जीएनएसयू में आयोजित हुआ बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन का चौथा आउटरीच कार्यक्रम

डेहरी-आन-सोन (रोहतास) विशेष संवाददाता। बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन का चौथा आउटरीच प्रोग्राम का उद्घाटन रविवार को गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय (जीएनएसयू)परिसर के देव मंगल सभागार में किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गोपाल नारायण सिंह, बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. उपेंद्र प्रसाद, सचिव डॉ. प्रवीण कुमार साहू, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विकास कुमार, वाराणसी के प्रख्यात अस्थि रोग विशेषज्ञ एवं आज के कार्यक्रम के विशेष अतिथि डॉ. अजीत सहगल, नारायण मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. हीरालाल महतो तथा आयोजन सचिव डॉ. कुमार अंशुमान ने संयुक्त ग्रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत उद्घाटन किया।

इस अवसर पर उपस्थित बिहार के कोने-कोने से आए अस्थि रोग विशेषज्ञों, चिकित्सा छात्रों एवं आगत अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डा. हीरालाल महतो ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि मेरे संस्थान को इस कार्यक्रम के लिए अवसर प्रदान किया जाना अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि मैं यहां राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने के लिए संगठन को निमंत्रण दे रहा हूं और इसमें संस्थान के द्वारा हर प्रकार से सहयोग किया जाएगा। इस अवसर पर बढ़ती उम्र के साथ आम जनों को हड्डियों से संबंधित हो रही परेशानियों को लेकर वैज्ञानिक सत्र तथा शोध पर आधारित संबोधन डॉ. उपेंद्र प्रसाद, डॉ. प्रवीण कुमार साहू, डॉ. विकास कुमार एवं डॉ. अजीत सहगल के द्वारा किया गया। डॉ. अजीत सहगल ने बताया कि उन्होंने घुटनों को लेकर विशेष शोध किया है जिसमें बिना घुटनों को बदले उसे ठीक किए जाने के लिए कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस विधि का पेटेंट भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा किया जा चुका है। इस अवसर पर स्थानीय चिकित्सक डॉ. आनंद, डॉ. उमेश कुमार सिंह, डॉ. मनोज अग्रवाल, डॉ. अमिताभ कुमार सिंह, डॉ. उदय कुमार सिन्हा, डॉ. रामजी प्रसाद, डॉ. नवीन नटराज समेत भारी संख्या में चिकित्सक लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर पर गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अध्यक्ष, शिक्षक, सहायक कुल सचिव अजय कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रण डॉ. कुमार आलोक प्रताप, कुलाधिपति के निजी सचिव योगेश उपाध्याय आदि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए संगठन के अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन से दूर दराज के क्षेत्र में भी लोगों को नए शोधों से जागरूकता एवं जानकारी प्राप्त होगी। इसके लिए संगठन हमेशा कार्य करता रहा है और आगे भी करता रहेगा।

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