आ गया घरों में नरक के घुसने का मौसम, दो पीढ़ी गुजर गई आखिर कब मिलेगा अधिकार?

 

फिर नहीं साफ हुईं नालियां और आ गया घरों में नरक के घुसने का मौसम

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-वरिष्ठ संवाददाता। इस साल फिर बरसात से पहले नालियां साफ नहीं की गईं और नरक यानी नाली का गंदा पानी के घरों में घुसने का मौसम पहुंच गया। डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद नाली-नालों के निर्माण पर आवंटित रकम को तो येन-केन प्रकारेण खर्च कर देती है, मगर साफ-सफाई का आवश्यक आधार-कार्य वह नहीं कर रही है। सफाईकर्मी गलियों, मुहल्लों में आते हैं और नालियों की ऊपरी सतह पर जमे पालिथिन और सतही खर-पतवार आदि निकाल ले जाते हैं। नालियों के भीतर जमा होते जाने वाला कचरा कोनाली के अंदर से निकाले नहीं जाने की वजह से नालियां जमीन की सतह से चार दशकों में चार-पांच फीट तक भर चुकी हैं। नालियों के ऊपर उठते जाने के कारण लोगों को समय-समय पर अपने घरों के दरवाजे, आंगन ऊंचे कराने पड़े हैं। अब तो पिछले कई सालों से नाली के पानी के घुस आने से बचने के लिए घरों के दरवाजों के आगे हर बरसात में तीन-चार महीनों के लिए कच्चा घेरा डालना पड़ता है। क्योंकि, आंगन और दरवाजे को ऊंचा कर लेने का विकल्प लोगों के पास नहींबचाहै।
गर्मी में तो नाली का पानी वाष्प बनकर उड़ता रहता है, इसलिए थोड़ी राहत रहती है। मगर बरसात में थोड़ी बारिश होते ही नालियां बजबजा उठती है और उनका पानी उफन कर गलियों में जमा होने के साथ घरों में भी प्रवेश करने लगता है। गलियों से गुजरना दुभर हो जाता है। अतिरिक्त सफाई मजदूर और नाली-नाला उड़ाही के लिए वांछित संसाधन मुहैया नहीं करने का ही कु-फल है कि न्यू एरिया, जोड़ा मंदिर, जक्खी बिगहा, स्टेशन रोड, मोहन बिगहा रोड सहित शहर के अनेक वार्ड बरसात के महीनों में नरक के मुहल्लों में तब्दील हो जाते हैं, जो दशकों पहले अपनी साफ-सुथरी बसावट के लिए जाने जाते थे।
मानसून दस्तक दे चुका है, मगर नालियों की सफाई कराए जाने के बजाय डस्टबिन बांटे जा रहे हैं। पूछे जाने पर, संपर्क करने पर हर साल की तरह नगर परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षदों की ओर से इस साल भी बारिश-पूर्व दिए जाने वाले पुराने बयान ही दुहराए गए कि मशीन लगाकर, अतिरिक्त मजदूरों की व्यवस्था कर नालों-नालियों की उड़ाही होगी। मगर कब? नगर परिषद नागरिकों से आखिर टैक्स किस बात की लेती है?
(सोनमाटी मीडिया समाचार)

 

आशंका में दुकानदार : दो पीढ़ी गुजर गई,आखिर कब मिलेगा अधिकार ?

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-विशेष प्रतिनिधि। देश के आजाद होने के पहले से ही रोहतास जिला अंतर्गत डेहरी-आन-सोन के स्टेशन रोड पर खानाबदोशों की तरह बसे दुकानदारों की दो पीढिय़ां गुजर चुकी हैं। आजादी के बाद तीसरी पीढ़ी आज भी स्थाई बंदोबस्ती की आस लगाए बैठी है। 1955 तक स्टेशन रोड के उत्तरी किनारे और रेलवे परिसर के बीच की जमीन का बंदोबस्त रोहतास जिला परिषद हर साल पुनर्नवीकरण की निर्धारित शुल्क लेकर करती थी। सड़क चौड़ीकरण के लिए जिला परिषद की ओर से यह जमीन बिहार सरकार के पथनिर्माण विभाग को सौंप दी गई। पथनिर्माण विभाग ने दुकानदारों को जमीन से बेदखल करने का प्रयास किया तो दुकानदार पटना हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने अप्रैल 1969 को बिहार सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अधिनियम-1956 के मद्देनजर दुकानदारों के पक्ष में फैसला दिया। तब पथनिर्माण विभाग सुप्रीमकोर्ट में गया। 11 अक्टूबर 1985 को सुप्रीमकोर्ट ने फैसला दिया कि राज्य सरकार दुकानदारों को सड़क किनारे से हटाए जाने से पहले वैकल्पिक भूमि पर छह महीनों में इनके पुनर्वास करने की व्यवस्था करे। यह अवधि अब से 33 साल पहले ही 11 अप्रैल 1986 को बीत गई। किसी तरफ से कोई पहल नहींहुई।
इस बीच पथनिर्माण विभाग ने स्थानीय प्रशासन की मदद से अनेक दुकानों को इस आधार पर तोडऩे का भी कार्य किया कि वे अतिक्रमण कर बनाए गए हैं। फिर भी दुकानें मालगोदाम चौक से पूरब की ओर बढ़ती गई। स्टेशन रोड के उत्तर किनारे की दुकानें रेलवे नाला से सटी हैं, जो आजादी से पहले दुर्गामंदिर के करीब तक थीं। आजादी के बाद दुकानें पूरब में पहले मालगोदाम चौक तक और बाद में पाली पुल तक पहुंच गईं। स्टेशन रोड के दक्षिण किनारे के दुकान-मकान भी अतिक्रमण कर आगे बढ़ गए। दस्तावेज में दक्षिण किनारे 80 फीट खाली जमीन दर्ज होने के बावजूद पथनिर्माण विभाग खामोश बना रहा।

हलचल 2017 में तब हुई, जब रेलवे स्टेशन से पाली ओवरब्रीज तक डेढ़ किलोमीटर सड़क को डबल-लेन करने की मंजूरी बिहार सरकार ने दी और सड़क निर्माण का टेंडर निकला। तब जनवरी 2018 में 24 दुकानदारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट के सिंगल बेच ने आठ अप्रैल 2019 को यह निर्देश दिया कि याचिका-कर्ताओं को जमीन पर बने का रहने का अधिकार तो नहींहै, मगर दशकों से बसे होने के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के 1985 के निर्देश के आलोक में इनके पुनर्वास की व्यवस्था नगर परिषद को राज्य सरकार के प्रावधान के अंतर्गत त्वरित गति से करनी चाहिए, जो सक्षम एजेंसी है।
फकीरा विकास संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष प्रभुनाथ सिंह का कहना है कि स्टेशन रोड चुनाभट्ठा मोड़ से पाली मोड़ तक एक खातियान की जमीन है, जिस पर रेलवे स्टेशन के पश्चिम में प्लाट काटकर दुकानें लीज पर दी भी गई हैं। इसलिए भय-आशंका में झूल रहे शेष दुकानदारों का भी सुप्रीमकोर्ट, हाईकोर्ट के निर्देश के आलोक में पुनर्वास हो। पुनर्वास की मांग का ज्ञापन डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपा गया है।
(सोनमाटी मीडिया समाचार)

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