
पटना/खगड़िया। खेती और पशुपालन के साथ आय के नए विकल्प तलाश रहे किसानों के लिए मछली पालन के साथ बत्तख पालन एक लाभकारी विकल्प बन सकता है। इससे कम लागत में अतिरिक्त आय के साथ पोषण सुरक्षा को भी बढ़ावा मिल सकता है। इसी उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर (आईसीएआर-आरसीईआर), पटना की ओर से खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड स्थित रानी सकरपुरा गांव में वैज्ञानिक बत्तख पालन पर एक दिवसीय किसान–वैज्ञानिक संवाद सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
3 नवंबर को निलेश देव के मत्स्य पालन तालाब परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में 40 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। किसानों को बत्तख पालन की आधुनिक तकनीकों, आहार व्यवस्था, प्रबंधन पद्धतियों और इसके आर्थिक लाभों की जानकारी दी गई।
मछली पालन के साथ बत्तख पालन से मिलेगा दोहरा लाभ
आईसीएआर-आरसीईआर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वैज्ञानिक बत्तख पालन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बन सकता है। मछली पालन के साथ बत्तख पालन को एकीकृत करने से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ पोषण सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।
कम लागत में अधिक उत्पादन पर वैज्ञानिकों ने दिया जोर
कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रोहन कुमार रमन ने बत्तख पालन की आधुनिक उत्पादन तकनीकों, उचित प्रबंधन, संतुलित आहार व्यवस्था और कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त करने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर बत्तख पालन की उत्पादकता और आर्थिक लाभ बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
वहीं, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विवेकानंद भारती ने बत्तख–मत्स्य समेकित कृषि प्रणाली की उपयोगिता और आर्थिक लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बत्तखों के अपशिष्ट का उचित प्रबंधन तालाब की प्राकृतिक उर्वरता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इससे मछलियों के प्राकृतिक आहार की उपलब्धता बढ़ती है और मत्स्य उत्पादन की लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने तालाब प्रबंधन और मछली पालन की वैज्ञानिक तकनीकों की भी जानकारी दी।
किसानों ने की विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की मांग
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने वैज्ञानिक बत्तख पालन की तकनीकों को व्यावहारिक रूप से सीखने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की। किसानों ने बत्तखों की उन्नत नस्लों, आहार प्रबंधन, रोग नियंत्रण और बत्तख–मत्स्य समेकित कृषि प्रणाली पर विस्तृत प्रशिक्षण प्राप्त करने में रुचि दिखाई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्री तरुण कुमार और श्री रोशन कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अंत में वैज्ञानिकों ने किसानों को स्थानीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए बत्तख एवं मत्स्य पालन की समेकित प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका, अतिरिक्त आय, पोषण सुरक्षा और किसानों की आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



