
पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में बुधवार को ‘युवाओं का मौसम के अनुकूल स्मार्ट कृषि हेतु कौशल विकास’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और किसानों को मौसम आधारित कृषि प्रबंधन, जलवायु सहनशीलता, मौसम पूर्वानुमान तथा आधुनिक कृषि-मौसम सेवाओं के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी देना है।
प्रशिक्षण में बिहार के पूर्णिया, वैशाली, बांका, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सिवान, जमुई, पटना और बक्सर जिलों के कुल 20 युवा किसान भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि प्रबंधन की जानकारी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। समय पर मौसम पूर्वानुमान और वैज्ञानिक सलाह को कृषि निर्णयों से जोड़कर फसल उत्पादन से जुड़े जोखिम को कम किया जा सकता है। इससे किसानों की आय और कृषि की स्थिरता को भी बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने क्षेत्रों में अपनाने तथा अन्य किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया।प्रशिक्षण के पहले दिन स्मार्ट मौसम प्रबंधन के माध्यम से जलवायु सहनशीलता का निर्माण, भारत मौसम विज्ञान विभाग की मौसम पूर्वानुमान एवं चेतावनी सेवाएं, किसानों के मौसम संबंधी अनुभवों का साझा करना, फसल, कीट एवं रोगों के साथ मौसम के पारस्परिक संबंध और उनका उचित प्रबंधन जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। मोबाइल ऐप और वेबसाइट के माध्यम से मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त करने तथा उसे कृषि कार्यों में उपयोग करने की जानकारी भी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि मौसम में होने वाले बदलाव का कृषि उत्पादन, फसल स्वास्थ्य, पशुधन और किसानों की आय पर सीधा प्रभाव पड़ता है। मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियों की समय पर जानकारी मिलने से किसान कृषि कार्यों की बेहतर योजना बना सकते हैं और संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन कर सकते हैं।
प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं एवं किसानों को मौसम संबंधी सूचनाओं को कृषि निर्णयों से जोड़ने के साथ स्मार्ट, जलवायु-सहिष्णु और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है।प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. संजीव कुमार, प्रभागाध्यक्ष, फसल अनुसंधान तथा डॉ. मनीषा टम्टा, वैज्ञानिक (कृषि मौसम विज्ञान) हैं।





