
- 26 राज्यों के 416 प्रतिनिधि हुए शामिल, 16 तकनीकी सत्रों में 400 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत
डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)। भारतीय इतिहास को भारतीय दृष्टि और स्वदेशी पद्धतियों से देखने-समझने पर दो दिनों तक चले व्यापक अकादमिक विमर्श के बाद दशम युवा इतिहासकार राष्ट्रीय संगोष्ठी का गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, जमुहार परिसर में समापन हुआ। ‘इतिहास लेखन की भारतीय परम्परा’ विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के 26 राज्यों से 416 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। संगोष्ठी के दोनों दिनों में 16 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 400 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
माधव संस्कृति न्यास, नई दिल्ली, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली और गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोप सत्र की अध्यक्षता भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर ) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अरविन्द जमखेडकर ने की।
संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. राम प्रकाश शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन और विषय प्रवर्तन किया, जबकि डॉ. मुकेश कुमार ने अतिथियों का परिचय कराया। क्षेत्रीय संगठन मंत्री सुरेश पाण्डेय ने दो दिवसीय संगोष्ठी का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि देश के 26 राज्यों से कुल 416 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें इतिहासकार, शोधार्थी, शिक्षाविद और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल रहे। बिहार सरकार के कई मंत्री, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि और विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं प्रोफेसर भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
भारतीय दृष्टि से इतिहास लेखन पर जोर
समारोप सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल ने बीज वक्तव्य दिया। उन्होंने इतिहास लेखन में भारतीय दृष्टि को अपनाने और भारतीय संदर्भों एवं स्रोतों को उचित महत्व देने का आग्रह किया।
राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री संजय श्री हर्ष ने मार्गदर्शक वक्तव्य देते हुए इतिहास संकलन के उद्देश्य और कार्यदिशा पर प्रकाश डाला। संगठन के महासचिव हेमंत धीग मजूमदार ने संगठन के उद्देश्यों को रेखांकित किया और इतिहास के भारतीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
16 तकनीकी सत्रों में 400 से अधिक शोध-पत्र
संगोष्ठी के दोनों दिनों में आयोजित 16 तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न राज्यों से आए युवा इतिहासकारों और शोधार्थियों ने अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए। शोध-पत्रों में भारतीय इतिहास लेखन की परंपरा, इतिहास के स्रोत, इतिहास-बोध, भारतीय इतिहास-दृष्टि तथा इतिहास लेखन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विमर्श हुआ।
आयोजन में युवा इतिहासकार परिषद के राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. विकास कुमार सिंह, समन्वयक डॉ. राम प्रकाश शर्मा और संयोजक डॉ. मुकेश कुमार की प्रमुख भूमिका रही। आवास और सत्र संयोजन की व्यवस्था डॉ. विकास कुमार सिंह ने संभाली, जबकि यातायात, मंच सज्जा और संचालन की व्यवस्था डॉ. राम प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में की गई।
स्मारिका के संपादन में इतिहास संकलन समिति दक्षिण बिहार की ओर से बिहार के राष्ट्रीय सचिव प्रो. राजीव रंजन, प्रांत अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, प्रांत महासचिव डॉ. शैलेश कुमार, प्रांत कोषाध्यक्ष डॉ. सूर्यनारायण प्रसाद और हे गोयल सहित अन्य सदस्यों ने सहयोग किया।
यातायात व्यवस्था में दीपक सिंह, सूरज सिंह, रोशन पाण्डेय और शिवम पाटीदार ने सहयोग किया। मीडिया समिति में रोशन कुमार, प्रशांत कुमार और आकाश कुमार तथा आवास व्यवस्था में अभिषेक सिंह, सत्यम सहित अन्य सदस्यों ने योगदान दिया। गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय की ओर से कृष्णा साहू, डॉ. मयंक राय, रवि रंजन, रोशन सिंह, पिंटू कुमार, संजय कुमार, अंकित कुमार और मनीष कुमार सहित अन्य लोगों ने आयोजन में सहयोग किया।
पंजीकरण और किट वितरण में दिल्ली से डॉ. अस्मित शर्मा और राजीव मिश्र ने सहयोग किया। केंद्रीय युवा इतिहासकार टोली, नई दिल्ली से डॉ. रत्नेश त्रिपाठी, डॉ. नरेंद्र शुक्ल, डॉ. निर्मल पाण्डेय और डॉ. प्रदीप उपाध्याय सहित विभिन्न राज्यों के युवा इतिहासकार प्रमुख भी शामिल हुए।
आयोजन में कई लोगों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
संगोष्ठी को सफल बनाने में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बालमुकुंद पाण्डेय, गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गोपाल नारायण सिंह, गोविन्द नारायण सिंह और त्रिविक्रम नारायण सिंह की विशेष भूमिका रही।
आयोजकों ने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय इतिहास लेखन की समृद्ध परंपरा, भारतीय इतिहास-दृष्टि और इतिहास लेखन की स्वदेशी पद्धतियों पर व्यापक अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाना है। देश के विभिन्न राज्यों से आए इतिहासकारों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों की सहभागिता ने संगोष्ठी को राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण अकादमिक मंच प्रदान किया।





