मुख्य न्यायाधीश ने कहा न्याय की परिपाटी में बदलाव वक्त की मांग, एक माह में पूरी होगी भवन निर्माण की प्रक्रिया

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-विशेष प्रतिनिधि। बिहार के मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही ने कहा कि समय बदल चुका है, अब न्याय परिपाटी में भी अपेक्षित बदलाव वक्त की मांग है। त्वरित न्याय और सही न्याय में कोर्ट और बार दोनों की भूमिका है। अधिवक्ताओं की ओर साक्ष्य संकलित कर तेजी के साथ न्यायालय में प्रस्तुत होंगे, तभी न्याय की धारा तेज गति से बहेगी। न्याय देना-दिलाना दोनों ही इंसानियत की बड़ी सेवा है और इंसानियत की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। न्यायालयों में समाज का ही अक्स प्रतिबिंबित होता है और न्यायालयों में बढ़ते मुकदमों की संख्या समाज का बेहतर आईना नहीं है। मुख्य न्यायाधीश डिहरी अनुमंडल न्यायालय भवन के लिए अधिग्रहित भूमि का निरीक्षण करने और डिहरी विधिज्ञ संघ की समस्याओं से अवगत होने यहां पहुंचे थे।
न्यायिक निष्पादन की गति धीमी, तेज रफ्तार के लिए कोर्ट और बार दोनों के योगदान की जरूरत
मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही ने एनिकट स्थित न्यायालय परिसर के लिए अधिग्रहित 9.6 एकड भूमि का स्थल-निरीक्षण जिला न्यायाधीश पारसनाथ राय, जिलाधिकारी पंकज दीक्षित दीक्षित और प्रभारी पुलिस अधीक्षक विकास वर्मन के साथ किया। इससे पहले वह अनुमंडल न्यायालय की मूलभूत सुविधाओं और न्यायिक वस्तुस्थिति की संक्षिप्त जानकारी प्राप्त की। इसके बाद डिहरी अनुमंडल विधिज्ञ संघ के स्वागत समारोह में भाग लिया, जहां उन्हें विधिज्ञ संघ की ओर से मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने बिहार दौरे के अपने अनुभव का बयान करते हुए कहा कि राज्य की नीचली आदलतों के तीन-चौथाई हिस्से के निरीक्षण के क्रम में उन्होंने 20वींसदी के भी मामले बड़ी संख्या में पाए हैं, जो निष्पादन की प्रत्याशा में हैं। बेशक निष्पादन की गति धीमी है, जिसमें कोर्ट और बार दोनों के तेज रफ्तार योगदान की जरूरत है। उन्होंने कई तरह से आकलन के लिए बनाई गई विभिन्न समितियों के आधार पर यह बताया कि 500 मुकदमों पर एक न्यायिक अधिकारी होना चाहिए। डिहरी अनुमंडल कोर्ट की न्यायिक सीमा वाले पांच हजार मुकदमों की जानकारी उन्हें दी गई है। इस हिसाब से 10 न्यायिक अधिकारी होने चाहिए। न्यायिक अधिकारियों की कमी है। ज्यों ही न्यायिक अधिकारियों की उपलब्धता होगी, डिहरी अनुमंडल न्यायालय के लिए भी प्रतिपूर्ति की जाएगी।

एक माह में पूरी होगी भवन के निर्माण-पूर्व की प्रक्रिया
मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही ने विधिज्ञ संघ के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासनिक भवन के निर्माण-पूर्व की प्रक्रिया कोई अपरिहार्य तकनीकी अड़चन नहींआई तो एक माह में पूरी कर ली जाएगी और उम्मीद है कि बरसात खत्म होने से पहले या तुरंत बाद में भवन निर्माण शुरू भी हो जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले जिस भवन का प्रारूप (नक्शा) तैयार किया गया था, उसमें बार के लिए जगह निर्धारित नहींथी। मगर अब जो नक्शा बनाया गया है, उसके भव्य भवन में न केवल अधिवक्ताओं के बैठने की जगह बल्कि उनके टाइपिस्टों और क्लर्कों के लिए भी जगह निर्धारित की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के पांच अनुमंडल न्यायालय कई दृष्टियों से अग्रणी पाए गए हैं, जिनमें डिहरी अनुमंडल न्यायालय शीर्ष पर है।

विधिज्ञ संघ ने की एडीजे और सब-जज के प्रावधान की मांग

मुख्य न्यायाधीश अभिनंदन समारोह की अध्यक्षता करते हुए डिहरी अनुमंडल विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष उमाशंकर पांडेय ने कहा कि 2012 में अनुमंडल कोर्ट का विधिवत उद्घाटन तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रेखा मनहरलाल दोषित ने किया था और अब इसके अपने भव्य भवन परिसर का निर्माण मुख्य न्यायाधीश के ही नेतृत्व में होने जा रहा है, जो डिहरी अनुमंडल कोर्ट के लिए ऐतिहासिक रूप से उल्लेखनीय बता है। बताया कि डिहरी अनुमंडल के 13 हजार मुकदमें स्थानीय और जिला न्यायालयों में लंबित हैं। यहां उच्चस्तरीय निर्णय के लिए सक्षम न्यायिक पदाधिकारी नहींहैं। समारोह का संचालन करते हुए डिहरी अनुमंडल विधिज्ञ संघ के सचिव मिथिलेश कुमार सिन्हा ने संघ की ओर से मुख्य न्यायाधीश को मांगपत्र सौंपा, जिसमें अपर जिला न्यायाधीश, सब जज के कोर्ट का प्रावधान करने और तिलौथू थानों के मुकदमों को सासाराम न्यायालय में दर्ज होने से अवमुक्त करने का आदेश देने की मांग की गई। सासाराम जिला न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्त नरेन्द्र पांडेय, डिहरी अनुमंडल के वरिष्ठ अधिवक्ताओं रामानंद दुबे, बैरिस्टर सिंह, संतोष सिंह आदि ने समस्याओं को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा। अधिवक्ता मनीषा दुबे ने भी महिला अधिवक्ताओं और महिला परिवाादियों के लिए प्रसाधन संसाधन मुहैया कराए जाने की मांग रखी।

(रिपोर्ट : कृष्ण किसलय, साथ में चंद्रगुप्त मेहरा, तस्वीर : मदन कुमार)

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