
सासाराम (रोहतास)- कार्यालय प्रतिनिधि। जिला पदाधिकारी रोहतास उदिता सिंह की अध्यक्षता में शेरशाह अभियंत्रण महाविद्यालय, करगहर में फसल अवशेष प्रबंधन पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें जिलास्तरीय, अनुमंडलस्तरीय व प्रखंड स्तर के पदाधिकारी, कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार, कृषि वैज्ञानिक, सभी पंचायतों के मुखिया, पैक्स अध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।बैठक में जिलाधिकारी ने फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटने और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों की तरह रोहतास में भी वायु प्रदूषण न फैले, इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि उपजाऊ मिट्टी को बंजर होने से बचाने और भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ व उपजाऊ वातावरण देने की दिशा में मिलकर काम करना होगा।
कृषि अभियंत्रण के उप निदेशक ने किसानों को बताया कि पराली न जलाकर उसे पशुओं के चारे, जैविक खाद और मशीनरी की मदद से खेत में मिलाने पर फसल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि पिछली खरीफ ऋतु में करगहर प्रखंड में पराली जलाने के 1214 मामले सामने आए, जो जिले में सर्वाधिक हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि ऐसे किसानों पर प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए। किसान धर्मेन्द्र कुमार सिंह ने राउंड स्ट्रा बेलर उपलब्ध कराने की मांग रखी। वहीं कृषि वैज्ञानिकों ने स्क्वॉयर स्ट्रा बेलर को ज्यादा उपयोगी बताया। पैक्स अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि मनरेगा मजदूरों की सहायता से खेतों से पराली हटाने की व्यवस्था की जाए।
जिले के सभी क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं पर सतत निगरानी की जा रही है। दोषी पाए जाने वाले किसानों पर दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ उन्हें सरकारी योजनाओं के अनुदान से वंचित किया जाएगा।
(रिपोर्ट, तस्वीर: टिपु सुलतान)






