
पटना/आरा। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती को टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की ओर से ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत भोजपुर जिले के दो गांवों में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। पांच नवंबर को आरा प्रखंड के धमार एवं खजुरिया गांवों में आयोजित इन कार्यक्रमों में कुल 73 किसानों ने भाग लिया। इनमें 30 किसान धमार तथा 43 किसान खजुरिया गांव के थे। खजुरिया में 38 पुरुष और पांच महिला किसानों ने सहभागिता की।
परिसर के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रमों में विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण एवं सुधार के विभिन्न उपायों की जानकारी दी। उन्होंने मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाने, मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों का प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, हरी खाद और प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दिया।
विशेषज्ञों ने बताया कि इन कृषि पद्धतियों को अपनाने से मिट्टी के क्षरण को कम करने, उसकी उर्वरता बनाए रखने और खेती की बढ़ती लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। किसानों को समेकित कृषि प्रणाली तथा अजोला जैसे वैकल्पिक जैव-संसाधनों के उपयोग के बारे में भी बताया गया।
अजोला की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि यह नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक जैव-संसाधन होने के साथ प्रोटीन से भरपूर पशु आहार का भी अच्छा विकल्प है। पशुपालन एवं मुर्गीपालन को लाभकारी बनाने के लिए पशुओं का स्वास्थ्य प्रबंधन, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशन, स्वच्छ पेयजल, उचित आवास व्यवस्था और जैव-सुरक्षा के महत्व की जानकारी दी गई। कम लागत वाले अजोला आधारित चारे को भी उपयोगी विकल्प बताया गया।
महिला किसानों ने दिखाई विशेष रुचि
कार्यक्रम के अंत में किसानों के साथ सहभागी संवाद सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान धमार और खजुरिया के किसानों ने अभियान की सराहना करते हुए बताया कि हरी खाद के इस्तेमाल से यूरिया की खपत कम करने में मदद मिली है। खजुरिया गांव की महिला किसानों ने विशेष रूप से मुर्गीपालन प्रबंधन और अजोला आधारित चारा उत्पादन में रुचि दिखाई।
कार्यक्रमों का नेतृत्व आईसीएआर के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शंकर दयाल ने किया।





