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फूलों की घाटी में भी लाकडाउन खत्म/ शहर में दिन में खुलेंगी दुकानें, पर रात में कर्फ्यू/ आनलाइन कोविड-19 चित्रांकन प्रतियोगिता

उंचे हिमालय पर है पृथ्वी का स्वर्ग, परियों-किन्नरों का नंदकानन !
-0 कृष्ण किसलय 0-
समूह संपादक, सोनमाटी मीडिया समूह

हिमालय की ऊंची गोद में समुद्र तल से 12 हजार 995 फीट पर देवभूमि उत्तराखंड में स्थित परियों-किन्नरों का लोकचर्चित किंवदंति स्थल और धरती का स्वर्ग के रूप में विश्व प्रतिष्ठित फूलों की घाटी भी 01 जून से इको पर्यटन के लिए खोल दी गई है। यहां हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं, जिनमें धार्मिक पर्यटकों के साथ बागवानी, कृषि के शोधार्थी, पुष्पप्रेमी भी होते हैं। यूनेस्को द्वारा विश्वधरोहर स्थल घोषित फूलों की घाटी विश्व में अपनी तरह के अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य का एकमात्र अद्वितीय संग्रहालय है। स्कंद पुराण में इस स्थान का उल्लेख नंदकानन नाम से है। इसका जिक्र महाकवि कालिदास ने किया है और महाभारत, वाल्मीकि रामायण में भी है। 1982 में स्थापित फूलों की घाटी उत्तराखंड के चमोली जिला में स्थित नंदादेवी राष्ट्रीय उद्यान (बायोस्फियर रिजर्व) का हिस्सा है। भारत मेंं हिमालय की सबसे ऊंची चोटी कंचनजंघा (28169 फीट) के बाद नंदादेवी पर्वतशिखर दूसरी सबसे ऊंची (25643 फीट) चोटी है। 87.50 वर्ग किलोमीटर में विस्तृत फूलों की घाटी में 500 से अधिक पुष्प प्रजातियां हैं। यहां मौजूद औषधीय गुण वाले दुर्लभ पुष्प, पादप, पौधे, जड़ी-बूटी पृथ्वी के किसी अन्य भाग में पैदा नहीं होते। कस्तूरीमृग, हिम-रीक्ष (सफेद भालू), हिमबाध (सफेद तेंदुआ), मोनाल पक्षी और अप्रतिम तितलियां हिमालय की इस घाटी के बाशिंदे हैं। इस घाटी में कई ऐसी पादप प्रजातियां बची हुई हैं, जो पृथ्वी के अन्य स्थलों से लुप्त हो चुकी हैं। फूलों की घाटी अपने-आप में जैव विकास (वनस्पति) की चरम सीमा है, जहां कई पुष्प प्रजातियां अब भी जीवित जीवाश्म की तरह करोड़ों वर्ष पूर्व के अपने आदिम स्वरूप में बरकरार हैं। धरती की इस सुंदरता को सुरक्षित रखने और इसकी अद्भुत जैव विविधता की रक्षा के लिए इसे संरक्षित राष्ट्रीय उद्यान का हिस्सा बनाया गया, जहां मानवीय गतिविधियों का निषेध है।

आधुनिक दुनिया को ब्रिटिश पर्वतारोही ने कराया परिचित :

ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक एस स्मिथ और उनके साथी आरएल होल्डसवर्थ ने फूलों की घाटी के महत्व से आधुनिक दुनिया को सबसे पहले 1931 में परिचित कराया। यह इत्तेफाक था कि दोनों हिमालय के 25446 फीट ऊंचे कामेट पर्वतशिखर से पर्वतारोहण के बाद लौट रहे थे और उन्हें फूलों की घाटी से गुजरना पड़ा था। जब फ्रैंक एस स्मिथ ने किताब लिखी वैली आफ फ्लावर्स, तब यही नाम दुनियाभर में प्रसिद्ध हो गया। वह 1937 में दुबारा फूलों की घाटी का अवलोकन करने गए और अगले साल 1938 में उनकी किताब प्रकाशित हुई। हालांकि उनसे 69 साल पहले 1862 में ब्रिटिश सेना के एक्सप्लोरर आफिसर कर्नल एडमंड स्मिथ के नेतृत्व में वहां सेना की छोटी टुकड़ी पहुंची थी।

मगर हजारों सालों से जानकारी के बावजूद…

(15 साल पहले दैनिक जागरण में प्रकाशित कृष्ण किसलय विशेष की रिपोर्ट। तब फूलों की घाटी को विश्व धरोहर स्थल मानने के मुद्दे पर यूनेस्को की वर्ल्ड हेरीटेज कमेटी और आईयूसीएन की बैठक स्वीटजरलैंड में होने वाली थी।)

इस सुंदरतम स्थल की हजारों सालों से जानकारी होने के बावजूद वहां बाहर के लोग खड़ी-ऊंची घाटी, दुर्गम पर्वत और प्रतिकूल बर्फीले मौसम के कारण नहींजा पाते थे। एक हिमनद से रिसकर निकलने वाली पुष्पावती नदी फूलों की घाटी से गुजरती है, जिसके उस पार खड़ा नर-पर्वत प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम की पर्वतीय घाटी को अलग करता है। नवंबर-मई में हिमालय की यह ऊंचाई बर्फ से पटी रहती है, मगर बर्फ पिघलनी शुरू होती है तो जून से फूल खिलने लगते हैं। चमोली जिला में गोविंदघाट और हेमकुंड साहिब के बीच स्थित पर्वतीय गांव घांघरिया से 13 किलोमीटर का सफर तय कर फूलों की घाटी की तीन किलोमीटर लंबी और आधा किलोमीटर चौड़ी एक पट्टी देखी जा सकती है। गोविंदघाट की दूरी प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ऋषिकेश (देहरादून जिला) से 270 किलोमीटर है और हेमकुंड साहिब एक बर्फीली झील के किनारे सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह को समर्पित धार्मिक स्थल है, जिसका वर्णन सिख इतिहासकार कवि भाई संतोख सिंह (1787-1843) ने अपनी किताब में किया है।

