
बोधगया-मुकेश प्रसाद सिन्हा। ज्ञान, करुणा और शांति की पावन भूमि बोधगया में बुधवार को वर्ल्ड धम्मा संघा ट्रस्ट के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय प्रबुद्ध महासम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में शिक्षा के प्रचार-प्रसार, सामाजिक एकजुटता, आपसी भाईचारे, समानता, विश्व शांति और मानव कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि अंतरराष्ट्रीय दुसाध महासंघ के संस्थापक-सह-अध्यक्ष ई. हेमंत कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
महासम्मेलन में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों, प्रबुद्धजनों, समाजसेवियों और भिक्षु संघ के सदस्यों ने सहभागिता की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी ने सम्मेलन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन को गति देना तथा समाज में एकता, समानता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करना रहा।
शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाने पर चर्चा
सम्मेलन में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। समाज के प्रत्येक वर्ग तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने, लोगों में जागरूकता बढ़ाने और वंचित समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बोधगया केवल बिहार की पहचान नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर है। इसी पावन भूमि पर भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। उनके उपदेशों ने दुनिया को शांति, करुणा, अहिंसा और मानवता का मार्ग दिखाया। वर्तमान समय में हिंसा, संघर्ष और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियों के बीच बुद्ध के विचार और भी प्रासंगिक हो गए हैं। घृणा का अंत प्रेम और करुणा से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय सभ्य एवं विकसित राष्ट्र के मूल आधार हैं। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इन मूल्यों को भारतीय लोकतंत्र की आत्मा बनाया। उनका संदेश— शिक्षित बनो, संगठित रहो और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनो—आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने शिक्षा, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे के महत्व पर अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने सामाजिक एकजुटता, आपसी सहयोग, समानता, शांति और मानवता के मूल्यों को मजबूत बनाने पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षित, जागरूक और संगठित समाज के निर्माण से ही सामाजिक विषमताओं को दूर करने तथा समतामूलक एवं विकसित समाज की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
महासम्मेलन में विश्व बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देने और विभिन्न समुदायों के बीच संवाद एवं सहयोग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और अंतरराष्ट्रीय दुसाध महासंघ के संस्थापक-सह-अध्यक्ष ई. हेमंत कुमार की उपस्थिति प्रमुख रही। भिक्षु संघ के नेता भंते ज्ञानवंश थेरो भी सम्मेलन में शामिल हुए।कार्यक्रम का मंच संचालन बिपिन कुमार ने किया। वहीं, सम्मेलन के निवेदक के रूप में डॉ. पंकज पासवान, उदय पासवान और डॉ. रामकिशोर पासवान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों और समाज के प्रबुद्ध लोगों की सहभागिता से सम्मेलन में शिक्षा, सामाजिक सहयोग और मानव कल्याण से जुड़े विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिला।
विश्व शांति और मानवता का संदेशअंतर
राष्ट्रीय प्रबुद्ध महासम्मेलन को शिक्षा, सामाजिक एकजुटता, समानता और विश्व बंधुत्व की भावना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। आयोजन के माध्यम से समाज को शिक्षित, जागरूक और संगठित बनाने तथा आने वाली पीढ़ियों को बेहतर समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया।
वर्ल्ड धम्मा संघा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव और मानवता के मूल्यों को प्रोत्साहित करना रहा।ठीक है





