
डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली और गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, जमुहार के संयुक्त तत्वावधान में दशम युवा इतिहासकार राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ विश्वविद्यालय के देव मंगल सभागार में हुआ। संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘इतिहास लेखन की भारतीय परम्परा’ है। उद्घाटन सत्र के बाद पहले दिन आठ तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देशभर से आए शोधार्थियों और इतिहासकारों ने 200 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गोपाल नारायण सिंह ने की। मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. बालमुकुंद पांडे उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि बिहार सरकार के उच्च शिक्षा एवं विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर तथा विशिष्ट अतिथि शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, औरंगाबाद विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा, युवा प्रमुख डॉ. विकास कुमार सिंह और केंद्रीय विश्वविद्यालय गया के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि से हुआ। इसके बाद संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. राम प्रकाश शर्मा ने संकल्प मंत्र और स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। डॉ. विकास कुमार सिंह ने विषय प्रवर्तन किया।
मुख्य वक्ता डॉ. बालमुकुंद पांडे ने भारतीय इतिहास-दृष्टि और इतिहास लेखन की परंपरा पर विचार रखते हुए इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उच्च शिक्षा एवं विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर ने इतिहास लेखन में भारतीय पद्धतियों के उपयोग की आवश्यकता बताई। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि नई शिक्षा में भारत की बात और भारतीय भाव को प्रमुखता मिलनी चाहिए।
प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त इतिहास लेखन की आवश्यकता पर जोर देते हुए हिस्टोरियोग्राफी के लिए ‘भारत विद्या’ शब्द के प्रयोग का आग्रह किया। अध्यक्षीय संबोधन में गोपाल नारायण सिंह ने रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों से भारतीय इतिहास और जीवन-दृष्टि को समझने की बात कही। उन्होंने कहा कि श्रीराम के चरित्र से कर्तव्य और आदर्श जीवन की प्रेरणा ली जा सकती है।
धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के संयोजक डॉ. मुकेश कुमार ने किया, जबकि मंच संचालन डॉ. निर्मल पांडे ने किया।आठ तकनीकी सत्रों में 200 से अधिक शोध-पत्रउद्घाटन सत्र के बाद संगोष्ठी के प्रथम दिन आठ तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए शोधार्थियों और इतिहासकारों ने सहभागिता की। शोध-पत्रों में भारतीय इतिहास लेखन की परंपरा, इतिहास के स्रोत, इतिहास-बोध, भारतीय इतिहास-दृष्टि और इतिहास लेखन की विभिन्न पद्धतियों से जुड़े विषयों पर शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम के आयोजन में इतिहास संकलन समिति दक्षिण बिहार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। राष्ट्रीय सचिव प्रो. राजीव रंजन, प्रांत अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, प्रांत महासचिव डॉ. शैलेश कुमार और प्रांत कोषाध्यक्ष डॉ. सूर्यनारायण प्रसाद सहित समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
आयोजन सचिव डॉ. मुकेश कुमार ने आयोजन समिति, इतिहास संकलन समिति दक्षिण बिहार के कार्यकर्ताओं और विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया। संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों से आए इतिहासकारों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों की सहभागिता रही।





