों की योजना बनाते समय समय पर बुवाई और अन्य कृषि कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही।


नौबतपुर प्रखंड के कराई गांव के किसानों ने जल की अनिश्चित उपलब्धता को देखते हुए उपयुक्त फसल किस्मों को लेकर वैज्ञानिकों से जानकारी ली। वैज्ञानिकों ने किसानों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त फसल किस्मों के चयन की जानकारी दी।


संवाद के दौरान फसल अवशेष प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल कृषि, समय पर बुवाई एवं कटाई, फसल चक्र, समेकित कृषि प्रणाली, संतुलित उर्वरक उपयोग, पशुपालन, बकरी पालन और पोषण वाटिका जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने संस्थान की प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण इकाइयों का भ्रमण किया और खेती की विभिन्न तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। भ्रमण का उद्देश्य किसानों को ‘देखकर सीखने’ के माध्यम से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से परिचित कराना था।

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