शैक्षणिक भ्रमण में विद्यार्थियों ने सीखे व्यावसायिक मधुमक्खी पालन के व्यवहारिक कौशल

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)- विशेष संवाददाता। जमुहार स्थित गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित नारायण कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा 8वें सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए ‘एक्सपेरिएंशियल लर्निंग प्रोग्राम’ के तहत एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने एक उन्नत मधुमक्खी पालन इकाई का निरीक्षण किया, जहाँ उन्हें मधुमक्खी कालोनी प्रबंधन, रानी मधुमक्खी की पहचान एवं संरक्षण, कृत्रिम आहार प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा शहद निष्कर्षण की वैज्ञानिक विधियों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि व्यावसायिक मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि फसलों में परागण के माध्यम से कृषि उत्पादन बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विद्यार्थियों को मधुमक्खी बक्सों की संरचना, फ्रेम की व्यवस्था, स्मोकर एवं अन्य उपकरणों के उपयोग का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराया गया। उन्होंने शहद निष्कर्षण यंत्र के माध्यम से शहद निकालने की प्रक्रिया को स्वयं करके सीखा। साथ ही मधुमोम, रॉयल जेली, परागकण एवं प्रोपोलिस जैसे उत्पादों के व्यावसायिक महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

संस्थान के सहायक प्राचार्य डॉ. आदित्य पटेल ने बताया कि मधुमक्खी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला उद्यम है, जिसे ग्रामीण युवा स्वरोजगार के रूप में अपना सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में इसकी अपार संभावनाएँ हैं।

वहीं सहायक प्राचार्य डॉ. राधेश्याम ढोले ने कहा कि एक्सपीरिएंशियल लर्निंग प्रोग्राम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा शिक्षण के साथ व्यवहारिक अनुभव प्रदान करना है, ताकि वे आत्मनिर्भर कृषि उद्यमी बन सकें।विद्यार्थियों ने इस भ्रमण को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि इस कार्यक्रम से उन्हें व्यावसायिक मधुमक्खी पालन की वास्तविक चुनौतियों और संभावनाओं को समझने का अवसर मिला। यह पहल कृषि शिक्षा को व्यवहारिक दृष्टिकोण से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

(रिपोर्ट, तस्वीर : भूपेंद्रनारायण सिंह, पीआरओ, जीएनएसयू)

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