पूर्व मंत्री डॉ. खालिद अनवर अंसारी का निधन

डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास) कार्यालय प्रतिनिधि। बिहार के पूर्व केबिनेट मंत्री सह आंल इंडिया मोमिन काँन्फ्रेंस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष खालिद अनवर अंसारी का मंगलवार को 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और तीन सितंबर को पटना के मेदांता हॉस्पिटल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके पैतृक शहर डेहरी-ऑन-सोन में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। वह महान स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व मंत्री स्व. अब्दुल कय्यूम अंसारी के ज्येष्ठ पुत्र थे। 

उनके निधन का समाचार सुनकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव, डा. कांति सिंह,ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद अली अनवर सहित अन्य नेताओं ने खालिद अनवर के निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वह निहायत शरीफ और ईमानदार व्यक्ति थे। इनके निधन से बिहार को अपूर्णीय क्षति हुई है। गौरतलब है कि खालिद अनवर अंसारी का जन्म डेहरी ऑन सोन में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल पटना से और उच्चतर शिक्षा जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली और पटना कॉलेज में हुई। वे 1973-77 और 1985-90 में डेहरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। उन्होंने बिहार में कांग्रेस सरकार में परिवहन और डेयरी विकास मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस के साथ बिहार में समता पार्टी के संस्थापक सदस्य थे।

वर्ष 2000 में लालू प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से विधान परिषद सदस्य नामित किया था। उन्होंने बिहार राज्य मोमिन कॉन्फ्रेंस, ऑल इंडिया मोमिन यूथ एंड स्टूडेंट फेडरेशन, बिहार राज्य बुनकर संघ, बिहार प्रदेश बुनकर कांग्रेस, ऑल इंडिया मोमिन तालीमी फंड, जवाहरलाल नेहरू कॉलेज, डेहरी-ऑन-सोन के शासी निकाय के पूर्व अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। श्री खालिद अनवर ने बिहार सहकारी बुनकर कताई मिल्स की सलाहकार समिति के पूर्व अध्यक्ष, झारखंड राज्य के पलामू जिले के लिए प्रधानमंत्री की बिहार राज्य लघु उद्योग समिति, बिहार राज्य हथकरघा और हस्तशिल्प निगम लिमिटेड, बिहार विधान परिषद की प्रकाश समिति के पूर्व अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। उनकी पहल पर केंद्र सरकार ने 1953 में पहला अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग आयोग नियुक्त किया था। 

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