
पटना। खेती-किसानी में नवाचार और उद्यमिता के जरिए महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। बिहार और झारखंड की ऐसी ही नवाचारी महिला किसानों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में आयोजित महिला किसान दिवस समारोह में सम्मानित किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण, कृषि आय बढ़ाने और पारिवारिक पोषण सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम की थीम ‘मेरी कहानी, मेरी खेती : नवाचार, सशक्तीकरण एवं आत्मनिर्भरता’ थी।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पटना जिला परिषद की अध्यक्ष स्तुति गुप्ता ने महिला किसानों से अपनी क्षमताओं और सामर्थ्य को पहचानने का आह्वान किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास में महिलाओं की समान भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए महिलाओं को आत्मविश्वास एवं दृढ़ संकल्प के साथ आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरी महिलाओं को भी जागरूक और प्रेरित करना चाहिए।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य, दृढ़ संकल्प और निरंतर सीखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिला किसानों को क्षमता विकास कार्यक्रमों में भाग लेने और कृषि उद्यमिता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों, नवाचारी कृषि पद्धतियों और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ महिलाओं की आजीविका को भी मजबूत किया जा सकता है।

बिहार और झारखंड की महिला किसान सम्मानित
कार्यक्रम में बिहार और झारखंड की नवाचारी महिला किसानों को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इन महिला किसानों की वार्षिक आय दो लाख से 4.8 लाख रुपये तक है। उन्होंने अपनी सफलता की कहानियां और अनुभव साझा किए। उनके अनुभवों से अन्य महिला किसानों को आय बढ़ाने वाली कृषि पद्धतियां अपनाने की प्रेरणा मिली।
इसके अलावा कृषि अनुसंधान और संस्थान के विकास में योगदान देने वाली महिला वैज्ञानिकों, प्रशासनिक कर्मियों और तकनीकी कर्मचारियों के कार्यों की सराहना की गई। कृषि पत्रकारिता एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एक महिला पत्रकार और एक पीएचडी शोधार्थी को भी सम्मानित किया गया।
पोषण वाटिका के लिए बीज और फलदार पौधे वितरित
कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों के बीच उन्नत सब्जियों के बीज और फलदार पौधों का वितरण किया गया। घरेलू पोषण को बढ़ावा देने के लिए पालक, धनिया, मेथी, गाजर और मूली के बीज दिए गए। इसका उद्देश्य घर के आसपास पोषण वाटिका विकसित करना, आहार में विविधता बढ़ाना और बाजार से सब्जियां खरीदने पर निर्भरता कम करना था।
इस पहल के माध्यम से पारिवारिक स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा में महिला किसानों की भूमिका को रेखांकित किया गया। घर में सब्जियों का उत्पादन परिवार के पोषण में सुधार के साथ घरेलू खर्च कम करने में भी सहायक हो सकता है।
वैज्ञानिकों और महिला किसानों के बीच हुआ संवाद
कार्यक्रम में संस्थान के विभिन्न प्रभागों के प्रमुखों ने कृषि में महिलाओं की भागीदारी, वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग, संसाधनों के कुशल प्रबंधन और सतत कृषि पद्धतियों पर विचार रखे। वैज्ञानिकों और महिला किसानों के बीच संवादात्मक सत्र में किसानों ने अपनी समस्याओं, चुनौतियों और अनुभवों को साझा किया। चर्चा में कृषि उत्पादकता और आजीविका बढ़ाने के लिए उपयुक्त तकनीकी उपायों की पहचान पर जोर दिया गया।
महिला किसानों ने संस्थान के प्रक्षेत्र का भ्रमण भी किया। इस दौरान उन्हें पोषण वाटिका, सूक्ष्म सिंचाई, मोटे अनाज की खेती, प्राकृतिक खेती, समेकित कृषि प्रणाली और पशुपालन की वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी दी गई। प्रक्षेत्र प्रदर्शनों के माध्यम से उन्होंने संसाधनों के बेहतर उपयोग पर आधारित विविधीकृत एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
रांची, बक्सर और रामगढ़ में भी आयोजनमहिला किसान दिवस के अवसर पर संस्थान के अनुसंधान केंद्र एफएसआरसीएचपीआर, रांची में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहां घरेलू पोषण में सुधार और महिला किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए बागवानी आधारित कृषि पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया।
वहीं, संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), बक्सर और रामगढ़ में भी महिला किसान दिवस मनाया गया। इन कार्यक्रमों में कृषि आय बढ़ाने, कौशल विकास और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
संस्थान के सभी केंद्रों पर आयोजित कार्यक्रमों में कुल 392 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 284 महिलाएं शामिल थीं। आयोजनों के माध्यम से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, कौशल विकास और कृषि उद्यमिता को महिला सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बनाने का संदेश दिया गया। साथ ही कृषि आय, पारिवारिक पोषण और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करते हुए सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।




