
पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की ओर से शुक्रवार को पटना जिले के नौबतपुर प्रखंड स्थित कराई गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 56 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 31 पुरुष और 25 महिलाएं शामिल थीं। कार्यक्रम के दौरान किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, वैज्ञानिक मत्स्य पालन और पशुधन प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई।
मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने पर जोर
कार्यक्रम में सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार प्रभाग के प्रमुख डॉ. उज्ज्वल कुमार ने किसानों को यूरिया, डीएपी और अन्य रासायनिक उर्वरकों के अनावश्यक एवं अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना जरूरी है।
उन्होंने ढैंचा जैसी हरी खाद, जीवामृत और गोबर की खाद जैसे जैविक संसाधनों को कृषि में अपनाने पर जोर दिया। उनके अनुसार, जैविक खादों के नियमित उपयोग से मिट्टी की संरचना, जैविक कार्बन की मात्रा और जल धारण क्षमता में सुधार होता है। इससे भूमि की दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है। उन्होंने किसानों से फसल चक्र और अन्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की अपील की।
वैज्ञानिक मत्स्य पालन से बढ़ेगी किसानों की आय
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत देबनाथ ने किसानों को वैज्ञानिक मत्स्य पालन, तालाब प्रबंधन और मछली उत्पादन बढ़ाने की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने मत्स्य पालन को किसानों की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी। साथ ही, मत्स्य पालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
पशुओं के पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन की दी जानकारी
वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार ने पशुपालन से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं उनके लाभों के बारे में बताया। उन्होंने पशुओं को संतुलित आहार देने, खनिज मिश्रण और कैल्शियम सप्लीमेंट का उचित उपयोग करने, नियमित कृमिनाशन तथा समय पर टीकाकरण कराने के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि पशुओं के स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने से उनकी उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
टिकाऊ कृषि और संसाधन संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा वैज्ञानिक मत्स्य पालन एवं पशुधन प्रबंधन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाना था। इस दौरान किसानों को कृषि संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से किसानों को यह संदेश दिया गया कि मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा, वैज्ञानिक खेती और कृषि के साथ पशुपालन एवं मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को अपनाकर खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।





