
पटना/समस्तीपुर। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली की ओर से गुरुवार को ताजपुर प्रखंड के कोठिया गांव में ‘कृषि जन कल्याण चौपाल-सह-खेत बचाओ अभियान-2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 400 से अधिक किसानों ने भाग लिया। प्राकृतिक खेती और रबी फसलों के उन्नत प्रभेदों से संबंधित प्रदर्शनी किसानों के आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
हर पंचायत में मृदा जांच प्रयोगशाला की जरूरतअपने संबोधन में केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने ‘दीक्षारंभ’ जैसे अभिनव प्रयासों और विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई किस्मों की देशभर में बिक्री को उपलब्धि बताया।
उन्होंने राज्य के कृषि अधिकारियों को किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचाने, पशुधन संवर्धन को बढ़ावा देने और प्रत्येक पंचायत स्तर पर मृदा जांच प्रयोगशाला की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्राकृतिक खेती के प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में जहां-जहां प्राकृतिक खेती की जा रही है, उसका व्यवस्थित दस्तावेजीकरण आवश्यक है।

मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय ने वर्ष 2022 में देश में पहली बार स्नातक स्तर पर प्राकृतिक खेती का पाठ्यक्रम शुरू किया था। उन्होंने यह भी कहा कि इस पाठ्यक्रम के सभी विद्यार्थियों को अंतिम परीक्षा से पहले ही शत-प्रतिशत प्लेसमेंट प्राप्त हुआ।किसानों की आय बचाने का मिशन है खेत बचाओ अभियानकार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पाण्डेय ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि किसानों की आय बचाने का मिशन है। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने का काम कर रहा है।
उन्होंने प्रत्येक पंचायत में प्राकृतिक खेती का एक मॉडल विकसित करने और किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने की दिशा में विश्वविद्यालय के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए जैविक उत्पादों और रबी फसलों के बीजों के स्टॉल उसके अनुसंधान कार्यों के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
प्राकृतिक खेती और उन्नत बीजों के स्टॉल बने आकर्षणकिसानों को नई कृषि तकनीकों और उन्नत बीजों की जानकारी देने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से प्राकृतिक खेती तथा रबी फसलों की उन्नत किस्मों के स्टॉल लगाए गए। बिहार सरकार के कृषि विभाग ने भी विभिन्न कृषि योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाए। इनके माध्यम से किसानों को कृषि अनुसंधान, प्राकृतिक खेती और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।
जनप्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों की रही भागीदारीकार्यक्रम में मोरवा के विधायक रणविजय साहू और बिहार विधान परिषद के सदस्य डॉ. तरुण कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा विश्वविद्यालय के निदेशक (अनुसंधान), निदेशक (प्रसार शिक्षा), मत्स्यिकी महाविद्यालय, ढोली तथा तिरहुत कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता, जिला कृषि पदाधिकारी और कोठिया के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को कृषि अनुसंधान से जोड़ना, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना, मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और कृषि उत्पादन एवं किसानों की आय में सुधार के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।