उल्लंघन हुआ तो होगी आपदा अधिनियम की कार्रवाई

पटना/डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-कार्यालय प्रतिनिधि। अब दिन में हर जगह होगी चहल-पहल और रात में कर्फ्यू, मगर निषेध क्षेत्र में 30 तक पूर्णबंदी (लाकडाउन) रहेगी। एक हफ्ते बाद 08 जून से धर्मस्थल, होटल, रेस्टुरेंट, माल बाजार खुलेंगे। फिर भी शिक्षण संस्थान, सिनेमा अभी नहींखुलेेंगे और बड़े समारोह भी नहीं होंगे। बस, टैक्सी, टेम्पू के लिए जरूरी निर्देश जारी किए जा चुके हैं। डेहरी के अनुमंडलाधिकारी लाल ज्योतिनाथ शाहदेव के अनुसार, सरकार के निर्देशानुसार बस-टैक्सी अड्डों पर पुलिस बल के साथ दंडाधिकारी तैनात होंगे ताकि यात्री परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन हो सके। उल्लंघन की स्थिति में मोटरवाहन संचालक पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सत्तर दिन में 01से 3676 हो गए कोरोना संक्रमित :
लाकडाउन खत्म होने के बाद बिहार और रोहतास जिला में कोरोना विषाणु संक्रमण की स्थिति को भी एहतियात के लिए जान लेना जरूरी है। कोरोना जनित महामारी कोविड-19 से राज्य में 23वीं मौत भागलपुर में हो चुकी है। राज्य में अब तक 3872 कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हुई है, जिनमें 1741 ठीक होकर अस्पतालों से घर जा चुके हैं। बिहार में प्रथम कोविड-19 मरीज की पुष्टि 22 मार्च को हुई थी। इसके बाद लाकडाउन-1 की अवधि 14 मार्च तक कोविड-19 पीडि़तों की संख्या 66, लाकडाउन-2 की अवधि 03 मई तक 528 और लाकडाउन-3 की अवधि 17 मई तक 1193 हो गई। अंतिम लाकडाउन-4 की अवधि 31 मई तक राज्य में 3676 कोरोना संक्रमित हो गए। 31 मई को लाकडाउन खत्म होने तक देश में कुल 181023 कोविड-19 संक्रमितों में से 5191 की मौत हो गई और 88335 मरीज स्वस्थ होने के बाद अस्पतालों से घर भेज दिए गए। कोरोना संक्रमितों का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य में 65 नए मरीजों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि जांच रिपोर्ट में हुई है।

रिपोर्ट, तस्वीर : निशांत राज, इनपुट : पापिया मित्रा

पुरस्कृत होंगे आनलाइन कोविड-19 चित्रांकन के प्रतियोगी

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-कार्यालय प्रतिनिधि। सांस्कृतिक सर्जना की संवाहक संस्था सोन कला केेंद्र द्वारा 31 मई को संयोजित की गई आनलाइन कोविड-19 चित्रांकन प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए जाएंगे और अग्रणी स्थान प्राप्त करने वालों को स्मृतिचिह्नï भी भेंट किया जाएगा। इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए कुल 160 प्रतिभागियों ने सोन कला केेंद्र के व्हाट्सएप ग्रुप (एसकेकेआर्ट) के जरिये अपना आवेदन आनलाइन सबमिट (जमा) किया था। प्रतियोगिता चार उम्र-वर्ग श्रेणी 5-8 वर्ष, 9-11 वर्ष, 12-15 वर्ष और 16-18 वर्ष में आयोजित की गई थी। सोन कला केेंद्र के सचिव निशांत राज के अनुसार, निर्धारित समय तक संबंधित व्हाट्सएप ग्रुप का एडमिन सबके लिए खुला था, ताकि सभी अपनी सूचनाएं दाखिल कर सकेें। सूचनाएं दाखिल करने वाले प्रतिभागी को उनकी आनलाइन पहचान के लिए आईडी नंबर दिए गए। प्रतियोगिता का आनलाइन संयोजन सोन कला केेंद्र के अध्यक्ष दयानिधि श्रीवास्तव और सचिव निशांत राज के मोबाइल फोन नंबरों 7762029999, 9955622367 के जरिये व्हाट्एप ग्रुप पर किया गया। प्रतियोगियों को चित्रकारी के लिए एक घंटा का समय दिया गया था और उनके विषय 15 मिनट पहले बताए गए थे। सस्था के अध्यक्ष दयानिधि श्रीवास्तव ने बताया कि प्रतिभागियों द्वारा बनाए और आनलाइन भेजे गए चित्रकांनों की स्कीनिंग संस्था के अध्यक्ष, सचिव के साथ कार्यकारी अध्यक्ष जीवन प्रकाश, उपाध्यक्ष अरुण शर्मा, कोषाध्यक्ष राजीव सिंह, उप कोषाध्यक्ष नंदकुमार सिंह, उप सचिव सत्येन्द्र गुप्ता, सुशील कुमार सिंह ओम आदि की टीम द्वारा पूरा हो जाने के बाद निर्णायकों के फैसले के आधार पर प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।

रिपोर्ट, तस्वीर : निशांत राज

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